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हर महीने कितने रुपये कमाती थी निक्की? खुद ही जान लें हकीकत

निक्की हत्याकांड में नए खुलासे हुए. निक्की और उसकी बहन ब्यूटी पार्लर से हर महीने एक लाख रुपये तक कमाती. पिता का आरोप है कि बेरोजगार पति उसकी कमाई हड़प लेता और ससुराल वाले भी पैसों की डिमांड करते थे.

दिल्ली से सटे नोएडा का बहुचर्चित निक्की हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है. इस केस में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं. अब निक्की के पिता भिखारी सिंह ने अपनी बेटी की कमाई, पति की बेरोजगारी और ससुराल वालों की मांगों को लेकर बड़ा बयान दिया है. 

मेहनत से बनाया करियर 

निक्की और उसकी बहन कंचन ब्यूटी पार्लर चलाती थी. शुरुआत में ससुराल वाले खुश थे लेकिन जैसे ही बेटियों को सोशल मीडिया पर पहचान मिलने लगी और उनका काम बढ़ने लगा, रिश्तो में कड़वाहट आ गई. निक्की के पिता ने बताया कि दोनों बहनें हर महीने तकरीबन एक लाख तक काम लेती थी. बुकिंग्स भी वे इंस्टाग्राम से ही लेती थीं. दावा किया जा रहा है कि यही सफलता निक्की के लिए परेशानी का कारण बन गई. 

बेरोजगार पति पर आरोप 

पिता के अनुसार निक्की का पति विपिन भाटी बेरोजगार था और शराब का आदी था. घर चलाने के लिए वह निक्की की कमाई पर निर्भर था. आरोप है कि विपिन हर महीने 50 हजार की डिमांड करता और उसकी पूरी कमाई अपने पास रख लेता. इतना ही नहीं जब निक्की ने काम जारी रखा तो उसने पार्लर बंद करवा दिया. इसके बाद निक्की घर से ही काम करती रही. 

ससुराल में हिंसा और लालच

निक्की के पिता का कहना है कि सिर्फ निक्की ही नहीं, बल्कि बड़ी बेटी कंचन को भी ससुराल में प्रताड़ित किया गया. कंचन जब देवर का विरोध करती थी तो उसका पति रोहित भी उससे मारपीट करता था. आरोप है कि उनकी सास भी दोनों बहनों को पीटती थी और आए दिन पैसों की मांग करती थी. 

हत्या का गवाह, निक्की का बेटा 

सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि निक्की की मौत का गवाह उसका छोटा बेटा है. मासूम बच्चे ने बताया था कि पिता ने मां को पीटा फिर उनके ऊपर कुछ डालकर आग लगा दी. इस घटना के बाद बच्चे और कंचन को मायके के लाया गया था. 

पुलिस की कार्रवाई 

21 अगस्त को निक्की गंभीर हालत में जली हुई मिली थी और इलाज के लिए दिल्ली ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई. इसी मामले में पुलिस ने पति विपिन, ससुर, सास और देवर रोहित को गिरफ्तार कर लिया है. 24 अगस्त को हिरासत से भागने की कोशिश में पुलिस ने विपिन के पैर में गोली भी मारी थी.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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