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Putrada Ekadashi 2026: एकादशी का पारण करें या सावन सोमवार का व्रत रखें? 24 अगस्त को कैसे निभाएं दोनों नियम

Sawan Putrada Ekadashi 2026: इस बार 24 अगस्त को सावन सोमवार और सावन एकादशी का व्रत पारण एकसाथ किया जाएगा. ऐसे में कैसे करें पारण, क्या है नियम ताकि सोमवार व्रत भी जारी रख सकें जानें.

Sawan Putrada Ekadashi 2026: 24 अगस्त 2026 को सावन का अंतिम सोमवार है. इसी दिन कई पंचांगों में श्रावण शुक्ल एकादशी के व्रत का पारण भी बताया गया है, इसलिए भक्तों में ये सवाल है कि पहले एकादशी का पारण कैसे करें? क्योंकि सावन सोमवार का व्रत शुरू हो जाएगा. धार्मिक नियमों के अनुसार दोनों व्रतों को निभाते हुए कैसे करें पारण और सोमवार व्रत की शुरुआत जान लें.

शास्त्रों के अनुसार जो लोग एकादशी व्रत करते हैं उन्हें तय समय सीमा में व्रत पारण करना जरुरी है, नहीं तो व्रत का फल नहीं मिलता है. एकादशी व्रत में द्वादशी खत्म होने से पहले कर लेना चाहिए.

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नारद पुराण आदि में एकादशी व्रत के साथ द्वादशी में पारण की व्यवस्था बताई गई है. पारण से पहले द्वादशी के शुरूआती भाग यानी हरिवासर में भोजन न करने का नियम बताया जाता है. इसलिए हरिवासर समाप्त होने के बाद निर्धारित पारण काल में ही व्रत खोलना चाहिए.

सावन पुत्रदा एकादशी व्रत पारण (Putrada Ekadashi 2026 Paran Rules)

2026 में श्रावण शुक्ल एकादशी की तिथि 23 अगस्त को शुरू होकर 24 अगस्त की सुबह समाप्त होती है. स्मार्त परंपरा के अनुसार 23 अगस्त को एकादशी व्रत और 24 अगस्त को द्वादशी में पारण माना गया है. पंचांग गणना में 24 अगस्त को पारण का समय दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक दिया गया है. 

24 अगस्त का सावन सोमवार कैसे रखा जाए?

24 अगस्त को ही सोमवार व्रत भी है. ऐसे में इसका सबसे उचित तरीका ये है कि सुबह स्नान करके भगवान शिव की पूजा, अभिषेक और सोमवार व्रत का संकल्प करें. शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और उपलब्ध पूजा सामग्री अर्पित करें. इसके बाद एकादशी के पारण का समय आने पर पहले भगवान विष्णु का स्मरण करके एकादशी व्रत का विधिपूर्वक पारण करें.

पारण में क्या खाएं जिससे सोमवार व्रत जारी रहे

पारण के बाद सोमवार की साधना जारी रखी जा सकती है. यदि कोई व्यक्ति सोमवार को भी अन्न का त्याग करना चाहता है, तो पारण में हल्का सात्विक फलाहार लेकर आगे पूरे दिन अन्न, नमक का त्याग करें. शाम को भगवान शिव की पूजा और आरती करें. इस तरह एकादशी का पारण भी द्वादशी के नियम के अनुसार हो जाता है और सावन सोमवार की शिव उपासना भी बनी रहेगी. 

इस बात का रखें ध्यान

पारण छोड़कर केवल सोमवार का निराहार व्रत करना एकादशी के पारण नियम के अनुरूप नहीं माना जाएगा. एकादशी व्रत का समापन द्वादशी में करना आवश्यक माना गया है.

FAQ

1. क्या 24 अगस्त को सावन सोमवार का व्रत रखते हुए एकादशी का पारण किया जा सकता है?
हां, दोनों व्रतों के नियमों का पालन किया जा सकता है। एकादशी का पारण द्वादशी के निर्धारित पारण काल में करना चाहिए। इसके बाद सोमवार व्रत के संकल्प के अनुसार अन्न का त्याग रखते हुए शिव पूजा और उपासना जारी रख सकते हैं।

2. अगर सोमवार का व्रत भी रखना है तो एकादशी का पारण किस चीज से करें?
पारण सात्विक और हल्के भोजन या फलाहार से किया जा सकता है। यदि सोमवार व्रत में अन्न और नमक का त्याग करना है तो पारण में अपनी परंपरा के अनुसार फल, दूध या अन्य सात्विक फलाहार लिया जा सकता है। पारण के बाद सोमवार का व्रत जारी रखा जा सकता है।

3. क्या एकादशी का पारण किए बिना पूरे दिन सोमवार का निर्जला व्रत रखना सही है?
यदि आपने एकादशी का व्रत किया है तो केवल सोमवार का व्रत निभाने के लिए द्वादशी का पारण टालना उचित नहीं माना जाता। एकादशी व्रत का धार्मिक विधान द्वादशी में पारण के साथ पूरा होता है। इसलिए निर्धारित पारण काल में व्रत खोलना प्राथमिकता होनी चाहिए।

4. 24 अगस्त को पहले शिव पूजा करें या एकादशी का पारण?
सुबह स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा और सोमवार व्रत का संकल्प किया जा सकता है। इसके बाद जब एकादशी का निर्धारित पारण काल आए, तब भगवान विष्णु का स्मरण करके पारण करें। पारण के बाद सोमवार व्रत के शेष नियमों का पालन करते हुए शाम को शिव पूजा, आरती और व्रत का समापन किया जा सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
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  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि
  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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