ब्रेस्टफीडिंग करने वाले बच्चों का बचपन में होता ब्लड प्रेशर कम, रिसर्च से खुलासा
रिसर्च से पुष्टि हुई है कि ब्रेस्टफीडिंग का संबंध व्यस्क होने पर दिल संबंधी बीमारी के कम जोखिम से जुड़ा है. जिन बच्चों ने कम मात्रा में भी अपनी मां का दूध पीया, तीन साल की उम्र में ब्लड प्रेशर कम था.

जिन बच्चों को किसी भी समय के लिए ब्रेस्टफीडिंग कराया गया, उनका ब्लड प्रेशर बिल्कुल ब्रेस्टफीडिंग नहीं करानेवालों की तुलना में कम था. शोधकर्ताओं का कहना है कि शुरुआती उम्र में कम ब्लड प्रेशर से व्यस्क होने पर दिल और रक्त वाहिकाएं स्वस्थ हो सकते हैं. सेहत के लिए ब्रेस्टफीडिंग के फायदों का खुलासा एक नई रिसर्च में हुआ है. रिसर्च के नतीजों को जर्नल ऑफ अमेरिकम हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित किया गया है.
ब्रेस्टफीडिंग बचपन में ब्लड प्रेशर को करता है कम
उससे पता चला है कि हाई ब्लड प्रेशर समेत दिल संबंधी बीमारी के जोखिम कारक बचपन में शुरू हो सकता है. रिसर्च से इसकी भी पुष्टि हुई है कि ब्रेस्टफीडिंग का संबंध व्यस्क होने पर दिल संबंधी बीमारी के कम जोखिम से जुड़ा है. हालांकि, ब्रेस्टफीडिंग की समय अवधि और मात्रा स्पष्ट नहीं है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि बचपन में ब्लड प्रेशर और शुरुआती दिनों में ब्रेस्टफीडिंग के बीच मूल्यांकन करनेवाली पहली रिसर्च है. शोधकर्ता मेगन आजाद ने कहा, "नतीजे अप्रत्याशित हैं. हमने उम्मीद के विपरीत पाया, उससे फर्क नहीं पड़ता है कि कब तक आपको ब्रेस्टफीडिंग कराया गया, चाहे ये दो दिन हो, दो सप्ताह हो या दो महीने हो या दो साल. हमने ब्रेस्टफीडिंग से ब्लड प्रेशर में सुधार देखा."
व्यस्क होने पर दिल की बीमारी का जोखिम भी कम
रिसर्च के मुताबिक, जिन बच्चों ने तुलनात्मक रूप से अपनी मां का कम दूध पीया, उनका ब्लड प्रेशर तीन साल की उम्र में कम था, चाहे कितनी भी देर उनको ब्रेस्टफीडिंग कराया गया. शोधकर्ताओं ने रिसर्च का हिस्सा रहे 2,400 बच्चों के डेटा का इस्तेमाल किया. 2009 और 2012 के बीच जन्मे बच्चे और हजारों कनाडाई मां के स्वास्थ्य का पता लगाया गया था.
शोधकर्ता जानना चाहते थे कि जिंदगी का शुरुआती अनुभव कैसे स्वास्थ्य और विकास को आकार देता है. 98 फीसद को किसी हद तक ब्रेस्टफीडिंग कराया गया. रिसर्च में शामिल मात्र 2 फीसद बच्चों को बिल्कुल ब्रेस्टफीडिंग नहीं कराया गया. ब्रेस्टफीडिंग करनेवाले बच्चों में 78 फीसद को छह महीने या ज्यादा और 62 फीसद को कम से कम तीन महीने एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग कराया गया.
एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग का मतलब सिर्फ छाती का दूध, जन्म के समय से ठोस पदार्थ या दूसरे तरल पदार्थ को छोड़कर. शोधकर्ताओं का कहना है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्य नीति बनानेवालों को चाहिए कि ब्रेस्टफीडिंग के बारे में मां को शिक्षित करने का महत्व समझें.
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Source: IOCL
























