Maa Sureshwari Devi Temple in Haridwar: चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचयिता माना जाता है, जिन्होंने अपनी मंद मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की उत्पत्ति की थी.
यही कारण है कि इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है. भक्त इस दिन विधि-विधान से मां की आराधना कर सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं.
Navratri 4th Day Maa Kushmanda: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को ऐसे करें प्रसन्न, जानें पूजा विधि, मंत्र, रंग, आरती और प्रिय भोग
सुरेश्वरी देवी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हरिद्वार से करीब 7 किलोमीटर दूर रानीपुर के घने जंगलों में स्थित सिद्धपीठ मां सुरेश्वरी देवी मंदिर में चौथे दिन भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली. सूरकूट पर्वत पर विराजमान इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता है, लेकिन मां के दर्शन की आस्था उनके हर कष्ट को आसान बना देती है.
सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का तांता लगा रहा और पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर नजर आया.
कठिन मार्ग पार कर मां के दर्शन
मां सुरेश्वरी देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं. घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों से होकर गुजरना आसान नहीं होता, लेकिन श्रद्धालु पूरे उत्साह और विश्वास के साथ यह यात्रा पूरी करते हैं.
मंदिर पहुंचकर भक्त विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. इस दौरान मंदिर परिसर में “जय माता दी” के जयकारों से माहौल गूंज उठता है, जो भक्तों के उत्साह को और बढ़ा देता है.
भोग और पूजा से मां को प्रसन्न करने की परंपरा
नवरात्रि के इस विशेष दिन भक्त मां कूष्मांडा को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न प्रकार के भोग अर्पित करते हैं. फल, मिठाई और खास प्रसाद चढ़ाकर भक्त अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं.
मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा और भोग अर्पण से मां शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं.
पुजारी ने बताया नवरात्रि का महत्व
मंदिर के मुख्य पुजारी कीर्ति बल्लभ तिवारी के अनुसार, नवरात्रि के नौ दिन देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा के लिए समर्पित होते हैं. इन दिनों में मां की आराधना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है.
उन्होंने बताया कि चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है, साथ ही व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से भी लाभ मिलता है.
आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक
चैत्र नवरात्रि का यह पावन पर्व केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और आत्मिक शांति का भी प्रतीक है. मां कूष्मांडा की पूजा से व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा का संचार होता है और नकारात्मकता दूर होती है.
यही कारण है कि इस दिन श्रद्धालु पूरे विश्वास और भक्ति के साथ मां की आराधना करते हैं और अपने जीवन को बेहतर बनाने की कामना करते हैं.
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