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24 अकबर से 9 कोटला रोड...138 साल में कांग्रेस के कितने दफ्तर बदले?

Congress New Office: 45 साल बाद कांग्रेस नए ऑफिस में शिफ्ट होने जा रही है. नए ऑफिस का नाम इंदिरा भवन रखा गया है.

Congress New Office: कांग्रेस की कहानी 28 दिसंबर1885 से शुरू होती है, जब 72 सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, वकीलों और नेताओं का दल तब के बॉम्बे और अब के मुंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में जुटा था. ये इंडियन नेशनल कांग्रेस की पहली बैठक थी, जिसे पार्टी अपने स्थापना दिवस के तौर पर मनाती है. हालांकि, यह जगह बैठक पार्टी के ऑफिस की नहीं हुई थी.

सही मायने में कांग्रेस पार्टी को दफ्तर के तौर पर अगर कोई पहली स्थाई जगह मिली तो वह था जवाहर लाल नेहरू के पिता मोती लाल नेहरू का अपने पैसे से खरीदा हुआ घर, जिसे उन्होंने आनंद भवन नाम दिया था.

आनंद भवन की कहानी
यह बात है साल 1900 की, जब पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की उम्र 11 साल थी. उसी साल करीब 19 हजार रुपये में मोतीलाल नेहरू ने इलाहाबाद के 1 चर्च रोड पर बहुत बड़ा आलीशान मकान खरीदा. उस घर का नाम आनंद भवन रखा गया. मोतीलाल नेहरू कांग्रेस के बड़े नेता थे इस वजह से कांग्रेस नेताओं का उस घर में भी आना-जान बढ़ गया, लेकिन तब भी वह घर-घर ही रहा, कांग्रेस पार्टी का दफ्तर नहीं हुआ.

उस घर को खरीदने के करीब 30 साल बाद 1930 में मोतीलाल नेहरू ने एक और घर बनवाया. ये वह वक्त था, जब मोतीलाल नेहरू के बेटे जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. ये घर पुराने वाले घर का ही अगला घर था.

पुराना वाला घर, जिसे आनंद भवन नाम दिया गया था, उसका नाम बदलकर स्वराज भवन कर दिया गया और जो नया घर बना, उसमें नेहरू परिवार रहने लगा. लेकिन जवाहर लाल नेहरू जब कांग्रेस अध्यक्ष थे तो नए वाले घर में कांग्रेस नेताओं का आना-जाना बढ़ गया. इस घर का भी आनंद भवन नाम रखा गया.

आनंद भवन बना कांग्रेस का ऑफिस
इस घर को बनवाने के अगले ही साल 1931 में मोतीलाल नेहरू की मौत हो गई और तब यह घर, घर से ज्यादा कांग्रेस की गतिविधियों का केंद्र बन गया. आजादी के आंदोलन के दौरान यही आनंद भवन कांग्रेस का मुख्यालय रहा और कांग्रेस वर्गिंक कमिटी की तमाम बैठकें इसी घर में होती रहीं.

फिर भी नेहरू परिवार को कहीं तो रहना ही था तो जवाहर लाल नेहरू पत्नी कमला के साथ इसी आनंद भवन के टॉप फ्लोर पर रहते थे. उनकी बेटी इंदिरा के लिए घर में अलग कमरा था और बाकी का पूरा घर कांग्रेस पार्टी के लिए था. भारत की आजादी यानी कि 15 अगस्त 1947 तक ये आनंद भवन नेहरू परिवार का घर और कांग्रेस का दफ्तर दोनों ही बना रहा.

दिल्ली में कांग्रेस का पहला कार्यालय
आजादी के बाद कांग्रेस ने अपना दफ्तर इलाहाबाद से दिल्ली शिफ्ट किया और कांग्रेस का नया मुख्यालय 7 जंतर-मंतर रोड हो गया. कांग्रेस को इलाहाबाद से नई दिल्ली अपना दफ्तर शिफ्ट करने में करीब सात लाख रुपये खर्च करने पड़े थे. 7 जंतर-मंतर रोड 1969 में तब तक कांग्रेस का मुख्यालय रहा, जब तक कांग्रेस दो हिस्सों में टूट नहीं गई.

इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने और वीवी गिरी के राष्ट्रपति चुने जाने के मुद्दे पर इंदिरा गांधी और कांग्रेस के ओल्ड गार्ड्स के बीच ऐसा झगड़ा हुआ कि पार्टी दो हिस्सों में टूट गई. पुराने नेताओं की पार्टी हुई कांग्रेस (ओ), जिसका मुख्यालय 7 जंतर-मंतर ही रहा, जबकि इंदिरा गांधी ने अपनी पार्टी का नाम रखा कांग्रेस (आर) और अब इस पार्टी के लिए एक दफ्तर की जरूरत थी. जिसके बाद नेहरू सरकार में मंत्री रह चुके और कांग्रेस के पुराने वफादार नेता एम वी कृष्णप्पा के घर विंडसर प्लेस को इंदिरा गांधी ने अपनी पार्टी के दफ्तर के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू किया.

इंदिरा गांधी के समय कांग्रेस का ऑफिस
साल 1971 में इंदिरा गांधी ने पार्टी का दफ्तर शिफ्ट किया और वो 5 राजेंद्र प्रसाद रोड पहुंच गया. साल 1977 में इमरजेंसी के बाद जब चुनाव हुए और फिर से कांग्रेस पार्टी में टूट हुई तो इंदिरा गांधी ने जनवरी 1978 में पार्टी का दफ्तर फिर से शिफ्ट किया और अब पार्टी के दफ्तर का नया पता 24 अकबर रोड हो गया. ये लुटियंस दिल्ली का टाइप 7 बंगला था, जो तब आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के सांसद जी वेंकटस्वामी के नाम पर अलॉट था.

हालांकि, उससे पहले 24 अकबर रोड बंगला इंडियन एयरफोर्स के चीफ का घर और इंटेलिजेंस ब्यूरो की पॉलिटिकल सर्विलांस विंग का ऑफिस भी रह चुका था. इससे पहले इसे बर्मा हाउस के नाम से भी जाना जाता था जो पंडित जवाहर लाल नेहरू का दिया हुआ नाम था, क्योंकि इसी बंगले में म्यांमार की भारत में राजदूत डा खिन काई अपनी बेटी आंग सान सू की के साथ रहने आईं थीं.

इसी बंगले को इंदिरा गांधी ने पार्टी के दफ्तर के तौर पर चुना, क्योंकि इसी से जुड़ा हुआ 10 जनपथ का भी बंगला था, जो तब इंडियन यूथ कांग्रेस का दफ्तर हुआ करता था. यही 10 जनपथ बाद में सोनिया गांधी का बंगला बना, जो अब भी सोनिया गांधी को ही अलॉट है. 24 अकबर रोड अब भी कांग्रेस का मुख्यालय बना हुआ है, लेकिन अब करीब 45 साल बाद एक बार फिर से कांग्रेस अपना मुख्यालय शिफ्ट करने जा रही है.

9 ए कोटला रोड होगाक नया कांग्रेस ऑफिस
अब कांग्रेस के नए दफ्तर का नया पता 9 ए कोटला रोड हो जाएगा. छह मंजिला इस इमारत को कांग्रेस की ओर से इंदिरा भवन नाम दिया गया. अब 26 अकबर रोड पर बने कांग्रेस सेवा दल के ऑफिस और 5 रायसीना रोड पर बने एनएसयूआई के ऑफिस को भी इसी नए इंदिरा भवन में ही शिफ्ट कर दिया जाएगा.

बाकी कांग्रेस का नया दफ्तर बनने जा रही यह बिल्डिंग भी उसी रोड पर है, जिस पर बीजेपी का ऑफिस है. लेकिन बीजेपी ने जहां तय किया है कि उसका मेन गेट दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर खुलेगा, जिसकी वजह से उसका पता 6, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग है. वहीं कांग्रेस ने तय किया है कि उसका मेन गेट कोटला रोड पर होगा और इस लिहाज से कांग्रेस के दफ्तर का पता 9 कोटला रोड हो गया है. 

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