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भारत का रुपया तो गिर रहा लेकिन चीन के युआन का क्या हाल, जानें डॉलर के मुकाबले कहां?

ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी डॉलर के सामने जहां रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, वहीं चीन का युआन मजबूती के साथ तीन साल के उच्चतम स्तर पर है. आइए जानें कि चीन खुद को इतना मजबूत कैसे बना रहा है.

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  • चीन डॉलर को चुनौती देने के लिए युआन को मजबूत कर रहा है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जिसका सीधा असर एशियाई देशों की करेंसी पर पड़ रहा है. एक तरफ जहां भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार गोते लगाते हुए अपने रिकॉर्ड निचले स्तर की तरफ बढ़ रहा है, वहीं पड़ोसी देश चीन की मुद्रा युआन बिल्कुल अलग राह पर है. डॉलर की आंधी के बीच भी चीनी युआन मजबूती के साथ इतिहास रच रहा है. इस विपरीत स्थिति ने दुनिया भर के आर्थिक जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है कि आखिर भारत और चीन की मुद्राओं में इतना बड़ा अंतर क्यों दिख रहा है.

भारतीय रुपये की ऐतिहासिक गिरावट 

वैश्विक बाजार के दबाव के चलते भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है और अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. रुपये की इस तेज गिरावट को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अब कई कड़े और बड़े कदम उठाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बाजार में डॉलर की कमी को पूरा करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने, करेंसी स्वैप के दायरे को बढ़ाने और विदेशी निवेशकों के जरिए भारी मात्रा में डॉलर जुटाने जैसे रणनीतिक विकल्पों पर काम कर रहा है ताकि रुपये की साख को बचाया जा सके.

डॉलर के सामने चीनी युआन की दहाड़

रुपये के पूरी तरह विपरीत चलते हुए चीन की करेंसी युआन इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने पिछले 3 साल के सबसे उच्चतम स्तर पर कारोबार कर रही है. अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चीन के युआन यानी रेनमिनबी की विनिमय दर इस समय लगभग 6.84 से 6.86 युआन प्रति अमेरिकी डॉलर के मजबूत स्तर पर टिकी हुई है. इसका सीधा मतलब यह है कि वर्तमान में महज 1 चीनी युआन की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 0.14 अमेरिकी डॉलर के बराबर बैठती है, जो उसकी आर्थिक स्थिरता को दर्शाती है.

यह भी पढ़ें: Taiwan China US Conflict : ताइवान को लेकर चीन और अमेरिका में क्यों हैं मतभेद, इससे इन दोनों देशों को क्या फायदा?

डॉलर और युआन के बीच विनिमय दर

वैश्विक करेंसी बाजार के ताजा आंकड़ों को देखें तो वर्तमान में 1 अमेरिकी डॉलर हासिल करने के लिए लगभग 6.80 से 6.90 चीनी युआन की ही जरूरत पड़ती है. अगर हाल के महीनों से इसकी तुलना की जाए तो युआन ने डॉलर के मुकाबले अपनी स्थिति में बहुत बड़ा सुधार किया है. इससे पहले के समय में यह विनिमय दर 7 युआन प्रति डॉलर के पार बनी हुई थी. इस तरह युआन ने मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करते हुए खुद को अमेरिकी डॉलर के सामने एक बेहद मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर लिया है.

भारतीय मुद्रा के मुकाबले चीनी युआन की कीमत

अगर चीनी युआन की ताकत का अंदाजा भारतीय रुपये के नजरिए से लगाया जाए, तो दोनों के बीच का अंतर काफी बड़ा नजर आता है. मौजूदा विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के अनुसार, यदि आप चीनी युआन की तुलना सीधे भारतीय रुपये से करते हैं, तो भारत के बाजार में 1 चीनी युआन की कीमत लगभग 14.15 रुपये के स्तर पर पहुंच जाती है. युआन का रुपये के मुकाबले इतना महंगा होना यह साफ दिखाता है कि चीन की अर्थव्यवस्था और उसका मुद्रा प्रबंधन इस वैश्विक संकट में भारत से बेहतर स्थिति में है.

वैश्विक व्यापार से अमेरिकी डॉलर को हटाने की मुहिम

चीनी युआन की इस अप्रत्याशित मजबूती के पीछे सिर्फ बाजार के नियम नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे चीन सरकार की एक बहुत बड़ी आर्थिक रणनीति काम कर रही है. चीन की कम्युनिस्ट सरकार और वहां का केंद्रीय बैंक यानी 'पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना' मिलकर एक खास योजना पर काम कर रहे हैं. चीन का मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मंच से अमेरिकी डॉलर के एकछत्र वर्चस्व को पूरी तरह खत्म करना या उसे सीधी चुनौती देना है, जिसे आर्थिक दुनिया में डि-डॉलरीकरण की मुहिम कहा जाता है.

स्मार्टनेस से खुद को मजबूत कर रहा चीन

चीन अपने पास मौजूद दुनिया के सबसे विशाल और मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल बेहद आक्रामक तरीके से कर रहा है. वह इस भारी-भरकम पूंजी के दम पर दुनिया भर के विकासशील और विकसित देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में डॉलर के बजाय सीधे युआन में लेनदेन करने को बढ़ावा दे रहा है. चीन की कोशिश है कि युआन को दुनिया की सबसे भरोसेमंद और प्रमुख आरक्षित मुद्रा (रिजर्व करेंसी) के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर अमेरिकी नियंत्रण को कमजोर किया जा सके.

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About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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