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क्रूड ऑयल से कितना अलग होता है ब्रेंट क्रूड ऑयल, इससे कैसे तय होती है तेल की कीमत?

दुनिया भर में तेल के व्यापार को समझने के लिए ब्रेंट क्रूड को जानना सबसे जरूरी है. यह न केवल अपनी शुद्धता और कम सल्फर के कारण लाइट और स्वीट कहलाता है. आइए जानें कि इसकी कीमत कैसे तय होती है.

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  • विश्व के 80% तेल व्यापार की कीमतें ब्रेंट क्रूड के आधार पर तय होते हैं.

जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ती हैं, तो टीवी और अखबारों में 'ब्रेंट क्रूड' शब्द सबसे ज्यादा सुनाई देता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह साधारण कच्चे तेल से अलग कैसे है और क्यों दुनिया भर के तेल की कीमतें इसी के इशारे पर नाचती हैं? असल में ब्रेंट क्रूड तेल की दुनिया का वह पैमाना है, जिसे सबसे शुद्ध और कीमती माना जाता है. भारत जैसे देश जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करते हैं, उनके लिए ब्रेंट क्रूड की एक-एक डॉलर की बढ़त सीधे आम आदमी की जेब पर असर डालती है.

क्या है ब्रेंट क्रूड और यह आम तेल से अलग क्यों है?

कच्चा तेल या क्रूड ऑयल असल में जमीन के नीचे से निकलने वाला एक प्राकृतिक मिश्रण है, लेकिन हर जगह निकलने वाला तेल एक जैसा नहीं होता है. ब्रेंट क्रूड को इसकी गुणवत्ता के कारण 'लाइट' और 'स्वीट' कहा जाता है. यहां 'लाइट' का मतलब है कि इसका घनत्व कम है, जिससे इसे रिफाइन करना बहुत आसान होता है. वहीं 'स्वीट' का अर्थ है कि इसमें सल्फर की मात्रा बहुत कम (0.5% से भी कम) होती है. कम सल्फर होने के कारण इससे बना पेट्रोल और डीजल पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हैं. यही वजह है कि इसे सामान्य या भारी कच्चे तेल के मुकाबले ज्यादा पसंद किया जाता है. 

उत्तरी सागर से निकलता है दुनिया का यह सबसे खास तेल

ब्रेंट क्रूड मुख्य रूप से उत्तरी सागर (North Sea) के पांच अलग-अलग तेल क्षेत्रों के मिश्रण से बनता है, जो ब्रिटेन और नॉर्वे के समुद्री इलाके के पास स्थित हैं. चूंकि यह तेल समुद्र के बीच से निकाला जाता है, इसलिए इसकी लोडिंग और परिवहन बहुत आसान और सीधा होता है. पाइपलाइनों के बजाय इसे सीधे बड़े जहाजों में भरकर दुनिया के किसी भी कोने में भेजा जा सकता है. परिवहन की यह सुगमता भी इसे वैश्विक बाजार में एक पसंदीदा विकल्प और अंतरराष्ट्रीय मानक यानी बेंचमार्क बनाती है.

कैसे तय होती है 80% तेल की कीमत?

दुनिया में होने वाले कुल तेल व्यापार के लगभग 80 प्रतिशत अनुबंधों (Contracts) की कीमतें ब्रेंट क्रूड के आधार पर ही तय होती हैं. यह यूरोप, अफ्रीका और मध्य-पूर्व (Middle East) के देशों के लिए मुख्य मूल्य मानक है. इसका व्यापार लंदन के इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर किया जाता है. आसान शब्दों में कहें तो जैसे सोने की शुद्धता के लिए 24 कैरेट का पैमाना होता है, वैसे ही दुनिया भर की रिफाइनरियां ब्रेंट क्रूड की कीमतों को आधार मानकर ही दूसरे तेलों के दाम तय करती हैं.

कीमतों के बढ़ने और घटने के पीछे का असली गणित

ब्रेंट क्रूड की कीमत केवल तेल की मात्रा पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसके पीछे मांग और आपूर्ति का बड़ा खेल होता है. अगर दुनिया में तेल की मांग बढ़ जाए और उत्पादन कम हो, तो कीमतें आसमान छूने लगती हैं. इसके अलावा ओपेक (OPEC) देशों की नीतियां भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती हैं. यदि ओपेक देश उत्पादन में कटौती का फैसला करते हैं, तो बाजार में तेल कम हो जाता है और ब्रेंट के दाम बढ़ जाते हैं. अंतरराष्ट्रीय राजनीति और युद्ध की स्थिति भी कीमतों को तुरंत प्रभावित करती है क्योंकि सप्लाई रुकने का डर बढ़ जाता है.

डॉलर की मजबूती और वायदा बाजार का असर

तेल की कीमतों का एक दिलचस्प कनेक्शन अमेरिकी डॉलर से भी है. चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का सारा कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए जब डॉलर मजबूत होता है, तो तेल खरीदना महंगा हो जाता है. इसके अलावा वायदा बाजार (Futures Market) भी कीमतों को तय करने में अहम है. यहां व्यापारी आज की स्थिति को देखकर भविष्य में होने वाली सप्लाई और मांग का अंदाजा लगाते हैं और उस आधार पर सौदे करते हैं. इसी सट्टेबाजी और अनुमान के कारण बाजार में तेल की कीमतें रोज ऊपर-नीचे होती रहती हैं.

भारत के लिए ब्रेंट क्रूड क्यों है सबसे महत्वपूर्ण?

भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है. हालांकि भारत रूस और अमेरिका जैसे देशों से भी तेल खरीदता है, लेकिन भारतीय तेल कंपनियों के लिए 'ब्रेंट क्रूड' ही सबसे बड़ा बेंचमार्क बना रहता है. जब ब्रेंट की कीमत बढ़ती है, तो भारतीय तेल कंपनियों की लागत बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर देश में पेट्रोल और डीजल के दाम पर पड़ता है. इसलिए खाड़ी देशों में जब भी तनाव होता है, तो भारत की नजरें ब्रेंट क्रूड के चार्ट पर टिक जाती हैं क्योंकि यही हमारे घरेलू बाजार की दिशा तय करता है.

यह भी पढ़ें: जब भारत में भी हैं तेल के कुएं तो विदेश से क्यों मंगाता है क्रूड ऑयल, क्या है जरूरत?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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