कश्मीरी पंडितों को फिर धमकी! लश्कर के संगठन ने कहा- 'दूर रहो...'
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को ULC के नाम से नई धमकी मिली है. ट्रांजिट कॉलोनियों में रहने से रोकने की चेतावनी के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को लेकर सुरक्षा चिंता एक बार फिर बढ़ गई है. लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े बताए जा रहे संगठन यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) के नाम से एक नई धमकी सामने आई है. इसमें कर्मचारियों को अलग ट्रांजिट कॉलोनियों में रहने से दूर रहने की चेतावनी दी गई है.
यह धमकी ऐसे समय सामने आई है, जब कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने घाटी में सुरक्षित सरकारी आवास उपलब्ध कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई धमकी में अलग बस्तियों में रहने की व्यवस्था को निशाना बनाया गया है और कर्मचारियों को डराने की कोशिश की गई है.
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ट्रांजिट आवास को लेकर पहले से चल रही मांग
प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारी लंबे समय से सुरक्षित आवास की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि नौकरी के साथ सुरक्षित रहने की व्यवस्था भी जरूरी है. सरकार ने ऐसे कर्मचारियों के लिए अलग ट्रांजिट आवास तैयार किए हैं. हाल के दिनों में कर्मचारियों की ओर से इन आवासों का जल्द आवंटन करने की मांग भी तेज हुई थी. इसी बीच सामने आई धमकी ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है.
ULC के नाम से लगातार सामने आ रही धमकियां
यह पहली बार नहीं है जब ULC के नाम से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी दी गई है. पिछले कुछ हफ्तों में इस तरह के कई पत्र और संदेश सामने आने की रिपोर्ट है. इससे पहले कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने की धमकी दिए जाने और उनकी निजी जानकारी ऑनलाइन साझा किए जाने की खबरें भी सामने आई थीं. 11 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक, ताजा पत्र में उन कर्मचारियों को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई है, जो अलग ट्रांजिट कॉलोनियों में रहने की योजना बना रहे हैं. एक रिपोर्ट में इसे ULC की ओर से पिछले करीब 40 दिनों में सामने आई छठी धमकी बताया गया है. हालांकि, ऐसे पत्रों की प्रामाणिकता और उनके पीछे मौजूद लोगों की पहचान की जांच सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम है.
1990 के दशक की घटनाओं की याद से बढ़ी चिंता
कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए इस तरह की धमकियां बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं. 1990 के दशक में घाटी में आतंक और हिंसा के कारण बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को अपना घर छोड़ना पड़ा था. ऐसे में सरकारी कर्मचारियों को दोबारा मिल रही धमकियों ने समुदाय के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. हालिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि कुछ धमकी संदेशों में कर्मचारियों के बारे में निजी जानकारियां सार्वजनिक किए जाने का दावा किया गया. इससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने न केवल आतंक की धमकी की जांच, बल्कि संवेदनशील डेटा के गलत इस्तेमाल को रोकने की चुनौती भी है.
कर्मचारियों की मांग, सुरक्षित माहौल में हो काम
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का कहना है कि वे डर के कारण अपने अधिकार और नौकरी नहीं छोड़ना चाहते. उनका जोर इस बात पर है कि सरकार उन्हें ऐसी जगह आवास उपलब्ध कराए जहां सुरक्षा पर्याप्त हो और वे बिना डर के अपने काम पर जा सकें. फिलहाल नई धमकी के बाद घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से ध्यान केंद्रित हो गया है. प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह है कि कर्मचारियों को सुरक्षित आवास के साथ-साथ उनके आने-जाने और कार्यस्थल की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए.
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