गुरुग्राम दुष्कर्म मामला: सुप्रीम कोर्ट ने SIT को दिया निर्देश, पोक्सो कोर्ट में दाखिल करें चार्जशीट
निर्धारित समयसीमा में जांच पूरी करने के लिए एसआईटी की तारीफ करते हुए कोर्ट ने कहा कि अब आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित पुलिस थाने के माध्यम से पॉक्सो कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने तीन-वर्षीय एक बच्ची से दुष्कर्म के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच रिपोर्ट गुरुग्राम की एक अदालत के समक्ष दाखिल करने की सोमवार (11 मई, 2026) को अनुमति दे दी. सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता के पिता की उस याचिका को लंबित रखा, जिसमें अदालत की निगरानी में एसआईटी से जांच कराने का अनुरोध किया गया था, क्योंकि अदालत ऐसे मामलों में सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों की भूमिका और पीड़िता को मुआवजा दिए जाने के मुद्दे की भी समीक्षा करना चाहती है.
सुनवाई की शुरुआत में हरियाणा सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि अदालत की ओर से गठित तीन वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारियों की सदस्यता वाली एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है.
निर्धारित समयसीमा के भीतर जांच पूरी करने के लिए विशेष जांच दल की प्रशंसा करते हुए बेंच ने कहा कि अब आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित पुलिस थाने के माध्यम से गुरुग्राम में पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) मामलों की सुनवाई के लिए नामित अदालत के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है. इससे पहले बेंच ने बच्ची के दुष्कर्म के इस मामले में हरियाणा पुलिस और गुरुग्राम की बाल कल्याण समिति के शर्मनाक, लापरवाहपूर्ण और असंवेदनशील रवैये पर कड़ी फटकार लगाई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष, तटस्थ और स्वतंत्र जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कला रामचंद्रन, पुलिस अधीक्षक डॉ. अंशु सिंगला और उपायुक्त पुलिस जसलीन कौर की अगुवाई में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की महिला अधिकारियों का विशेष जांच दल गठित किया था. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम के जिला और सत्र न्यायाधीश को भी यह निर्देश दिया कि इस मामले को किसी महिला न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता वाली विशेष पॉक्सो अदालत को सौंपा जाए.
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सुप्रीम कोर्ट ने अब तक की जांच और मामले की घोर लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा, 'आपको शर्म आनी चाहिए! क्या सरकार अपराध से इसी तरह निपटती है? बच्ची को अपराध से भी अधिक भयावह अनुभवों से बार-बार गुजरना पड़ा.' कोर्ट ने कहा कि पुलिस आयुक्त से लेकर उप-निरीक्षक तक पुलिस अधिकारियों ने जिस तरह से मामले की जांच की है, वह नाबालिग पीड़िता के बयान को झुठलाने और उसके माता-पिता की चिंताओं को अतिरंजित और निराधार दिखाने का सुनियोजित और अनुचित प्रयास दर्शाती है.
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पुलिस के अनुसार, सेक्टर-54 की एक सोसाइटी में दो महिला घरेलू सहायिकाओं और उनके एक पुरुष साथी ने बच्ची का कथित तौर पर लगभग दो महीने तक यौन उत्पीड़न किया. पुलिस ने कहा था कि बच्ची के माता-पिता के आरोपों के बाद चार फरवरी को सेक्टर-53 पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई. पुलिस के मुताबिक, घटना दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच की है, लेकिन लड़की ने अपनी आपबीती मां को बताई, जिसके बाद उसके माता-पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
Source: IOCL


























