Xप्लेन: ट्रंप के टैरिफ के हमलों के खिलाफ़ ब्रिक्स देश एकजुट, कहा- एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों सही नहीं
ब्रिक्स देश केवल अपना बचाव नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे डब्ल्यूटीओ (WTO), आईएमएफ (IMF) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) जैसी बड़ी वैश्विक संस्थाओं में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं.

ब्रिक्स के 45-पेजों वाले घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले और पश्चिम एशिया युद्ध जैसे गंभीर और संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से बात की गई है. इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि मौजूदा मतभेदों को पाटने के लिए कूटनीतिक कोशिशें समय की सबसे बड़ी ज़रूरत हैं. इसके अलावा, दस्तावेज में गाज़ा में तुरंत युद्धविराम लागू करने और वहां मानवीय सहायता निर्बाध रूप से पहुंचाने का भी पुरजोर समर्थन किया गया है, हालांकि इसमें रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई विशेष उल्लेख नहीं किया गया है.
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम सीधे तौर पर लिए बिना, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के नई दिल्ली घोषणापत्र में उनके आक्रामक "अमेरिका फर्स्ट" टैरिफ अभियानों और वॉशिंगटन से लगने वाले संभावित सेकेंडरी प्रतिबंधों के खिलाफ एक स्पष्ट परोक्ष संदेश दिया गया है. इस समूह ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर गहरी चिंता जताई है और अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ बढ़ाने के तमाम कदमों का कड़ा विरोध किया है.
पहलगाम और पश्चिम एशिया
ब्रिक्स के 45 पन्नों के घोषणापत्र में पहलगाम में हुए आतंकी हमले और पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) के युद्ध की कड़ी निंदा की गई है. इसमें कहा गया है कि देशों के बीच आपसी मतभेदों को खत्म करने का एकमात्र रास्ता कूटनीति यानी बातचीत है. साथ ही, गाजा में तुरंत युद्धविराम लागू करने और वहां राहत सामग्री पहुंचाने की मांग की गई है, हालांकि इसमें रूस-यूक्रेन युद्ध का कोई जिक्र नहीं है.
अमेरिका और ट्रंप की नीतियों पर परोक्ष प्रहार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना, इस सम्मेलन में उनकी "अमेरिका फर्स्ट" टैरिफ नीतियों और दूसरे देशों पर लगाए जाने वाले आर्थिक प्रतिबंधों का कड़ा विरोध किया गया है. घोषणापत्र के पैरा 22 में साफ कहा गया है कि ब्रिक्स देश एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और दबाव के खिलाफ हैं.
डब्ल्यूटीओ (WTO) के नियमों का उल्लंघन
बैठक में इस बात पर चिंता जताई गई कि देश जिस तरह से एकतरफा टैक्स (टैरिफ) लगा रहे हैं, वह वैश्विक व्यापार को बिगाड़ रहा है और विश्व व्यापार संगठन के नियमों के खिलाफ है.
ग्लोबल साउथ और आपूर्ति श्रृंखला:
अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों के कारण भारत, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे अपने व्यापारिक रास्तों और सप्लाई चेन को सुरक्षित करें. अमेरिकी दबाव के कारण ही भारत और चीन जैसे पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भी साझा आर्थिक हितों के लिए एक मंच पर आ रहे हैं.
वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग
ब्रिक्स देश केवल अपना बचाव नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे डब्ल्यूटीओ (WTO), आईएमएफ (IMF) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) जैसी बड़ी वैश्विक संस्थाओं में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं ताकि दुनिया के फैसलों में उनकी भी मजबूत आवाज हो सके.
पीएम मोदी का बड़ा बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि अब ब्रिक्स को दुनिया में बड़े बदलाव लाने होंगे. आज दुनिया के संकटों का सामना 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देश) सबसे पहले करता है, लेकिन फैसले लेने की टेबल पर उसे पीछे बैठा दिया जाता है. मोदी ने कहा कि इस व्यवस्था को बदलना होगा और यूएनएससी (UNSC) में भारत जैसी उभरती ताकतों को स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा, "अगर हमारा भविष्य साझा है, तो उसे तय करने का अधिकार भी सबका होना चाहिए."























