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Inside Story: कैसे तय हुआ राहुल गांधी का 72000 सालाना वाला 'न्याय'

कांग्रेस आज लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी करने वाली है. कांग्रेस के घोषणापत्र में किसान, बेरोजगार और कारोबार के लिए कई वादे कर सकती है. इसके साथ ही किसानों की 2 लाख तक कर्जमाफी का एलान भी हो सकता है.

नई दिल्ली: राहुल गांधी न्यूनतम आय गारंटी योजना और रोजगार के वादे चुनावी रैलियों में पहले ही कर चुके हैं. आज कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में सबकुछ विस्तार से बताया जाएगा. दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी की मौजूदगी में वादों का पिटारा खुलेगा. हर गरीब परिवार को सालाना 72 हजार रुपए देने का वादा कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है. आखिरी ये 72,000 का फॉर्मूला कैसे तय हुआ ? किस आधार पर 72,000 रुपये सालाना न्याय तय हुआ? इस के पीछे एक कहानी है.

दरअसल अहमादाबाद मे कांग्रेस वर्किग कमेटी हुए कुछ ही दिन हुए थे कि दिल्ली मे 25 मार्च को फिर से कांग्रेस वर्किग कमेटी की बैठक बुलाई गई. सबको बताया गया कि घोषणापत्र को अंतिम रूप देने के लिए मीटिंग बुलायी गई है लेकिन असली मकसद 72000 न्यूनतम आय योजना को लेकर चर्चा का था. मीटिंग शुरू हुई पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने 54 पेज का ड्राफ़्ट पेश किया. इस बैठक में कांग्रेस के 40 वरिष्ठ नेता मौजूद थे, ज़्यादातर लोगों ने कहा कि उसे पढ़ने के लिए समय चाहिए लेकिन समय की कमी थी और इसी दिन राहुल गांधी को घोषणा करनी थी.

इसके साथ ही इस बात पर सहमति नहीं बन पा रही थी कि घोषणा क्या की जाए, 6000, 12000 या 72000. कुछ लोगों का कहना था कि 6000 ठीक रहेगा लेकिन कुछ 12000 की घोषणा करवाना चाहते थे लेकिन आख़िर मे अहमद पटेल ने कहा कि सालाना 72000 की घोषणा करनी चाहिए तो दूसरी तरफ़ प्रियंका गांधी ने कहा पैसे घर की महिलाओं के खाते में जाने चाहिए.

राहुल गांधी ने डा मनमोहन सिंह और चिदंबरम को न्याय स्कीम को लागू करने की ज़िम्मेदारी दी थी. मनमोहन सिंह ने इसकी चर्चा अरविंद सुब्रमण्यम, कौशिक बसु और रघुराम राजन से की और कांग्रेस अध्यक्ष से इन तमाम अर्थशास्त्रियों की बात भी करवायी. राहुल गांधी ने चिदंबरम से भी कहा कि मैं कोई ऐसा वादा नहीं करना चाहता जिसको हम पूरा ना कर सकें. इस मीटिंग के बाद राहुल गांधी मीडिया के सामने आए और कहा 20% लोगों को 72000 सालाना देंगे और कांग्रेस ग़रीबी रेखा से बाहर निकालेगी.

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