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Astrology: कड़ा धारण करने से पहले जरूर जानें ये नियम, वरना नहीं मिलेगा पूरा लाभ!

Astrology: क्या आप भी तांबा, पीतल या सरबलोह का कड़ा पहनते हैं? जानिए कड़ा पहनने से पहले उसे अभिमंत्रित करने की सही विधि, शुभ मंत्र और जरूरी नियम.

Astrology: भारतीय संस्कृति में कड़े को पहनेना केवल एक धातु के आभूषण तक सीमित नहीं है. इसे शक्ति, संरक्षण, आत्मविश्वास, स्थिरता और मानसिक शांति का निशानी माना जाता है. पुरानी मान्यताओं में बताया गया है कि तांबा, पीतल और स्टील (सरबलोह) जैसी धातुएं विशेष शक्ति को अपनी ओर आकर्षित करती है और धारण करने की क्षमता रखती हैं. काफी लोग इन कड़ो को धार्मिक आस्था, ज्योतिषीय उपायों या व्यक्तिगत सुरक्षा के भाव से पहनेते हैं. 

धार्मिक ग्रंथों में कड़े को पहनेने से पहले उसका शुद्धिकरण और अभिमंत्रण करने की परंपरा भी बताई गई है. माना जाता है कि विधिपूर्वक मंत्रों के साथ अभिमंत्रित किया गया कड़ा न केवल पहनेने वाले की पॉजिटिव सोच को बढ़ाता है, बल्कि उसके जीवन में शुभता, आत्मविश्वास और आंतरिक संतुलन का संचार भी करता है. कई लोग कड़ा पहनेने से पहले उसे पंचामृत, गंगाजल और विशेष मंत्रों के माध्यम से शुद्ध और जागृत करते हैं, ताकि वह शुभ फल दे और आध्यात्मिक साधन बन सके.

अगर आप भी तांबे, पीतल या स्टील का कड़ा पहनेने जा रहे हैं, तो उसकी सही शुद्धिकरण और अभिमंत्रण विधि जानना आपके लिए उपयोगी हो सकता है. इससे कड़े से जुड़ी पारंपरिक मान्यताओं और आध्यात्मिक महत्व को बेहतर ढंग से समझा जा सकता है.

कड़ा धारण करने से पहले कैसे करें शुद्धिकरण?

किसी भी धातु का कड़ा पहनेने से पहले उसकी पुरानी शक्ति को हटाने के लिए शुद्धिकरण करना बहुत जरूरी माना जाता है.

शुद्धिकरण के लिए आवश्यक सामग्री:

कड़े के शुद्धिकरण की विधि शुरू करने से पहले कुछ सामग्रियों की बहुत जरूरी होती है. गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद और घी को अत्यंत शुभ माना गया है, इन पांचों तत्वों को एक साफ बरतन में मिलाकर पंचामृत तैयार करें.

शुद्धिकरण प्रक्रिया:-

  • कड़े को कुछ समय के लिए पंचामृत में डुबोकर रखें.
  • इसके बाद गंगाजल या स्वच्छ जल से धो लें.
  • साफ लाल या पीले कपड़े पर रखें.
  • कड़े के सामने दीपक और धूप या अगरबत्ती जलाएं.
  • कुमकुम या चंदन का तिलक लगाएं.

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कड़े की धातु के अनुसार कौन-सा मंत्र जपना चाहिए?

तांबे का कड़ा अभिमंत्रित करने की विधि

तांबा सूर्य और मंगल ग्रह से संबंधित धातु माना जाता है. यह ऊर्जा, आत्मविश्वास, साहस और पॉजिटिविटी का प्रतीक है. अगर आप तांबे का कड़ा धारण करना चाहते हैं, तो इसे शुभ मुहूर्त में अभिमंत्रित करके पहनेना ज्यादा फलदायी होगा.

तांबे का कड़ा अभिमंत्रित करने का शुभ समय

तांबे के कड़े को अभिमंत्रित करने के लिए रविवार या मंगलवार का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है. इस विधि को सूर्योदय के समय करना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह समय सूर्य ऊर्जा के प्रभाव से जुड़ा होता है.

कौन-सा मंत्र जपें?

शुद्धिकरण के बाद कड़े को अपने हाथ में लेकर श्रद्धापूर्वक दिये गए मंत्रों में से एक किसी एक मंत्र का 108 बार जाप करें—

"ॐ हां हीं हूं सः सूर्याय नमः"

या

"ॐ अं अंगारकाय नमः"

तांबे का कड़ा कैसे धारण करें?

मंत्र जाप पूरा होने के बाद तांबे का कड़ा सीधे हाथ में ही पहनेना शुभ माना जाता है. अभिमंत्रित तांबे का कड़ा धारण करने से सूर्य और मंगल ग्रह से संबंधित शुभ फल प्राप्त होने लगते है.

पीतल का कड़ा अभिमंत्रित करने की विधि

ज्योतिष शास्त्र में पीतल को गुरु ग्रह (बृहस्पति) से संबंधित धातु माना जाता है. गुरु को ज्ञान, विवेक, समृद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और शुभता का ग्रह माना जाता है. इसलिए पीतल का कड़ा पहनेने से पहले उसका विधिपूर्वक अभिमंत्रण करना शुभ माना जाता है.

पीतल का कड़ा अभिमंत्रित करने का शुभ समय

पीतल के कड़े को अभिमंत्रित करने के लिए गुरुवार का दिन सबसे शुभ माना जाता है. इस विधि को सुबह पूजा के समय करना अच्छा माना जाता है, जब वातावरण शांत और सात्विक होता है.

कौन-सा मंत्र जपें?

शुद्धिकरण के बाद कड़े पर हल्दी का तिलक लगाएं और उसे अपने सामने रखें. इसके बाद भगवान विष्णु और गुरु ग्रह के दिये गए मंत्र का 108 बार श्रद्धापूर्वक जाप करें—

"ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः"

पीतल का कड़ा कैसे धारण करें?

मंत्र जाप पूरा होने के बाद पीतल का कड़ा दाहिने हाथ में पहने करना शुभ माना जाता है. अभिमंत्रित पीतल का कड़ा गुरु ग्रह की पॉजिटिव एनर्जी से जुड़ाव रखता है, जो जीवन में ज्ञान, सौभाग्य, मानसिक शांति और उन्नति का मार्ग अच्छा करने में मदद करता है.

स्टील या सरबलोह का कड़ा अभिमंत्रित करने की विधि

स्टील या सरबलोह का कड़ा भारतीय परंपराओं में दृढ़ता, अनुशासन, साहस और आध्यात्मिक संरक्षण का प्रतीक माना जाता है. इस कड़े का संबंध शनि देव और भगवान हनुमान की कृपा से जोड़ा जाता है. विधिपूर्वक अभिमंत्रित किया गया सरबलोह कड़ा व्यक्ति को पॉजिटिव एनर्जी देता और नेगेटिव चीजों से बचाने में मदद करता है.

स्टील या सरबलोह का कड़ा अभिमंत्रित करने का शुभ समय

इस कड़े को अभिमंत्रित करने के लिए शनिवार की शाम, मंगलवार और हनुमान जयंती जैसे खास धार्मिक तिथियों का दिन शुभ माना गया है. इन दिनों में की गई पूजा और मंत्र जाप का विशेष महत्व बताया जाता है.

कौन-सा मंत्र जपें?

शुद्धिकरण के बाद कड़े को अपने सामने साफ स्थान पर रखें और श्रद्धापूर्वक दिये गए मंत्र या चालीसा में से एक किसी एक का 108 बार जाप करें—

हनुमान चालीसा का पाठ

या

"ॐ शं शनैश्चराय नमः"

माना जाता है कि इन मंत्रों के जाप से कड़ा आध्यात्मिक रूप से अभिमंत्रित होता है और उसमें शुभ फल प्राप्त होता है.

स्टील या सरबलोह का कड़ा कैसे धारण करें?

मंत्र जाप पूरा होने के बाद कड़े को श्रद्धा और विश्वास के साथ पहने. अभिमंत्रित सरबलोह कड़ा साहस, आत्मबल और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है.

सिख परंपरा में सरबलोह कड़े का महत्व

सिख धर्म में सरबलोह कड़ा आस्था, अनुशासन और गुरु की शिक्षाओं के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है. अगर कोई व्यक्ति इसे सिख परंपरा के अनुसार धारण कर रहा है, तो वह गुरुद्वारे में माथा टेककर, अरदास कर या जापजी साहिब का पाठ करके भी कड़े को पहने  सकता है. यह परंपरा कड़े को केवल एक धातु के आभूषण के रूप में नहीं, बल्कि धार्मिक मूल्यों और जीवन के उसूल की याद दिलाने वाले प्रतीक के रूप में देखती है.

कड़ा खरीदतें समय कुछ बातों का ध्यान रखें:

1. बिना जोड़ का कड़ा चुनें

ज्योतिषीय उपयोग के लिए ऐसा कड़ा बेहतर माना जाता है जिसमें किसी भी तरह की कटिंग, वेल्डिंग या जोड़ न हो.

2. संकल्प अवश्य लें

मंत्र जाप शुरू करने से पहले हाथ में जल लेकर संकल्प करें कि आप यह कड़ा किस काम स्वास्थ्य, सुख, सुरक्षा या समृद्धि के लिए धारण कर रहे हैं.

3. पवित्रता बनाए रखें

अभिमंत्रण होने के बाद कड़े की स्वच्छता और पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए, इसे अपवित्र स्थानों पर रखने से बचें.

यह भी पढ़े- Mahabharat: सफलता के लिए क्यों जरूरी हैं धैर्य, दूरदर्शिता और सही रणनीति?

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अणिमा शुक्ला | डिजिटल पत्रकार (इंटर्न), ABP Live धर्म-एस्ट्रो सेक्शन

अणिमा शुक्ला एक उभरती हुई डिजिटल पत्रकार और वीडियो स्टोरीटेलर हैं, जो वर्तमान में ABP Live के धर्म और एस्ट्रो सेक्शन में इंटर्न के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने AAFT, नोएडा से BAJMC और AIMC, दिल्ली से TV & Radio Journalism (TVRJ) में पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की है, जिसने उनके कंटेंट को व्यावहारिक, तकनीकी रूप से मजबूत और ऑडियंस-फोकस्ड बनाया है.

अणिमा की विशेष रुचि अंक शास्त्र (Numerology), वास्तु शास्त्र, वैदिक ज्योतिष और हस्तरेखा विज्ञान (Palmistry) जैसे विषयों में है. वे इन पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को सरल और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत करती हैं, ताकि डिजिटल ऑडियंस, खासतौर पर Gen-Z, उन्हें आसानी से समझ सके और अपने जीवन में लागू कर सके.

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