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इंडियंस की सेहत के लिए खतरनाक हैं ये बीमारियां!

पिछले साल कोरोनरी हार्ट डिज़ीज से भारत में सबसे ज्‍यादा लोगों की मौत हुई. ऐेसे में हार्ट डिज़ीज के बारे में जागरूक होना बहुत जरूरी है

नई दिल्ली: देशभर में हार्ट डिज़ीज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है. पिछले साल कोरोनरी हार्ट डिज़ीज से भारत में सबसे ज्‍यादा लोगों की मौत हुई. ऐेसे में हार्ट डिज़ीज के बारे में जागरूक होना बहुत जरूरी है. जानिए, क्या है इस्केमिक (कोरोनरी) हार्ट डिज़ीज.

कोरोनरी हार्ट डिज़ीज - जब शरीर में ब्लड सप्लाई की कमी हो जाती है और दिल की धमनियां संकुचित हो जाती है यानि कोरोनरी धमनी (दिल की धमनी) के अंदर की जगह कम हो जाती है तो हार्ट अटैक पड़ता है.

क्या कहते हैं आंकडे- ग्लोबल बर्डेन ऑफ डिज़ीज (जीबीडी) के द्वारा 2016 में जारी किए आंकड़ों से पता चलता है कि नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज (एनसीडी) और शरीर में किसी भी तरह की चोट भारत में सभी आयु वर्ग के लोगों के बीच मृत्यु का मुख्य कारण है.

द लान्सेट में प्रकाशित जीबीडी डेटा ने दिखाया है कि भारत में सभी ऐज ग्रुप में मौत के 10 में से 7 कारण नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज़ या किसी भी प्रकार की चोट लगना है. 2016 में एनसीडी के कारण भारत में 60 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई थी जिसका मुख्य कारण इस्केमिक हार्ट अटैक था.

ये बीमारियां हैं भारत के लिए खतरा- आंकड़े बताते हैं कि देश अभी भी कुछ प्रमुख बीमारियों के बोझों से दबा है जैसे कि इस्केमिक हार्ट अटैक, पल्मोनरी डिस्ऑर्डर, सेरेब्रोवास्कुलर रोग और क्रोनिक किडनी रोग शामिल हैं.

भारत में पुरुषों और महिलाएं दोनों में ही इस्केमिक हार्ट अटैक के मरीजों की 2005 में 53% की वृद्धि हुई है. इसके साथ-साथ इससे कई मौतें भी हुई हैं.

क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) में 2005 के आंकड़ों के मुकाबले 22.71 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई.

जबकि डायबिटीज में 2005 के स्तर से 70.5% वृद्धि देखी गई.

इसी अवधि में क्रोनिक किडनी रोग में भी 36.42% की वृद्धि हुई है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट- द जॉर्ज इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ के निदेशक डॉक्टर विवेकानंद झा का कहना है कि भारत में मौत और विकलांगता के लिए एनसीडी का योगदान खतरनाक दर से बढ़ रहा है. डायबिटीज और क्रोनिक किडनी रोग में बड़ी वृद्धि देखी गई है.

नोट: ये रिसर्च के दावे पर हैं. ABP न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता. आप किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.

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