Atul Subhash Case: संसद में गूंजा अतुल सुभाष सुसाइड केस, किसने कहा- 'पुरुषों के लिए जेंडर न्यूट्रल कानून की जरूरत'
Dinesh Sharma: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार 2022 में आत्महत्या करने वालों में 72% पुरुष थे, जिनकी संख्या 1,25,000 से ज्यादा थी.

Gender Neutral Laws: राज्यसभा में बीजेपी सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा और शोषण को लेकर किए गए कानूनी सुधारों की सराहना करते हुए कहा कि अब पुरुषों के लिए भी सुरक्षा का समान अधिकार सुनिश्चित करना जरूरी है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पुरुषों को घरेलू हिंसा और उत्पीड़न से बचाने के लिए कानून में सुधार की जरूरत है. डॉक्टर शर्मा ने मांग की कि घरेलू हिंसा से संबंधित कानूनों को जेंडर न्यूट्रल बनाया जाए ताकि सभी को समान न्याय मिल सके और किसी भी जेंडर के व्यक्ति को अन्याय का सामना न करना पड़े.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार 2022 में आत्महत्या करने वालों में 72% पुरुष थे, जिनकी संख्या 1,25,000 से ज्यादा थी. वहीं महिलाओं की आत्महत्या की संख्या लगभग 47,000 थी. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि आत्महत्या के मामलों में पुरुषों का प्रतिशत बहुत ज्यादा है खासकर पारिवारिक समस्याओं की वजह से. इससे यह साफ होता है कि पुरुषों के लिए मानसिक स्वास्थ्य और कानूनी सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है.
झूठे आरोपों में फंसे पुरुषों की बढ़ती संख्या
हाल ही में बेंगलुरु में हुए एक दुखद मामले ने इस मुद्दे को और भी गंभीर बना दिया है, जिसमें अतुल सुभाष नामक एक व्यक्ति ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी ने उन्हें झूठे आरोपों में फंसा दिया था, जिससे वह मानसिक उत्पीड़न का शिकार हुए और अंततः उन्होंने आत्महत्या कर ली. इस घटना ने ये दिखाया कि झूठे आरोपों की वजह से पुरुषों को कानूनी और भावात्मक समर्थन की भारी कमी का सामना करना पड़ता है. भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 जैसे प्रावधानों का दुरुपयोग इस समस्या को और बढ़ाता है.
घरेलू हिंसा कानून को बनाएं जेंडर न्यूट्रल - डॉक्टर दिनेश शर्मा
इस संदर्भ में डॉक्टर दिनेश शर्मा ने सरकार से अपील की कि वह घरेलू हिंसा और उत्पीड़न से जुड़े कानूनों को जेंडर न्यूट्रल बनाए. उन्होंने कहा कि यदि कानून में कोई खामी की वजह से एक भी व्यक्ति अपनी जान देता है तो ये समाज के लिए आत्ममंथन का समय है. उन्होंने ये भी कहा कि झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता बनी रहे.
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