100 करोड़ रामायण पाठ का फल! जगद्गुरु रामभद्राचार्य का चमत्कारी श्लोक
Jagadguru Rambhadracharya: जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने धार्मिक कार्यक्रम में लोगों को एक ऐसे श्लोक की जानकारी दी जिसे उच्चारण करने से 100 करोड़ रामायण पाठ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है.

Jagadguru Rambhadracharya: जगद्गुरु रामभद्राचार्य दार्शनिक, शिक्षाविद्, बहुभाषाविद् और हिंदू धर्म गुरु हैं. उनके द्वारा बताया गया एक विशेष श्लोक इन दिनों धार्मिक जगत से जुड़े लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. उनका कहना है कि इस श्लोक के जाप करने से व्यक्ति को 100 करोड़ रामायण पाठ के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है.
इस श्लोक के उच्चारण करने से आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ जीवन में आने वाली कठिनाइयों से भी छुटकारा मिलता है. आइए जानते हैं जगद्गुरु रामाभद्राचार्य द्वारा बताए गए इस चमत्कारी श्लोक के बारे में.
जानिए चमत्कारी श्लोक के बारे में
ये चमत्कारी श्लोक है, 'नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं, सीतासमारोपितवामभागम्। पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्।।' इस श्लोक का अर्थ है कि, (नील कमल के समान श्यामल, कोमल अंग वाले) (जिन के बाईं तरह माता सीता विराजमान हैं) (जिनके दोनों हाथों में अमोघ धनुष और बाण हैं) (उन रघुकुल के शिरोमणि को हम नमन करते हैं).
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के अनुसार इस श्लोक का उच्चारण नियमित रूप से सुबह के समय करने से व्यक्ति के जीवन में तमाम बाधाएं दूरी होती है और तो और आपको 100 करोड़ रामायाण पाठ के बाराबर फल प्राप्त होता है. इस श्लोक के साथ उन्होंने हनुमान चालीसा मंत्र उच्चारण करने की भी सलाह दी है.
जगद्गुरु रामभद्राचार्य प्रदान करते हैं मार्गदर्शन
जगद्गुरु रामभद्राचार्य धार्मिक कार्यक्रमों में अपने प्रवचनों और उपदेशों के जरिए जीवन के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं. अपने उपदेश में वे, ज्यादातर अच्छे और बुरे जीवन के बीच का अंतर स्पष्ट करते हैं. इसके अलावा वे आध्यात्मिक उन्नति के साथ सामाजिक जीवन की जिम्मेदारियों पर भी जोर देते हैं.
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