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अब इंसानों के बाल से बनेंगे कपड़े, इस देश में तो होने लगे इस्तेमाल!

इंसान के सिर के बालों से बनेंगे अब ऊनी कपड़े यह बात सुनते ही बहुत लोग यह सोचेंगे कि क्या मजाक है? लेकिन यह सपना एक डच डिजाइनर ने सच कर दिखाया है.

जानवर के फर् का इस्तेमाल कपड़े बनाने में किया जाता है लेकिन इंसान के सिर के बालों से बनेंगे अब ऊनी कपड़े यह बात सुनते ही बहुत लोग यह सोचेंगे कि क्या मजाक है? बाल से बना ऊनी कोट पहनने की बात करेंगे को आपका रिएक्शन क्या होगा? आप एक पल के लिए हैरान जरूर हो जाएंगे.  यह सपना डच के डिजाइनर ने सच करके दिखाया है.  डिजाइनर के मुताबिक बालों से बना ऊनी कोट शरीर को गर्म रखने में काफी ज्यादा मदद करता है. बाल केराटिन प्रोटीन फाइबर से बना होता है. इसलिए सर्दी में यह गर्मी का एहसास दिलाता है.  तो चलिए आपको ज्यादा कनफ्यूज किए बता दें कि दरअसल पूरा मामला क्या है? डच के एक डिजाइनर जोकि एक स्टार्टअप शुरू किया है उन्होंने हाल ही में एक ऐसा ऊनी कोट और विंटर क्लोथ डिजाइन किया है जो इंसान के सिर के बालों से बना हुआ है. यह स्टार्टअप कंपनी 'ह्यूमन मटेरियल लूप' हैं जिसके जरिए इंसान के बाल को कपड़ा में बदलकर फैशन उद्योग को बदलने की उम्मीद करते है. इसमें इंसान के बालों से  कोट, जंपर्स और ब्लेज़र के प्रोटोटाइप बनाए हैं. इस उम्मीद के साथ कि एक दिन टेक्सटाइल कंपनियां खुद से इस तरह के डिजाइन को बढ़ावा देगी. 

इस स्टार्टअप के को-फाउंडर ज़ोफ़िया कोल्लर का कहना है कि वह काफी लंबे समय से बालों से बने कपड़ों को लेकर एट्रैक्ट थे. उन्होंने देखा है कि कई लोग इस तरह के डिजाइन से काफी ज्यादा प्रभावित हुए है. इंसान के बाल बढ़ते हैं और हम उसे काट देते हैं. कभी-कभी लंबे बाल देखकर हमें परेशानी होती है हम उसे कटवा देते हैं. जब कोविड-19 महामारी आई तो कोल्लर के सामने एक डिजाइनर के रूप में पहचान का संकट खड़ा हो गया. तब उनके मन में बाल से डिजाइन किए हुए कोट और कपड़ों का ख्याल आया. फिर उन्होंने फैसला किया कि इस इंडस्ट्री में वो खास काम करेंगे.

अमेरिका और कनाडा हर मिनट इतने बाल करती है प्रोड्यूस

अमेरिका और कनाडा में सैलून हर मिनट 877 पाउंड बाल कचरा पैदा करते हैं. जब बाल ऑक्सीजन की उपस्थिति के बिना टूटते हैं, जैसे लैंडफिल में दबे कूड़े के थैले में, तो यह ग्रीनहाउस गैसें छोड़ता है जो जलवायु परिवर्तन में योगदान करती हैं. ह्यूमन मटेरियल लूप के अनुसार, हर साल 72 मिलियन किलोग्राम मानव बाल अपशिष्ट यूरोपीय लैंडफिल में पहुँचते हैं, जो सात एफिल टावरों के वजन के बराबर है.

कोल्लर ने कहा, 'आप इसे एक नेचुरल रिसोर्स की तरह मान सकते हैं. जिसका वर्तमान में कोई स्केलेबल समाधान यानि एक सही इस्तेमाल नहीं है. वह कहती हैं कि अधिकांश देश इस कचरे को जला देते हैं. और कई वैकल्पिक समाधान पर्यावरण के अनुकूल नहीं हैं या व्यापक रूप से उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं हैं.

कुछ ऐसे तैयार किया जाता है बालों से धागा

कोल्लर बताते हैं कि बालों के कपड़े का उपयोग करना किसी अन्य सामग्री के साथ स्वेटर बुनने से अलग नहीं है. छोटे बालों को एक साथ काता जाता है और सूत बनाने के लिए एक सतत धागे में बदल दिया जाता है और फिर शुद्ध रंगद्रव्य से रंगा जाता है. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कंपनी उत्पादन बढ़ाती है. वह यार्न या कपड़े को रंग सकती है. जो इस पर निर्भर करता है कि कौन सा सबसे बेहतर है. ह्यूमन मटेरियल लूप का पहला प्रोटोटाइप ऊन जैसा अहसास वाला स्वेटर था. कोल्लर ने कहा, "मुझे एक ऐसा उत्पाद बनाने की ज़रूरत थी जिससे लोग जुड़ सकें और जम्पर सबसे बेस्ट प्रोटोटाइप में से एक था जिसे हम बना सकते थे, लेकिन सबसे अधिक भरोसेमंद भी.

तब से कंपनी ने दूसरे प्रोटोटाइप का इस्तेमाल किया है. बालों  से बने कपड़े को आु अर्जेटीना के पहाड़ों पर भी पहन सकते हैं. यह इतना ज्यादा गर्म करता है. जिसमें थर्मल इन्सुलेशन प्रदान करने के लिए बालों से भरा एक आउटडोर कोट भी शामिल है, जिसे उसने अर्जेंटीना के सबसे ऊंचे पर्वत एकॉनकागुआ के एक अभियान के दौरान कठोर परिस्थितियों में आज़माया था. ये डिज़ाइन खरीदने के लिए उपलब्ध नहीं हैं - इसका उद्देश्य अन्य डिज़ाइनरों और ब्रांडों को काम करने के लिए सामग्री की आपूर्ति करना है। कोल्लर का कहना है कि एक बार बड़े उत्पादन की मात्रा तक पहुंचने के बाद ऊन की कीमत प्रतिस्पर्धी होनी चाहिए.

आगे कहते हैं कि फिलहाल लोग इंसान के बाल पहनने के लिए खास तैयार लेकिन उनका मानना है कि यह विचार जनता में फैल सकता है. कोल्लर के लिए, यह केवल नवीनता या स्थिरता पहलू के लिए मानव बाल से बने जम्पर पहनने के बारे में नहीं है. उनका तर्क है कि मानव बाल एक अविश्वसनीय रूप से टिकाऊ सामग्री है. इससे बने कपड़े काफी लॉन्ग टर्म तक चल सकते हैं. 

ह्यूमन मटेरियल लूप ने शुरू किया इंसान के बालों से बने कपड़ें

ह्यूमन मटेरियल लूप अपने बाल नीदरलैंड, बेल्जियम और लक्ज़मबर्ग के सैलून से प्राप्त करता है, कटे या टूटे हुए बालों का उपयोग करता है क्योंकि इसमें परमाणु डीएनए नहीं होता है जो किसी व्यक्ति की पहचान कर सके. यह यह पता लगाने के लिए एक दस्तावेज़ीकरण श्रृंखला स्थापित करने पर काम कर रहा है कि इसकी सामग्री कहां से आती है और कहां जाती है.

यह इंडस्ट्री काफी अच्छा काम कर रहा है

ऐतिहासिक रूप से, कई अलग-अलग संस्कृतियों में मानव बाल का उपयोग वस्त्र के रूप में किया जाता रहा है. माइक्रोनेशिया में, किरिबाती जनजाति ने नारियल के रेशों, शार्क के दांतों, ताड़ के पत्तों और मानव बालों सहित प्राकृतिक सामग्रियों से बुना हुआ कवच बनाया. जबकि 13 वीं शताब्दी में, अब दक्षिण-पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका में लोगों ने बालों की लटों को एक साथ जोड़कर मोज़े तैयार किए.

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