अचानक से मौसम में कैसे आया बदलाव, क्या है इतनी ज्यादा बारिश की वजह?
Monsoon Withdrawal: उत्तर भारत में अचानक मौसम बदल गया है. मौसम विभाग ने बारिश की चेतावनी दी है. इसी बीच आइए जानते हैं कि अचानक यह मौसम क्यों बदला. जानें क्या है इसके पीछे की वजह.

- मानसून वापसी के बावजूद बंगाल की खाड़ी प्रणाली से देश में तीव्र वर्षा।
- पश्चिमी विक्षोभ संग मिलकर प्रणाली ने उत्तर भारत में भारी बारिश बढ़ाई।
- उत्तर प्रदेश सहित बीस से अधिक राज्यों को मौसम अलर्ट जारी किए गए।
- स्कूल बंद, जलभराव और भूस्खलन का खतरा, जनजीवन बुरी तरह प्रभावित।
Monsoon Withdrawal: दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत में अपनी वापसी के चरण के करीब है. लेकिन धीरे-धीरे शुष्क मौसम की तरफ बढ़ने के बजाय देश के कई हिस्सों में तीव्र वर्षा, तूफान और तेज हवाएं चल रही हैं. बंगाल की खाड़ी के ऊपर विकसित हो रही एक मौसम प्रणाली ने वातावरण में ताजा नमी ला दी है. इससे कई राज्यों में भारी से काफी ज्यादा भारी वर्षा हो रही है.
आने वाले दिनों के लिए 20 से ज्यादा राज्यों को मौसम अलर्ट मिल चुके हैं. इसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली एनसीआर, हिमाचल प्रदेश और कई मध्य और पूर्वी राज्य प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं.
उत्तर प्रदेश में क्यों हो रही है भारी बारिश?
उत्तर प्रदेश में मूसलाधार और काफी ज्यादा भारी बारिश हुई है. इससे कई जिलों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. लखनऊ, बांदा और बहराइच समेत कई जगहों पर 12वीं तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं. जलभराव और संभावित बाढ़ की चेतावनी के साथ रेड अलर्ट भी जारी किया गया है. यह बारिश बंगाल की खाड़ी से अंतर्देशीय दिशा में आने वाली मौसम प्रणाली द्वारा वातावरण में बढ़ी हुई नमी से जुड़ी हुई है.
उत्तराखंड को भारी से काफी ज्यादा भारी बारिश के लिए अलर्ट पर रखा गया है. राज्य के पहाड़ी इलाके की वजह से तीव्र वर्ष से भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है. हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और पूर्वी राजस्थान में भी भारी बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाओं की चेतावनी मिली है.

डिप्रेशन मध्य और पूर्वी भारत में बारिश लाता है
डिप्रेशन के सीधे प्रभाव की वजह से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भारी बारिश हुई है. छत्तीसगढ़ में मौसम की स्थिति की वजह से स्कूल भी बंद करने पड़े. इसी सिस्टम के प्रभाव से ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में काफी ज्यादा बारिश हुई है. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जैसे क्षेत्रों में भी भूस्खलन की सूचना मिली है.
इस बीच बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मध्यम से भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी मिली है. असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में भी बारिश की उम्मीद है.
बंगाल की खाड़ी प्रणाली कैसे बनी?
अचानक हुए बदलाव के पीछे मुख्य वजह बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक डिप्रेशन या फिर निम्न दबाव प्रणाली का विकसित होना है. यह सिस्टम ओडिशा और छत्तीसगढ़ से होते हुए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की तरफ बढ़ गया.
मौसम वैज्ञानिकों ने इस प्रणाली की तुलना एक चलते हुए नल से की है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह लगातार बंगाल की खाड़ी से नमी को वायुमंडल में खींचता है. यह नमी बारिश वाले बादलों को रिचार्ज करने में मदद करती है. इससे वह लंबे समय तक और तीव्र बारिश पैदा कर सकते हैं.

पश्चिमी विक्षोभ बने बढ़ाई स्थिति
इसी समय उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों और मध्य क्षोभमंडल पर एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है. इस सिस्टम से जुड़ी ठंडी हवाएं पूर्व की तरफ बढ़ रही हैं. जब बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवाएं उत्तर पश्चिम से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ से मिलती है तो दोनों प्रणालियां लगातार काम करती हैं. इस अभिसरण ने उत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश, तूफान और बिजली गिरने को बढ़ावा दिया.
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मानसून की वापसी क्यों रुक गई?
हालांकि दक्षिण पश्चिम मानसून पहले ही उत्तर पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों से वापस जाना शुरू कर चुका था लेकिन बंगाल की खाड़ी प्रणाली द्वारा आपूर्ति की गई ताजा नमी ने वायुमंडलीय नमी को एक बार फिर से बढ़ावा दिया.
यही वजह है कि लगभग एक हफ्ते के लिए मानसून की आगे की वापसी अस्थायी रूप से धीमी हो गई है. यह बताता है कि जिन क्षेत्रों में मानसून के बाद की स्थिति का अनुभव होना शुरू हो गया था वहां अचानक व्यापक बारिश, तूफान और ठंडी हवाएं क्यों देखी जा रही हैं.
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