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सऊदी अरब में होली पर किया यह काम तो हो जाती है जेल, 99% लोग नहीं जानते यह बात

सऊदी अरब में सार्वजनिक रूप से किसी भी गैर इस्लामी धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं है. गैर मुस्लिम समुदाय अपने धार्मिक कार्यक्रम निजी जगह या एंबेसी जैसे सीमित परिसरों में ही मना सकते हैं.

रंगों का त्योहार यानी होली आने ही वाला है. यह त्योहार हंसी-मजाक और आपसी मेलजोल का प्रतीक माना जाता है. कहते हैं कि होली पर दुश्मन भी दोस्त हो जाते हैं और पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक दूसरे को गले लगाते और रंग खेलते हैं. भारत में तो यह त्योहार सार्वजनिक तौर पर मनाया जाता है. लोग एक जगह इकट्ठा होते हैं और जमकर होली खेलते हैं, लेकिन दुनिया के कुछ देश ऐसे हैं, जहां सार्वजनिक तौर पर होली खेलना कानून के दायरे में आता है. 

इन देशों में एक नाम सऊदी अरब का है. जहां इस्लामिक कानूनों के मुताबिक, गैर इस्लामी त्योहारों को सार्वजनिक तौर पर मनाना कानूनी दायरे में आता है. ऐसा कुछ भी करने, जिससे लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हों, अपराध माना जाता है और सजा भी हो सकती है. ऐसे में इस देश में सार्वजनिक तौर पर होली खेलने पर भी मनाही है. बहुत से लोग यह बात नहीं जानते कि यहां सड़क पर रंग खेलने पर सजा भी हो सकती है. 

क्या होता है सार्वजनिक रूप से होली मनाने पर?

सऊदी अरब में सार्वजनिक तौर पर गैर इस्लामी धार्मिक आयोजन मनाने की अनुमति नहीं है. गैर मुस्लिम समुदाय के लोग अपने धार्मिक आयोजन किसी निजी जगह या एंबेसी में कर सकते हैं. यहां खुले में रंग फेंकना, जुलूस निकालना या फिर धार्मिक प्रतीकों का प्रदर्शन करना अपराध है. ऐसा करने पर धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और आपको हिरासत में भी लिया जा सकता है. 

होली खेलने पर हो सकती है गिरफ्तारी

सऊदी अरब में अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक तौर पर रंग खेलता है या फिर धार्मिक आयोजन करता है तो उसे हिरासत में लिया जा सकता है. अगर मामला गंभीर है तो उसे जुर्माना या जेल भी हो सकते हैं. इतना ही नहीं अगर मामला ज्यादा गंभीर है तो ऐसे व्यक्ति का पासपोर्ट जब्त कर उसे अपने देश डिपोर्ट करने की भी कार्रवाई की जा सकती है. यहां सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ना, धर्म या शासक परिवार के खिलाफ टिप्पणी करना भी कानून के खिलाफ माना जाता है. 

क्या कहता है सऊदी अरब का कानून?

सऊदी अरब की कानूनी व्यवस्था सरिया लॉ के हिसाब से चलती है. यहां गैर मुस्लिम धर्म का सार्वजनिक प्रचार या प्रदर्शन मान्य नहीं है. सर्वजनिक जगह पर सादगी से कपड़े पहनने से लेकर निजी व्यवहार तक के लिए स्पष्ट नियम बने हुए है. शराब, नशे और कई दूसरे सामाजिक मामलों में भी यहां कानून बहुत कड़े माने जाते हैं.

कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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