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मौसम विभाग बारिश में रेड,ऑरेंज,येलो अलर्ट ही क्यों जारी करता है, ब्लू या ब्लैक क्यों नहीं?

मौसम विभाग मौसम को लेकर जब कोई अलर्ट जारी करता है तो वो चार रंग के कोड का उपयोग करता है जिसके माध्यम से लोगों को पता चल पाता है कि कब ज्यादा खतरा है, कब मौसम ठीक है. चलिए जानते हैं इसका कारण.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) बारिश, तूफान या अन्य मौसमी घटनाओं के लिए अलग-अलग अलर्ट जारी करता है. जिसमें रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट प्रमुख हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि मौसम विभाग नीले या काले रंग के अलर्ट क्यों नहीं जारी करता? आइए, इस रंग-आधारित प्रणाली के पीछे के विज्ञान, तर्क और उद्देश्य को समझते हैं.

क्यों जारी होता है अलर्ट

मौसम विभाग की अलर्ट प्रणाली का मुख्य उद्देश्य जनता, प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को मौसम की गंभीरता और संभावित खतरों के बारे में स्पष्ट जानकारी देना है. जिससे अगर मौसम खराब होता है तो लोग उसके लिए तैयार रहें. रंगों का चयन इस तरह किया गया है कि वे समझने में आसान हों. रेड, ऑरेंज और येलो रंग ट्रैफिक सिग्नल की तरह ही कार्य करते हैं, जो लोगों को तुरंत खतरे की गंभीरता समझने में मदद करते हैं.

रेड अलर्ट

यह सबसे गंभीर चेतावनी है जो अत्यधिक भारी बारिश, तूफान या जीवन और संपत्ति के लिए गंभीर खतरे का संकेत देता है. रेड अलर्ट का मतलब है कि स्थिति अत्यंत खतरनाक है और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है. उदाहरण के तौर पर 100 मिमी से अधिक बारिश की संभावना होने पर रेड अलर्ट जारी किया जाता है.

ऑरेंज अलर्ट

यह मध्यम स्तर की चेतावनी है, जो गंभीर लेकिन रेड अलर्ट जितनी खतरनाक नहीं होती. यह अलर्ट प्रशासन और लोगों को तैयार रहने की सलाह देता है. इसका मतलब होता है कि मौसम ज्यादा बिगड़ सकता है जैसे तेज बारिश, तूफान या बिजली गिरने की आशंका. इस स्थिति में लोगों को घरों में रहने की सलाह दी जाती है.

येलो अलर्ट

यह अलर्ट जागरूकता बढ़ाने के लिए होता है, जैसे कि हल्की से मध्यम बारिश की स्थिति में मौसम विभाग येलो अलर्ट जारी करता है. 

ग्रीन अलर्ट

ग्रीन अलर्ट तब जारी किया जाता है जब हल्की से मध्यम बारिश की संभावना होती है. इसमें कोई चेतावनी नहीं होती और किसी प्रकार के घबराने की जरूरत नहीं होती है.

नीला या काला अलर्ट क्यों नहीं?

मौसम विभाग की प्रणाली में नीला या काला अलर्ट शामिल नहीं है, क्योंकि रंगों का चयन मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक आधार पर किया गया है. नीला रंग आमतौर पर शांति और ठंडक का प्रतीक माना जाता है, जो खतरे की स्थिति को दर्शाने के लिए सही नहीं है. यह लोगों में भ्रम पैदा कर सकता है. वहीं, काला रंग शोक, मृत्यु या पूर्ण विनाश से जुड़ा होता है. काला रंग उपयोग करने से अनावश्यक रूप से दहशत फैल सकती है. जिसके ये रंग नहीं चुने जाते हैं. 

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About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

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