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96 प्रतिशत ढक जाएगा चांद, फिर भी पूरा ग्रहण क्यों नहीं? ब्लड मून की तस्वीर के पीछे छिपा है चौंकाने वाला विज्ञान

Chandra Grahan 2026: रक्षाबंधन पर 28 अगस्त को लगने वाला चंद्र ग्रहण बहुत खास होगा, इस दिन चंद्रमा 96 प्रतिशत तक ढक जाएगा लेकिन फिर भी इसे पूर्ण ग्रहण नहीं माना जा रहा है क्या है रोचक वजह जानें.

Chandra Grahan 2026: हिंदू परंपरा में चंद्र ग्रहण धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया है. राहु जब चंद्रमा को ग्रसता है तो चंद्र ग्रहण लगता है. धार्मिक परंपरा में ग्रहण की स्थिति को उसके स्पर्श, मध्य और मोक्ष आदि चरणों से समझा जाता है, जबकि विज्ञान में यह देखा जाता है कि चंद्रमा का कितना भाग पृथ्वी की उम्ब्रा में प्रवेश करता है. 

28 अगस्त 2026 को चंद्र ग्रहण लग रहा है. जो भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन इसे बहुत खास माना जा रहा है, क्योंकि चांद 96 प्रतिशत जाएगा लेकिन फिर भी पूर्ण ग्रहण नहीं लगेगा, क्या है वजह जानते हैं. 

ब्लड मून क्यों दिखाई देगा?

चंद्रमा का जो हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में जाएगा, वह पूरी तरह काला नहीं दिखेगा. पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरने वाली सूर्य की रोशनी मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचती है. वायुमंडल नीली रोशनी को अधिक बिखेर देता है और लाल-नारंगी प्रकाश अपेक्षा अधिक चंद्रमा तक पहुंचता है. इसी वजह से ग्रहण के दौरान चंद्रमा तांबे या लाल रंग का दिखाई दे सकता है, जिसे ब्लड मून कहा जाता है.

96% तक ढकेगा चांद, फिर पूर्ण ग्रहण क्यों नहीं

नासा के अनुसार इस बार 28 अगस्त को चंद्रमा पृथ्वी की छाया के बिल्कुल केंद्र से नहीं गुजर रहा है. वो उम्ब्रा (Umbra) के बहुत करीब से गुजरते हुए भी उसके एक छोटे हिस्से से बाहर रहेगा इसलिए 96 प्रतिशत का हिस्सा गहरी छाया में जाने के बावजूद चंद्रमा का थोड़ा भाग सूर्य की सीधी रोशनी में रहेगा. इसी छोटे से चमकीले हिस्से के कारण पूर्ण चंद्र ग्रहण नहीं लगेगा. 

चंद्रमा को राहु ग्रसता

समुद्र मंथन के प्रसंग में स्वर्भानु नामक असुर ने देवताओं के बीच बैठकर अमृत पी लिया था. भगवान विष्णु ने उसका सिर सुदर्शन चक्र से अलग कर दिया. उसका सिर राहु और धड़ केतु कहलाया. मान्यता है कि इसी वैर के कारण राहु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को ग्रसता है.

चंद्र ग्रहण का FAQ

1.चंद्र ग्रहण में स्पर्श, मध्य और मोक्ष का क्या अर्थ है?
धार्मिक परंपरा में ग्रहण के तीन प्रमुख चरण माने जाते हैं. स्पर्श ग्रहण शुरू होने का समय, मध्य ग्रहण के चरम का समय और मोक्ष ग्रहण समाप्त होने का समय होता है.

2.चंद्र ग्रहण के दौरान चांद लाल क्यों दिखाई देता है?
पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की रोशनी को मोड़कर चंद्रमा तक पहुंचाता है. नीली रोशनी ज्यादा बिखर जाती है, जबकि लाल-नारंगी प्रकाश चंद्रमा तक पहुंचता है. इसी वजह से चांद तांबे या लाल रंग का दिखाई दे सकता है, जिसे ब्लड मून कहा जाता है.

3.क्या चंद्र ग्रहण और ब्लड मून एक ही चीज हैं?
नहीं, दोनों शब्द एक ही बात नहीं बताते. चंद्र ग्रहण पृथ्वी की छाया के चंद्रमा पर पड़ने की खगोलीय घटना है, जबकि ब्लड मून ग्रहण के दौरान चंद्रमा के लाल-तांबे रंग में दिखाई देने को कहा जाता है.

4.विज्ञान की नजर से चंद्र ग्रहण कैसे लगता है?
जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण लगता है. चंद्रमा का जितना हिस्सा उम्ब्रा में प्रवेश करता है, उसी के आधार पर ग्रहण की स्थिति तय होती है.

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Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Barsaley)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, रमजान, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
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  • शकुन शास्त्र
  • वास्तु

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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