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EXPLAINED: अमेरिका में खाना और पैसा खत्म! 38वें दिन भी शटडाउन जारी, कैसे ठप हो रहा सबसे ताकतवर देश, भारत पर इम्पैक्ट क्या?

ABP Explainer: एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका में शटडाउन बहुत लंबा चल सकता है क्योंकि अमेरिका की अंदरूनी हालत बेहद खराब है. ट्रंप की नीतियों और जंग की वजह से अमेरिकी खजाना खाली होने की कगार पर है.

अमेरिका में 1 अक्टूबर से शुरू हुए सरकारी शटडाउन का आज 38वां दिन है. यह अमेरिका के इतिहास का सबसे लंबा शटडाउन है. इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में 35 दिनों तक सरकारी कामकाज ठप रहा था. शटडाउन की वजह से 4.2 करोड़ अमेरिकियों की फूड सप्लाई बंद कर दी और लाखों कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है. 7 नवंबर से न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस और शिकॉगो समेत 40 एयरपोर्ट्स पर 10% फ्लाइट्स कम कर दी गईं. अमेरिका के हालात दिन ब दिन बिगड़ रहे हैं, क्योंकि ट्रंप हेल्थ इंश्योरेंस पर खर्च नहीं करना चाहते.

तो आइए ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि अमेरिका में शटडाउन क्यों लगा, हेल्थ इंश्योरेंस का मुद्दा बंद की वजह कैसे बना और  इससे भारत पर क्या इम्पैक्ट पड़ेगा...

सवाल 1- अमेरिका में शटडाउन क्या है और यह कब-कब लग चुका है?
जवाब- अमेरिका का फिस्कल ईयर यानी खर्च का साल 1 अक्टूबर से शुरू होता है. यह एक तरह से सरकार का आर्थिक साल होता है, जिसमें वह अपना पैसा खर्च करने और बजट बनाने की योजना बनाती है. कांग्रेस को 30 सितंबर तक 12 एप्रोप्रिएशन बिल पास करने होते हैं, जो सरकार को पूरा साल चलाने के लिए पैसे देते हैं.  इस दौरान सरकार तय करती है कि कहां पैसा लगाना है, जैसे सेना, स्वास्थ्य या शिक्षा में.

अगर इस तारीख तक नया बजट पास नहीं होता, तो प्रेसिडेंट साइन नहीं करते. इससे सरकारी कामकाज (नॉन-एसेंशियल) बंद हो जाते हैं. इसे शटडाउन कहते हैं. अमेरिकी खजाने में पैसे तो होते हैं, लेकिन खर्च करने की लीगल परमिशन नहीं मिलती है. ये 1977 से अब तक का 22 वां फंडिंग गैप और 11वां पूरा शटडाउन है. कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस अमेरिका के मुताबिक- 

  • दिसंबर 2018- 35 दिन
  • फरवरी 2018- 1 दिन
  • जनवरी 2018- 3 दिन
  • सितंबर 2013- 16 दिन
  • दिसंबर 1995- 21 दिन
  • नवंबर 1995- 5 दिन

सवाल 2- अमेरिका में अब तक का सबसे लंबा शटडाउन क्यों लगा?
जवाब- शटडाउन लगे रहने की 3 बड़ी वजहें हैं...

  1. कांग्रेस फंडिंग बिल पास नहीं कर पाई: कांग्रेस को 30 सितंबर तक 12 अप्रोप्रिएशन बिल पास करने थे, जो FY2026 (1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026) के लिए पैसे देते. लेकिन कोई भी बिल पास नहीं हुआ. हाउस ने 'क्लीन' कंटिन्यूइंग रेजोल्यूशन (CR) पास किया जो 21 नवंबर तक फंडिंग देता, लेकिन सीनेट में फेल हो गया क्योंकि डेमोक्रेट्स ने ब्लॉक कर दिया. 
  2. ओबामा हेल्थ केयर सब्सिडी पर ठनी: अमेरिका के दोनों प्रमुख दल डेमोक्रेट और रिपब्लिकन में ओबामा हेल्थ केयर सब्सिडी प्रोग्राम को लेकर ठनी हुई है. डेमोक्रेट्स चाहते हैं कि हेल्थ केयर (स्वास्थ्य बीमा) की सब्सिडी बढ़ाई जाए, जो 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो रही है. ये 2021 में कोविड रिलीफ के तहत शुरू हुई थी और 2022 के Inflation Reduction Act में 2025 तक बढ़ाई गई. इसके बिना 2.4 करोड़ अमेरिकियों का हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम औसतन 114% बढ़ जाएगा. 2025 में यह औसत 888 डॉलर सालाना है, जो 2026 में बढ़कर 1904 डॉलर सालाना हो जाएगा. डेमोक्रेट्स का कहना है कि कोई CR तभी पास करेंगे जब सब्सिडी 2 साल बढ़ाई जाए और जुलाई 2025 के One Big Beautiful Bill Act में किए मेडिकेड कट्स रिवर्स हों.' उन्होंने सीनेट में रिपब्लिकन CR को 14 बार ब्लॉक किया. 
  3. रिपब्लिकन्स का स्टैंड: वे कहते हैं कि क्लीन CR पास करो, हेल्थ केयर बाद में डिस्कस करेंगे. ट्रंप ने कहा 'डेमोक्रेट्स अमेरिकियों को बंधक बना रहे हैं, फिलिबस्टर खत्म करो.' रिपब्लिकन्स के पास सीनेट में 53 सीट्स हैं, लेकिन 60 वोट्स चाहिए इसलिए डेमोक्रेट्स की जरूरत है.

इसके अलावा एजेंसीज कट करने के लिए शटडाउन को 'अनप्रेसिडेंटेड अपॉर्चुनिटी' बताया गया है. हजारों फेडरल वर्कर्स को फायर करने की कोशिश की गई है. 5 नवंबर 2025 को हुए मेयर इलेक्शन में रिपब्लिकन्स को न्यू जर्सी और वर्जीनिया में हार मिली, जिसका ठीकरा ट्रंप ने शटडाउन पर फोड़ दिया. पोल्स में 78% अमेरिकी (59% रिपब्लिकन्स भी) सब्सिडी एक्सटेंड चाहते हैं.

सवाल 3- अमेरिका में शटडाउन लगने से क्या असर पड़ रहा है?
जवाब- कांग्रेसनल बजट ऑफिस (CBO) की 29 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 11 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हो चुका है. अगर शटडाउन जल्द खत्म नहीं हुआ तो फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के चौथे क्वार्टर में रियल GDP ग्रोथ 1-2% पॉइंट्स कम हो जाएगी. ज्यादातर रिकवर हो जाएगा, लेकिन परमानेंट लॉस 7 बिलियन डॉलर से 14 बिलियन डॉलर तक होगा.

  • फूड स्टैम्प्स (SNAP) पर असर: यह एक सरकारी सहायता कार्यक्रम है, जो अमेरिका में कम आय वाले परिवारों और व्यक्तियों को पौष्टिक भोजन खरीदने में मदद करता है. ताकि लोअर मिडिल क्लास के परिवारों को अच्छा खाना मिले और भुखमरी म हो जाए. जो लोग इन स्टैम्प्स के लिए एलिजिबल होते हैं, उन्हें एक इलेक्ट्रॉनिक कार्ड मिलता है, जिसे वे किराने की दुकानों पर खाना खरीदने के लिए इस्तेमाल करते हैं. शटडाउन की वजह से करीब 4.2 करोड़ की आबादी फूड स्टैम्प्स से महरूम हो जाएगी. नवंबर में लोगों को सिर्फ 65% बेनिफिट्स ही मिले, क्योंकि USDA  के पास सिर्फ 6 बिलियन डॉलर थे, जबकि 8 बिलियन डॉलर की जरूरत थी.
  • फ्लाइट्स और एयर ट्रैवल पर असर: 7 नवंबर यानी आज से 40 बड़े एयरपोर्ट्स पर 10% फ्लाइट्स कट शुरू हो गईं, क्योंकि एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स बिना सैलरी के काम करते हुए थक गए. शटडाउन के बाद 4% कट, फिर 6%, 8% और अब 10% कटौती हो गई है. यूनाइटेड एयरलाइंस ने कई फ्लाइट्स कैंसिल की है.
  • कर्मचारियों पर बुरा असर: करीब 7.5 लाख सरकारी कर्मचारी बिना सैलरी के छुट्टी पर हैं. सेना, पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर जैसे जरूरी कर्मचारियों को बिना सैलरी काम करना पड़ रहा है. CBO के मुताबिक, जबरदस्ती छुट्टी पर भेजे गए कर्मचारियों की करीब 400 मिलियन डॉलर (3,300 करोड़ रुपए) प्रतिदिन सैलरी का नुकसान हो रहा है. CBO के डायरेक्टर फिलिप स्वैगल ने कहा कि शटडाउन की वजह से सरकारी खर्च में देरी हो रही है और इसका अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है.
  • एटमी हथियार एजेंसी पर इम्पैक्ट: नेशनल न्यूक्लियर सिक्योरिटी एजेंसी ने 1,400 कर्मचारियों को छुट्टी पर भेजा है. एनर्जी सेक्रेटरी क्रिस राइट ने दो हफ्ते पहले कहा था कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है, इससे परमाणु हथियारों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.

सवाल 4- तो फिर अमेरिका में लगा शटडाउन कब खत्म हो सकता है?
जवाब- अमेरिकी संसद में इस समय फिलिबस्टर की कंडिशन बनी हुई है, जिसके जरिए सांसद किसी बिल पर बहस को जानबूझकर लंबा खींच सकते हैं, ताकि उस पर वोटिंग देर से हो या बिल्कुल न हो पाए. अमेरिकी सीनेट में किसी भी प्रस्ताव पर बहस खत्म करने और वोटिंग कराने के लिए ‘क्लोटर’ नाम की प्रक्रिया होती है. इसके लिए कम से कम 100 में से 60 सीनेटरों का समर्थन जरूरी होता है. इसी वजह से ट्रम्प का फंडिंग बिल अटका हुआ है. विपक्ष इस नियम का इस्तेमाल सिर्फ कानून पास होने से रोकने के लिए करता है, भले ही मुद्दा कितना भी जरूरी क्यों न हो. फिलिबस्टर का मकसद है अल्पसंख्यक दल को भी कानून निर्माण में अपनी बात रखने का अधिकार मिले. कोई भी पार्टी सिर्फ अपनी संख्या के दम पर तानाशाही न करे.

विदेश मामलों के जानकार और JNU के रिटायर्ड प्रोफेसर ए. के. पाशा कहते हैं, 'अमेरिका में शटडाउन बहुत लंबा चल सकता है क्योंकि रिपब्लिक्स और डेमोक्रेट्स आमने-सामने हैं. अमेरिका की अंदरूनी हालत बेहद खराब हो चुकी है. ट्रंप की नीतियों, जंगों में हिस्सेदारी और हटधर्मी की वजह से अमेरिका का खजाना खाली होने की कगार पर है. शटडाउन तो महज एक पर्दा है, जिसके पीछे ट्रंप अपनी खामियों और नुकसान छिपाए हुए हैं. वे अमेरिका की जनता को बता नहीं पा रहे हैं कि यह अमेरिका पहले की तरह सुपरपॉवर नहीं रहा. वे लोगों को चीन और रूस से दुश्मनी में उलझा रहे हैं और वहां के गरीब और मिडिल क्लास लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं.'

सवाल 5- क्या अमेरिकी शटडाउन से भारत पर भी इम्पैक्ट पड़ रहा है?
जवाब- ए. के. पाशा कहते हैं, 'ट्रंप ने भारत पर फूड प्रोडक्ट्स इम्पोर्ट करने का दबाव बनाया है, जिसे लगातार बढ़ाते जा रहे हैं. ट्रंप चाहते हैं कि अमेरिकी डेयरी प्रोडक्ट्स, अनाज, फसलें और मीट भारत में बिकने लगे. भारत सरकार अपने किसानों से न खरीदकर, अमेरिका से खरीदारी करे, ताकि अमेरिका की कमाई होने लगे. शटडाउन में जैसे-जैसे अमेरिका के पैसे खत्म हो रहे हैं, वैसे-वैसे भारत पर भी इम्पैक्ट पड़ रहा है. ट्रंप बौखला गए हैं कि देश के अंदर लोग उनके नियम नहीं मान रहे और अन्य देश भी उन्हें किनारे करने लगे हैं.'

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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