तेलंगाना नदी में दबी मिली 5 फीट ऊंची भगवान विष्णु की प्राचीन मूर्ति, 12वीं सदी से जुड़ा इतिहास आया सामने!
तेलंगाना के भूपालपल्ली जिले में नदी में 12वीं शताब्दी की प्राचीन विष्णु मंदिर मिली है. इस मूर्ति को काकतीय काल के समय का माना जा सकता है, जो उस समय के उच्च स्तर की शिल्प कौशल को दर्शाती है.

तेलंगाना राज्य के भूपालपल्ली जिले में एक महत्वपूर्ण खोज ने इतिहास को पुनर्जीवित कर दिया है. कटारम मंडल के चिंथकानी गांव के नजदीक एक नदी में भगवान विष्णु की एक प्राचीन पत्थर की बनी मूर्ति मिली है.
जानकारों का मानना है कि यह मूर्ति 12वीं शताब्दी की और काकतीय काल की जटिल शिल्पकारी को दर्शाती है.
स्थानीय खुदाई के दौरान मिली मूर्ति
नदी के किनारे स्थित जंगल क्षेत्र में एक छोटी खुदाई के दौरान यह दुर्लभ मूर्ति मिली है. संस्कृति एवं विरासत अनुसंधान दल के सचिव अरविंद पाकिदे ने बताया कि, यह मूर्ति 12वीं शताब्दी की है. खास बात यह है कि किले के समीप हाल ही में विष्णु मूर्ति की एक उत्कृष्ट नक्काशीदार प्रतिमा मिली है.
शैली और प्रतिमा के नजरिए से इस मूर्ति को काकतीय काल के समय का माना जा सकता है, जो उस समय के उच्च स्तर की शिल्प कौशल को दर्शाती है.
उन्होंने बताया कि, मूर्ति कई भागों में क्षतिग्रस्तहै. विरासत संरक्षण के नजरिए से मूर्ति को तेलंगाना विरासत विभाग द्वारा औपचारिक रूप से दस्तावेजीकृत और संरक्षित किया जाना चाहिए ताकि इसे और खराब होने से बचाया जा सके.
वीडियो यहां देखें-
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स्थानीय लोगों ने क्या कहा?
सबसे दिलचस्प बात यह है कि, करीब तीन साल पहले जब नदी का जलस्तर कम हुआ था, तब स्थानीय लोगों ने मदराम गांव के नजदीक पेद्दावागु धारा की रेत में मूर्ति का सिर वाला हिस्सा देखा था, जैसा कि तेलंगाना टुडे की एक न्यूज आर्टिकल में बताया गया था.
उस वक्त किसी ने इसे नदी से बाहर नहीं निकाला था, इसलिए यह दबा ही रहा. हाल ही में जब नदी में पानी का जलस्तर कम हुआ तो पूरी मूर्ति दिखाई देने लगी.
तेलंगाना राज्य पुरातत्व विभाग के सहायक निदेशक डी.बुज्जी ने बताया कि, हमें सूचना मिली है कि कटारम मंडल में स्थानीय लोगों को भगवान विष्णु की प्रतिमा मिली है. हम घटनास्थल का दौरा करेंगे, मूर्ति की जांच करने के बाद इसे स्थानांतरित करने के बारे में फैसला लिया जाएगा.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, काले ग्रेनाइट से तराशी गई यह मूर्ति करीब 5 फीट ऊंची है. हालांकि नाक और उंगलियां थोड़ी क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन इसका ज्यादातार हिस्सा अक्षुण्ण है. इस खोज से तेलंगाना की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश पड़ता है और यह पता चलता है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राचीन कलाकृतियों का संरक्षण क्यों जरूरी है.
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Source: IOCL




























