समुद्र की तरफ ही क्यों झुके होते हैं नारियल के पेड़, खारे पानी और रेतीली मिट्टी से क्या नाता?
दक्षिण भारत के राज्यों में अगर आप समुद्र तट पर जाएं तो नारियल के पेड़ सबसे ज्यादा नजर आते हैं. ये पेड़ समंदर की तरफ झुके हुए दिखाई पड़ते हैं. चलिए जानते हैं कि आखिर ऐसा किस वजह से होता है.

नारियल पानी तो सभी ने पिया होगा. इसके पानी की मिठास और नारियल के अंदर से निकलने वाली इसकी गिरी भी लोगों को खूब पसंद आती है और गर्मियों में राहत देती है. नारियल ज्यादातर दक्षिण भारत राज्यों में पाया जाता है. यहां पर समंदर किनारे रेत पर जब आप टहलने जाएं तो आपको दूर तक फैले नारियल के पेड़ बड़ा सुकून देते हैं. लेकिन अगर आपने ध्यान दिया हो तो ये पेड़ हमेशा ही समंदर की तरफ झुके नजर आते हैं. आखिर ऐसा क्यों होता है कि ये पेड़ शहरों के बीच या पहाड़ों पर नहीं निकते हैं और हमेशा अपनी गर्दन पानी की ओर झुकाए रहते हैं. चलिए इसका कारण जानते हैं.
समंदर की तरफ झुके होने का रहस्य
आमतौर पर ज्यादातर पेड़ तेज हवा चलने पर उसके विपरीत दिशा में झुक जाते हैं, लेकिन नारियल के पेड़ के साथ ऐसा बिल्कुल नहीं होता है. यह पेड़ हवा को रुख देने की बजाय सूरज की रोशनी की तरफ आकर्षित होता है, जिसे विज्ञान की भाषा में फोटोट्रॉपिज्म कहा जाता है. चूंकि समंदर के ऊपर का आसमान पूरी तरह से खुला और साफ होता है, इसलिए पेड़ों को सबसे ज्यादा हवा और धूप उसी दिशा से मिलती है. इसी भरपूर रोशनी को पाने के लिए नारियल के पेड़ समंदर की ओर झुकते चले जाते हैं. इसके अलावा ये पेड़ तटीय इलाकों में आने वाले चक्रवातों और तूफानों की मार झेलकर बाकी वनों के लिए सुरक्षा दीवार का काम करते हैं.
समुद्र के किनारे ही क्यों उगते हैं नारियल?
समुद्र के किनारे नारियल के पेड़ उगने की सबसे बड़ी और वैज्ञानिक वजह इसका फल और बीज है. नारियल का बाहरी खोल इतना कड़ा और हल्का होता है कि यह बिना पानी में डूबे हफ्तों तक तैर सकता है. जब कोई पका नारियल नीचे गिरता है, तो समुद्र की लहरें उसे अपने साथ बहाकर सैकड़ों किलोमीटर दूर ले जाती हैं. पानी के जरिए बीजों के इस तरह से फैलने और नए पौधे बनने के सफर को विज्ञान में हाइड्रोकोरी कहा जाता है. हैरान करने वाली बात यह है कि खारे पानी में महीनों तैरने के बाद भी नारियल के अंदर का बीज कभी नहीं सड़ता है और जैसे ही इसे नया किनारा मिलता है तो ये अंकुरित हो जाता है.
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सोलर पैनल का काम करती पत्तियां
नारियल के पौधे के विकास में समंदर किनारे मिलने वाली तेज धूप का बड़ा योगदान होता है. इस पेड़ की लंबी और फैली पत्तियां बिल्कुल एक प्राकृतिक सोलर पैनल का काम करती हैं. इन पत्तियों पर जितनी तेज धूप पड़ती है, पेड़ के अंदर भोजन बनने की प्रक्रिया उतनी ही तेज हो जाती है. शहरों की घनी आबादी या पहाड़ों की छांव में इन्हें इतनी खुली धूप नहीं मिल पाती है, इसीलिए ये पेड़ तटीय इलाके की रेतीली जमीन पर तेजी से बढ़ते हैं.
रेत और खारे पानी का नारियल से रिश्ता
नारियल के पेड़ों को पनपने के लिए किसी बहुत उपजाऊ या काली मिट्टी आदि कि जरूरत नहीं होती है. समंदर किनारे पाई जाने वाली रेत और खारा पानी इसके लिए सबसे उत्तम होता है. इस पेड़ की जड़ों की बनावट ऐसी होती है, जिससे पानी जमा न हो सके, बल्कि सिर्फ नमी बनी रहे. रेत की वजह से पानी तुरंत छनकर नीचे की तरफ चला जाता है, जिससे जड़ें सड़ती नहीं हैं और वे जमीन के अंदर से जरूरी नमी को सोख लेती हैं. इसके साथ ही समुद्र की लहरें अपने साथ जो खनिज और पोषक तत्व बहाकर किनारों पर लाती हैं, वे इस रेतीली मिट्टी को नारियल के लिए बेहद पौष्टिक बना देते हैं.
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