हाई कोर्ट में लंबित जमानत याचिकाओं की बड़ी संख्या पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तेज निपटारे की व्यवस्था बनाने को लेकर दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में खास तौर पर इलाहाबाद, पटना और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जमानत याचिका की सुनवाई की अगली तारीख कई महीनों बाद की देना उचित नहीं है.

हाई कोर्ट में बड़ी संख्या में जमानत याचिकाओं के लंबित होने पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है. चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा है कि जमानत पर सुनवाई में देरी पूरी न्याय प्रणाली पर सवाल उठाती है. कोर्ट ने इसे 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' के मौलिक अधिकार का हनन बताया. साथ ही, स्थिति में सुधार को लेकर निर्देश जारी किए.
बेंच ने निर्देश दिया है कि सभी हाई कोर्ट जमानत याचिकाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए एक ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर सिस्टम अपनाएं. इस प्रणाली के तहत :-
- नई जमानत याचिकाओं को अधिकतम एक सप्ताह के भीतर सुनवाई के लिए लगाया जाए.
- जमानत याचिका की एक कॉपी अनिवार्य रूप से एडवोकेट जनरल को दी जाए.
- सुनवाई से पहले ही पुलिस या दूसरी एजेंसियों से स्टेटस रिपोर्ट ली जाए.
- अगर किसी दिन मामले की सुनवाई नहीं हो पाती, तो उसे अगली उपलब्ध तारीख पर अपने आप दोबारा लिस्ट किया जाए.
- जमानत के मामलों को हर सप्ताह या 15 दिन में सुनवाई के लिए लगाया जाए.
- हाई कोर्ट जमानत याचिकाओं के निपटारे के लिए एक अधिकतम समय-सीमा तय करे.
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सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में खास तौर पर इलाहाबाद, पटना और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की स्थिति का उल्लेख किया है. कोर्ट ने कहा कि जमानत याचिका की सुनवाई की अगली तारीख कई महीनों बाद की देना उचित नहीं है. सरकारी वकीलों को भी बिना ठोस आधार के बार-बार सुनवाई टालने का अनुरोध करना बंद करना चाहिए. जजों ने कहा कि लगभग 1 साल पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में जमानत के 63 हजार से अधिक लंबित मामले थे. ऐसी स्थिति बहुत चिंताजनक है. उम्मीद है कि अब स्थिति में कुछ सुधार हुआ होगा.
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