अब तक कितनी जंग लड़ चुका है USS अब्राहम लिंकन, जानें इसकी ताकत
USS Abraham Lincoln: यूएसएस अब्राहम लिंकन पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या है इस युद्ध पोत की ताकत.

- वर्तमान में यूएसएस लिंकन भोजन, प्लंबिंग चुनौतियों से जूझ रहा।
- खाड़ी युद्ध, अफगानिस्तान जैसे सैन्य अभियानों में शामिल रहा।
- मानवीय मिशन किए, शक्तिशाली परमाणु-चालित एयरबेस भी।
USS Abraham Lincoln: यूएसएस अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना के सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर में से एक है. कई दशकों की अपनी सर्विस के दौरान न्यूक्लियर पावर से चलने वाले इस कैरियर ने खाड़ी क्षेत्र, अफगानिस्तान और इराक में बड़े मिलिट्री ऑपरेशन में हिस्सा लिया है. मिडिल लिस्ट में बढ़ते तनाव और समुद्र में लंबे समय तक तेरा रहने की वजह से यह कैरियर एक बार फिर से चर्चा में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएसएस अब्राहम लिंकन पर स्थिति लगातार खराब हो रही है. यहां से अब खाने की कमी, प्लंबिंग की समस्या और मानसिक थकान की शिकायतें आ रही हैं. इसी बीच आइए जानते हैं कि क्या चीज इस युद्धपोत को कितना खतरनाक बनाती है.
खाड़ी क्षेत्र में युद्ध
यूएसएस अब्राहम लिंकन के युद्ध इतिहास में 1990-91 का खड़ी युद्ध शामिल है. उस वक्त इसने इराक के खिलाफ ऑपरेशन में हिस्सा लिया था. ऑपरेशन डेजर्ट शील्ड के दौरान यह कैरियर उस इलाके में अमेरिकी सेना को इकट्ठा करने और तैनात करने में शामिल था. इसके बाद इसने ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म में हिस्सा लिया. यह इराक द्वारा कुवैत पर कब्जा करने के बाद इराकी सेना के खिलाफ शुरू किया गया एक मिलिट्री कैंपेन था. इस कैरियर के एयरक्राफ्ट ने बड़े गठबंधन कैंपेन के हिस्से के तौर पर हवाई ताकत मुहैया कराई. इससे यह उस इलाके में अमेरिकी नौसेना के ऑपरेशन का एक जरूरी हिस्सा बन गया.

ऑपरेशन सदर्न वॉच
खाड़ी युद्ध के बाद यूएसएस अब्राहम लिंकन ऑपरेशन सदर्न वॉच में भी हिस्सा लिया. यह अमेरिका के नेतृत्व वाला एक मिशन था और इराक के कुछ हिस्सों में नो फ्लाइंग जोन लागू करता था. इसका मकसद इराकी सेना को नो फ्लाई पाबंदी वाले इलाकों में कुछ खास मिलिट्री ऑपरेशन करने से रोकना था. कैरियर के एयरक्राफ्ट ने हवाई दबदबा बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर निगरानी और हमले वाले मिशन को अंजाम देने में मदद की.
अफगानिस्तान युद्ध
11 सितंबर 2001 के हमले के बाद यूएसएस अब्राहम लिंकन अफगानिस्तान में अमेरिकी मिलिट्री कैंपेन का हिस्सा बन गया. ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम के तहत करियर से उड़ान भरने वाले एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल तालिबान और अल-कायदा के ठिकानों के खिलाफ मिशन में किया गया. इससे एयरक्राफ्ट कैरियर के सबसे बड़े रणनीतिक फायदों में से एक का पता चला. पारंपरिक जमीनी बेस की जरूरत के बिना संघर्ष वाले इलाके के करीब एक बड़ा एयर बेस लाने की क्षमता.

2026 में मिडिल ईस्ट में तैनाती
रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव की वजह से अब्राहम लिंकन को इंडो पेसिफिक से खाड़ी क्षेत्र में फिर से तैनात किया गया. इसकी बताई गई भूमिका में मिसाइल और ड्रोन खतरों से अमेरिका सेना और सहयोगी संपत्तियों की रक्षा करना शामिल था.
मानवीय मिशन में योगदान
यूएसएस अब्राहम लिंकन का इतिहास सिर्फ लड़ाई तक ही सीमित नहीं है. इसने फिलीपींस में 1991 में हुए ज्वालामुखी विस्फोट के बाद ऑपरेशन फायरी विजिल में मौजूदगी दी और आपदा से प्रभावित लोगों को निकालने में मदद की. इसने 2004 में हिंद महासागर में आई सुनामी के बाद मानवीय राहत कार्यों में भी अपना योगदान दिया. इससे यह पता चला कि एयरक्राफ्ट कैरियर का इस्तेमाल ट्रांसपोर्टेशन, मेडिकल सहायता और आपदा के समय मदद के लिए मोबाइल प्लेटफार्म के तौर पर कैसे किया जा सकता है.
क्या है यूएसएस अब्राहम लिंकन की ताकत?
यूएसएस अब्राहम लिंकन परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर की Nimitz Class का हिस्सा है. इसकी सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह एक ही जहाज में विशाल एयरबेस, कमांड सेंटर और रक्षात्मक प्लेटफार्म को एक साथ लाता है.
परमाणु ऊर्जा
यह कैरियर दो परमाणु रिएक्टरों से चलता है. इससे यह आगे बढ़ने के लिए पारंपरिक ईंधन की जरूरत के बिना काफी लंबे समय तक काम कर सकता है.
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एक तैरता हुआ एयरबेस
लगभग 1092 फीट लंबा और एक लाख टन से ज्यादा वजन वाला यह कैरियर असल में शहर के आकार का एक मिलिट्री प्लेटफार्म है. इसके फ्लाइट डेक पर फाइटर जेट, हेलीकॉप्टर और दूसरे विमानों वाला एक बड़ा एयर विंग तैनात किया जा सकता है. इसके विमान में F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट और F-35C लाइटनिंग II फाइटर जेट शामिल हैं.
हजारों कर्मचारी
तैनाती के दौरान कैरियर और उसके एयर विंग के साथ लगभग 5000 कर्मचारी जुड़े हो सकते हैं. वे विमान उड़ाने, जहाज और हथियारों के सिस्टम का रखरखाव करने, रिएक्टर चलाने और कैरियर के जटिल लॉजिस्टिक्स और कमांड कार्य को संभालने के लिए जिम्मेदार होते हैं.
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