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विधानसभा चुनाव 2026

(Source:  Matrize | *Exit polls are projections; official results on May 4, 2026)

552 लोकसभा सीटें लेकिन चुनाव केवल 543 पर! जान लीजिए इसके पीछे का सच

भारतीय संविधान के अनुसार लोकसभा में अधिकतम 552 सीटें हो सकती हैं, लेकिन चुनाव केवल 543 सीटों पर ही क्यों होते हैं? चलिए जानते हैं इसके पीछे क्या कारण है ऐसा क्यों होता है.

हमारे देश में जिस तरह अलग अलग चीजों को लेकर कानून है उसी तरह लोकसभा सीटों के बंटवारे लेकर भी कुछ नियम बना है. जिस राज्य की जितनी ज्यादा जनसंख्या होती है उसको उतनी ज्यादा सीटें मिलती हैं. भारतीय संविधान के अनुसार लोकसभा में अधिकतम 552 सीटें हो सकती हैं, लेकिन चुनाव केवल 543 सीटों पर ही क्यों होते हैं? पिछले कुछ सालों में नए राज्य और यहां तक कि केंद्र शासित प्रदेश भी बने हैं तो लेकिन फिर भी लोकसभा में केवल 543 सीटें है ऐसा क्यों आइए इसके पीछे का सच जानते हैं.

लोकसभा में अधिकतम कितने सदस्य हो सकते हैं?

भारत का लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकसभा इसका निचला सदन है. जो देश की जनता का प्रतिनिधित्व करता है. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 81 के अनुसार, लोकसभा में अधिकतम 552 सदस्य हो सकते हैं. इनमें से 530 सीटें राज्यों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि 20 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्धारित हैं. इसके अलावा दो सीटें एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए नामांकन द्वारा भरी जा सकती थीं.

चुनाव सिर्फ 543 सीटों पर ही क्यों?

लेकिन, अब सवाल यह है कि अगर संविधान में 552 सीटों का प्रावधान है, तो फिर 543 सीटों पर ही क्यों रुका गया? तो आपको बता दें 1952 में पहली लोकसभा में 497 सीटें थीं. जैसे-जैसे नए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश बने सीटों की संख्या बढ़ी. 1956 में संविधान संशोधन के बाद केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 20 सीटें जोड़ी गईं. जिससे अधिकतम सीमा 520 हो गई. फिर, 1976 तक सीटें बढ़कर 545 हो गईं, जिसमें 543 निर्वाचित और 2 नामांकित (एंग्लो-इंडियन) सीटें शामिल थीं.

सीटें बढ़ने की संभावना

1976 में परिसीमन पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी, जो 2001 तक लागू रही. 91वें संवैधानिक संशोधन के तहत यह रोक 2026 तक बढ़ा ली गई. इसका मतलब है कि 2026 तक लोकसभा की सीटें 543 ही रहेंगी. लेकिन, 2026 के परिसीमन के बाद संभावना है कि लोकसभा के सीटों की संख्या बढ़ सकती है. बता दें कि लोकसभा की सीटों की संख्या को जनसंख्या के आधार पर समायोजित करने की प्रक्रिया को परिसीमन कहते हैं. इतना ही नहीं माना जा रहा है कि 2029 में लोकसभा चुनाव परिसीमन के बाद 543 की बजाए साढ़ें सात सौ सीटों के लिए हो सकता है.

इसे भी पढ़ें- ये है भारत का सबसे जहरीला सांप! जंगल का राजा भी भरता है इसके आगे पानी

About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

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