Alia Bhatt के स्लीप हैबिट से Sadhguru हुए हैरान! आपको भी जानना चाहिए नींद और आराम का असली सच
आलिया भट्ट ने हाल ही में सद्गुरु से मुलाकात की. सद्गुरु को अपनी दिनचर्या बताते हुए आलिया ने कहा कि वह 8-9 घंटे सोती है और उन्हें सोना बहुत पसंद है, जिसपर सद्गुरु हैरान रह गए और कहा- जिंदगी कब जिओगी.

- आलिया भट्ट ने सद्गुरु से नींद और आराम पर की बात.
- सद्गुरु ने आलिया की 8-9 घंटे की नींद पर जताई हैरानी.
- सद्गुरु ने समझाया कम सोने और तनाव प्रबंधन का महत्व.
- आराम का मतलब तनाव मुक्त जीवन जीना है, न कि अधिक सोना.
बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट (Alia Bhatt) और सद्गुरु (Sadhguru) के बीच चेन्नई में कई दिलचस्प बातचीत हुई, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. आलिया ने सद्गुरु ने पैरेंटिंग, सफलता-असफलता और दिनचर्या पर बातचीत की. हालांकि ये मुद्दे नए तो नहीं है, लेकिन आलिया ने जिस मासूमियत से सवाल-जवाब किए और सद्गुरु ने जिंदगी ने नजरिए से जोड़ते हुए ऐसा जवाब दिया, जिससे हर शख्स सोचने पर मजबूर हो गया.
8-9 घंटे सोना पसंद करती है आलिया
सद्गुरु से बातचीत के दौरान आलिया भट्ट ने कहा कि, उन्हें नींद काफी पसंद है और वह आमतौर पर 8-9 घंटे सोती है. आलिया ने कहा कि, सोना उनकी पसंदीदा चीजों में एक है. कई बार तो वह सोने के बाद भी आराम करना पसंद करती है. इसका कारण यह है कि, सोने पर कई बार उन्हें सूकून का अहसास होता है. आलिया हंसते हुए कहती है कि- सोना उनके लिए सिर्फ शरीर की जरूरत नहीं बल्कि एक ऐसा टाइम है, जब वह खुद को पूरी तरह रिलैक्स महसूस करती है.
आलिया की स्लीप हैबिट से सद्गुरु हैरान!
आलिया की स्लीप हैबिट सुनकर सद्गुरु भी हैरान रह गए. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा- ये तो दिन का एक बड़ा हिस्सा है, फिर आप जिंदगी कब जिएंगी. उनका जवाब सुनकर पहले तो वहां मौजूद सारे लोग हंस पड़े और शायद आपको भी हंसी जरूर आई होगी. लेकिन सद्गुरु के इस बात ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया. सद्गुरु ने बताया कि, वे दिन में सिर्फ 4-5 घंटे ही सोते हैं. उनका मानना है कि, कम सोना यानी जिंदगी को अधिक समय देना.
नींद और आराम का असली सच क्या है?
सद्गुरु ने कम सोने को लेकर ऐसी बात कही जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही. उन्होंने कहा कि, असल में इंसान को नींद से नहीं बल्कि उस आराम से प्यार है जो नींद के बाद मिलता है. सद्गुरु ने समझाते हुए कहा कि, हम खुद को पूरे दिन तनाव में रखते हैं और फिर उसी तनाव को खत्म करने के लिए ज्यादा सोने की कोशिश करते हैं. लेकिन अगर हम अपने भीतर के तनाव को संभालना सीख जाए तो ज्यादा नींद की जरूरत ही महसूस नहीं होगी.
अच्छी नींद से काम मे प्रोडक्टिविटी आती है और मानसिक स्वास्थ्य भी संतुलित रहता है. विशेषज्ञ भी मानते हैं कि, एक स्वस्थ व्यक्ति को औसतन 7-8 घंटे की नींद की जरूरत होती है, हालांकि यह हर व्यक्ति के शरीर और जीवनशैली पर निर्भर करता है. लेकिन सद्गुरु की बातों का सीधा अर्थ यह है कि, सिर्फ अधिक देर तक सोना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही तरीके से आराम करना और मानसिक संतुलन को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है.
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