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Somnath Mandir: सोमनाथ का संघर्ष और पुनर्निर्माण, जानें मंदिर को कब और किसने लूटा

Somnath Mandir: सोमनाथ मंदिर को महमूद गजनवी से लेकर बादशाह औरंगजेब तक कई मुगल शासकों ने लूटा. कई बार मंदिर को विध्वंस किया गया लेकिन, जहां वास हो महादेव का उसका अस्तित्व भला कैसा मिट सकता है.

Somnath Mandir: गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर हिंदुओं की आस्था का केंद्र है. साथ ही यह भारत के सबसे पवित्र और प्राचीन शिव मंदिरों एक है. यह 12 ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहला ज्योतिर्लिंग (Jyotirlinga) है, जो केवल लोगों की आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि संघर्ष, पुनर्निर्माण और सनातन परंपरा की अडिग शक्ति का प्रतीक भी है.

इतिहास के कालखंड में इस मंदिर में कई आक्रमण और लूटपाट हुए. मुगल शासकों (Mughal emperor) ने मंदिर को विध्वंस कर लूटपाट की. लेकिन जहां शिव का वास होता है, उसका अस्तित्व भला कैसे मिट सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्मित लोकार्पण की 75वीं वर्षगांठ पर एक विशेष लेख में इसे 'विंध्वंस से सृजन' की यात्रा बताया. उन्होंने सोमनाथ को भारत की अटूट सांस्कृतिक चेतना, जीवंत आस्था और आत्मबल का प्रतीक बताया, जो अनेक संघर्षों के बावजूद बार-बार पुनर्जीवित हुआ.

सोमनाथ मंदिर पर इतिहास का सबसे चर्चित विध्वंस

इतिहास में इस मंदिर पर कई बार हमले हुए. लेकिन सबसे चर्चित हमला 11वीं सदी में हुआ. जब मुगल शासक महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया. करीब 1000 वर्ष पहले 11वीं शताब्दी में सोमनाथ मंदिर पर पहला आक्रमण हुआ. गजनी के शासक महमूद गजनवी ने आक्रमण कर मंदिर को ध्वस्त कर दिया और अपार संपत्ति और सोना-चांदी लूटकर ले गया. यह घटना से भारतीय संस्कृति, सभ्यता, हिंदुओं की आस्था पर सबसे बड़ा आघात था. लेकिन महमूद गजनी से पहले और बाद में भी सोमनाथ मंदिर पर कई बार आक्रमण और लूटपाट हुए. जानें सोमनाथ मंदिर पर कब-कब हुए हमले और किसने की लूटपाट.


Somnath Mandir: सोमनाथ का संघर्ष और पुनर्निर्माण, जानें मंदिर को कब और किसने लूटा

सोमनाथ मंदिर: विध्वंस से सृजन तक की कहानी (Somnath Temple Destroyed, Looted and Creation History)

सोमनाथ मंदिर पर पहला विध्वंस- 725 ईस्वी में पहली बार सोमनाथ मंदिर पर हमला हुआ था. इस समय सिंध के मुस्लिम सूबेदार अल-जुनैद ने मंदिर पर आक्रमण कराया और मंदिर को तुड़वा दिया. इतिहास में इस घटना को सोमनाथ मंदिर के विध्वंस का पहला आक्रमण माना जाता है. 

दूसरी बार महमूद गजनवी का हमला- सोमनाथ मंदिर ने दूसरी बार लगभग 1024 शताब्दी में विध्वंस का सामना किया. इस समय महमूद गजनवी ने करीब 5 हजार सैनिकों के साथ मंदिर पर हमला किया और मंदिर की अपार संपत्ति लूटकर इसे बुरी तरह नष्ट कर दिया. इतिहासकारों के अनुसार, इस हमले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भी मृत्यु हुई थी. 

अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति ने किया सोमनाथ पर हमला- 1297 ईस्वी में दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी (Alauddin Khalji) के सेनापति नुसरत खान ने भी सोमनाथ मंदिर पर हमला कर इसे फिर से क्षतिग्रस्त कर दिया और धन-संपत्ति लूट ली. 

गुजरात सल्तनत का हमले- 1395 और 1412 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर फिर से मुगल हमले का शिकार हुआ. 1395 में सुल्तान मुजफ्फर शाह ने मंदिर पर हमला किया और 1412 ईस्वी में उसके पुत्र अहमद शाह ने भी सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर लूटपाट की.

औरंगजेब के काल में दो बार टूटा सोमनाथ- मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में सोमनाथ मंदिर को 1665 ईस्वी और 1706 ईस्वी में दो बार तोड़ा गया.

सोमनाथ मंदिर का इतिहास केवल एक-दो हमले और लूटपाट तक ही सीमित नहीं है. बल्कि अलग-अलग कालखंडों में इसे अलग-अलग मुगल शासकों द्वारा नुकसान पहुंचाया गया और लूटपाट की गई. लेकिन मंदिर का बार-बार पुनर्निर्माण कराया गया. जानें विध्वंस के बाद मंदिर के सृजन और पुनर्निर्माण में किन लोगों की रही भूमिका-

  • सिंध के मुस्लिम सूबेदार अल-जुनैद के मंदिर पर आक्रमण कराने के बाद प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसका पुनर्निर्माण कराया.
  • गजनवी के हमले के बाद राजा भीमदेव और मालवा के राजा भोज ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया था.
  • अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति ने जब सोमनाथ मंदिर पर हमला कराकर इसे नष्ट किया, तब हिंदू राजाओं ने मंदिर का पुनर्निर्माण कराया.
  • 1783 ईस्वी में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने मूल मंदिर से कुछ दूरी पर नया सोमनाथ मंदिर बनवाकर पूजा-अर्चना शुरू कराई, जिससे सोमनाथ की धार्मिक परंपरा पुनर्जिवित हुई.
  • आजादी के लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने समुद्र का जल हाथ में लेकर सोमनाथ मंदिर को फिर से भव्य रूप में बनाने का संकल्प लिया.
  • इसके बाद 11 मई 1951 को भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की. इस दिन को आधुनिक सोमनाथ मंदिर के पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है.

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पल्लवी कुमारी (Pallawi Kumari)

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