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Parachute in Airplane: हवाई जहाज में पैराशूट क्यों नहीं दिया जाता, क्या है इसके पीछे की वजह?

Parachute in Airplane: हवाई जहाज में यात्रियों के लिए पैराशूट क्यों नहीं रखा जाता. जानें प्लेन से कूदना क्यों खतरनाक है, हादसे के समय पैराशूट से ज्यादा सुरक्षित लैंडिंग को क्यों माना जाता है.

Why Planes Do Not Have Parachutes: जब भी हम हवाई जहाज में सफर करते हैं, तो सीट के पास लाइफ जैकेट तो दिखाई देती है, लेकिन पैराशूट कहीं नहीं होता. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि अगर प्लेन में कोई परेशानी हो जाए, तो यात्रियों को पैराशूट क्यों नहीं दिया जाता. आखिर लोग पैराशूट पहनकर नीचे क्यों नहीं कूद सकते. इसके पीछे कई आसान वजह हैं.

प्लेन से कूदना इतना आसान नहीं

फिल्मों में लोग प्लेन से आसानी से कूदते हुए दिखाई देते हैं, लेकिन असल जिंदगी में ऐसा करना बहुत मुश्किल और खतरनाक है. आम यात्री विमान करीब 30 हजार फीट या उससे भी ज्यादा ऊंचाई पर उड़ते हैं. इतनी ऊंचाई पर हवा बहुत कम होती है और ठंड भी बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में बिना खास ट्रेनिंग और ऑक्सीजन के कूदना बहुत खतरनाक हो सकता है.

प्लेन की रफ्तार भी करीब 800 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है. इतनी तेज रफ्तार में प्लेन का दरवाजा खोलकर बाहर कूदना आसान नहीं होता. प्लेन के दरवाजे भी इस तरह बनाए जाते हैं कि उड़ान के दौरान हवा के दबाव की वजह से उन्हें खोलना बहुत मुश्किल होता है.

इसके अलावा, आम लोगों को पैराशूट से कूदने की ट्रेनिंग नहीं होती. पैराशूट कब खोलना है, हवा में शरीर को किस तरह रखना है और जमीन पर सही तरीके से कैसे उतरना है, यह सब सीखना पड़ता है. बिना ट्रेनिंग के पैराशूट से कूदना जान बचाने के बजाय और बड़ा खतरा पैदा कर सकता है.

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उड़ान शुरू और खत्म होते समय होते हैं ज्यादातर हादसे

एक और बड़ी वजह यह है कि बहुत से विमान हादसे प्लेन के उड़ान भरने या जमीन पर उतरने के समय होते हैं. उस समय प्लेन जमीन के काफी पास होता है. ऐसे समय में पैराशूट का ज्यादा फायदा नहीं होगा, क्योंकि पैराशूट खोलने के लिए कुछ ऊंचाई और समय चाहिए. अगर प्लेन जमीन के पास है, तो यात्रियों के पास इतना समय नहीं होगा.

एक प्लेन में 150 से 300 तक यात्री हो सकते हैं. अगर किसी परेशानी के समय सभी यात्रियों को पैराशूट पहनकर एक-एक करके बाहर कूदना पड़े, तो इसमें बहुत समय लग जाएगा. हो सकता है कि कई यात्री कूद भी न पाएं. इसके मुकाबले प्लेन को जमीन पर सुरक्षित उतारना ज्यादा आसान और सुरक्षित तरीका होता है.

प्लेन को सुरक्षित उतारना ज्यादा बेहतर

आज के हवाई जहाज काफी सुरक्षित बनाए जाते हैं. अगर इंजन में कोई परेशानी हो जाए या प्लेन में कोई दूसरी खराबी आ जाए, तो पायलट कई बार प्लेन को पास के हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतार सकते हैं. पायलटों को ऐसी स्थिति से निपटने की ट्रेनिंग भी दी जाती है. इसलिए हर परेशानी में यात्रियों को प्लेन से बाहर कूदने की जरूरत नहीं पड़ती.

ज्यादा वजन और खर्च भी एक वजह

अगर हर यात्री के लिए अलग पैराशूट रखा जाए, तो प्लेन का वजन काफी बढ़ जाएगा. ज्यादा वजन होने पर प्लेन को उड़ाने के लिए ज्यादा ईंधन की जरूरत पड़ेगी. इससे सफर का खर्च भी बढ़ सकता है. इसके अलावा, इतने सारे पैराशूट खरीदना, उनकी जांच करना और उन्हें हमेशा सही हालत में रखना भी आसान नहीं होगा. इसमें काफी पैसा और समय लगेगा. इसके बजाय एयरलाइंस प्लेन की सुरक्षा, इंजन की जांच और पायलटों की ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान देती हैं. इन चीजों से यात्रियों को असल में ज्यादा सुरक्षित रखा जा सकता है.

इसलिए प्लेन में पैराशूट नहीं दिया जाता

यही वजह है कि हवाई जहाज में हर यात्री के लिए पैराशूट रखने के बजाय लाइफ जैकेट, ऑक्सीजन मास्क और सुरक्षित तरीके से प्लेन को जमीन पर उतारने की तैयारी रखी जाती है. किसी परेशानी के समय यात्रियों को प्लेन से कूदने के बजाय प्लेन को सुरक्षित तरीके से जमीन पर उतारना ज्यादा सही और सुरक्षित तरीका माना जाता है.

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