Solar Panel Cleaning: टैप वॉटर से धो रहे हैं सोलर पैनल? ये 1 गलती घटा देगी 30% पावर
Solar Panel: पैनल की ऊपरी सतह पर गंदगी की परत बन जाती है, तो सूरज की रोशनी का कुछ हिस्सा पैनल के सेल तक पहुंचने से पहले ही रुक जाता है. इससे बिजली उत्पादन कम हो सकता है.

How To Clean Solar Panels At Home: भारत में सोलर पैनल अब तेजी से घरों की छतों से लेकर फैक्ट्रियों और बड़े औद्योगिक इलाकों तक नजर आने लगे हैं. बिजली का बिल कम करने और साफ ऊर्जा के लिए लोग बड़ी संख्या में सोलर सिस्टम लगवा रहे हैं. लेकिन सोलर पैनल लगाने के बाद उसकी सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाए तो बिजली उत्पादन पर असर पड़ सकता है. खासकर पैनल को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला पानी भी महत्वपूर्ण है. नल के हार्ड वॉटर में मौजूद कैल्शियम और दूसरे मिनरल्स पैनल के ग्लास पर सफेद परत जमा कर सकते हैं. यह परत सूखने के बाद सूरज की रोशनी को सेल तक पहुंचने में रुकावट डाल सकती है.
सोलर पैनल पर धूल जमने से घटती है बिजली
दरअसल, सोलर पैनल पर धूल, मिट्टी और दूसरी गंदगी जमा होने को सोइलिंग कहा जाता है. जब पैनल की ऊपरी सतह पर गंदगी की परत बन जाती है, तो सूरज की रोशनी का कुछ हिस्सा पैनल के सेल तक पहुंचने से पहले ही रुक जाता है. इससे बिजली उत्पादन कम हो सकता है. भारत में धूल, प्रदूषण, निर्माण कार्य और लंबे समय तक चलने वाले सूखे मौसम की वजह से पैनल पर गंदगी जमा होने की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है.

टैप वॉटर से सफाई में हो सकती है ये गलती
लेकिन यहां सिर्फ धूल ही समस्या नहीं है. अगर पैनल को सामान्य नल के पानी से धोकर वहीं छोड़ दिया जाता है, तो पानी सूखने के बाद उसमें मौजूद मिनरल्स ग्लास की सतह पर सफेद दाग या परत छोड़ सकते हैं. समय के साथ यह परत जमा होती जाती है और पैनल की सतह की पारदर्शिता पर असर डाल सकती है. यही वजह है कि सिर्फ पानी डालकर पैनल धो देना हमेशा पर्याप्त नहीं माना जाता.
एक महीने में 30% तक घट सकता है पावर आउटपुट
पैनल पर जमा धूल भी बिजली उत्पादन कम कर सकती है. एक हफ्ते तक सफाई न होने पर बिजली उत्पादन में करीब 10 फीसदी तक कमी का अनुमान दिया गया है. दो हफ्ते में यह नुकसान 15 से 18 फीसदी तक पहुंच सकता है, जबकि एक महीने तक सफाई न करने पर 20 से 30 फीसदी तक बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है. लंबे समय तक पैनल की सफाई न होने पर नुकसान और ज्यादा हो सकता है.

सफाई के लिए किस पानी का करें इस्तेमाल?
सोलर पैनल की सफाई करते समय पानी की गुणवत्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि नल के पानी में मौजूद मिनरल्स पैनल पर सूखने के बाद अपनी परत छोड़ सकते हैं. अगर आप पैनल को धोने के लिए टैप वॉटर इस्तेमाल कर रहे हैं, तो पानी को पैनल पर सूखने देने के बजाय सफाई के बाद सतह को अच्छी तरह पोंछना जरूरी है. आरओ के वेस्ट वॉटर या डिस्टिल्ड वॉटर जैसे विकल्पों का इस्तेमाल भी पानी से बनने वाले मिनरल दाग को कम करने में मदद कर सकता है.
गर्म पैनल पर न डालें ठंडा पानी
सोलर पैनल की सफाई के दौरान सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि तरीका भी ध्यान में रखना चाहिए. तेज गर्मी में गर्म पैनल पर अचानक ठंडा पानी डालने से बचना चाहिए. तापमान में अचानक बदलाव से ग्लास को नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है. इसलिए पैनल की सफाई सुबह जल्दी या शाम के समय करना बेहतर रहता है, जब पैनल बहुत ज्यादा गर्म न हो.
पैनल साफ करते समय इन चीजों से बचें
सफाई के लिए स्टील वूल, खुरदरे स्पंज या ऐसे किसी स्क्रबर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिससे पैनल के ग्लास पर खरोंच आ सकती है. इसी तरह तेज केमिकल, ब्लीच, अमोनिया या बहुत मजबूत डिटर्जेंट का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए. सफाई के लिए मुलायम माइक्रोफाइबर कपड़े या सॉफ्ट स्क्वीजी का इस्तेमाल किया जा सकता है.
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इलाके के हिसाब से तय करें सफाई का समय
भारत में हर जगह सोलर पैनल की सफाई की जरूरत एक जैसी नहीं होती. जिन इलाकों में धूल ज्यादा है, निर्माण कार्य चलते रहते हैं या प्रदूषण अधिक है, वहां पैनल को ज्यादा बार साफ करने की जरूरत पड़ सकती है. वहीं समुद्र के पास रहने वाले इलाकों में हवा में मौजूद नमक भी पैनल पर जमा हो सकता है. ऐसे स्थानों पर नियमित सफाई जरूरी है.
पक्षियों की बीट को भी न करें नजरअंदाज
पक्षियों की बीट भी सोलर पैनल के लिए परेशानी पैदा कर सकती है. यह हिस्सा सूरज की रोशनी को रोक सकता है और पैनल के किसी छोटे हिस्से पर ज्यादा गर्मी पैदा कर सकता है. इसलिए पक्षियों की बीट दिखाई देने पर उसे लंबे समय तक जमा न रहने देना बेहतर है.
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