अल नीनो का नाम किसने रखा था अल नीनो, क्या है इसके पीछे की वजह?
अल नीनो नाम दक्षिण अमेरिका के तट पर रहने वाले मछुआरों ने रखा था. सदियों पहले पेरू और इक्वाडोर के मछुआरों ने देखा कि कुछ वर्षों में समुद्र का पानी अचानक नॉर्मल से ज्यादा गर्म हो जाता है.

दुनिया भर में मौसम को प्रभावित करने वाली घटनाएं होती रहती है. वहीं इन घटनाओं में आपने अल नीनो का नाम भी सुना होगा. खासकर जब भारत में मानसून कमजोर पड़ने या ज्यादा गर्म पड़ने की आशंका होती है, तब अल नीनो शब्द चर्चा में आ जाता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि अल नीनो नाम आखिर आया कहां से और इसका क्या मतलब है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि अल नीनो का नाम अल नीनो किसने रखा था और इसके पीछे क्या वजह है?
मछुआरों ने रखा था अल नीनो नाम
अल नीनो नाम दक्षिण अमेरिका के तट पर रहने वाले मछुआरों ने रखा था. सदियों पहले पेरू और इक्वाडोर के मछुआरों ने देखा कि कुछ वर्षों में समुद्र का पानी अचानक नॉर्मल से ज्यादा गर्म हो जाता है. इस बदलाव की वजह से मछलियों की संख्या कम हो जाती थी, जिससे उनके काम पर असर पड़ता था. यह घटना अक्सर दिसंबर के आसपास दिखाई देती थी. इसी कारण स्पेनिश भाषा में इस अल नीनो नाम दिया गया, जिसका मतलब द लिटिल बॉय यानी छोटा बच्चा होता है. इसे क्रिसमस चाइल्ड भी कहा गया, क्योंकि यह बदलाव क्रिसमस के समय के आसपास दिखाई देता था.
क्या है अल नीनो?
अल नीनो दरअसल प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से ज्यादा गर्म होने की स्थिति है. यह केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हवाओं में बारिश और तापमान के पैटर्न को बदलकर पूरी दुनिया के मौसम पर असर डालता है. इसका उल्टा चरण ला नीना कहलाता है. जिसमें समुद्र का पानी सामान्य से ठंडा हो जाता है. वहीं वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो कोई नियमित चक्र नहीं है, बल्कि यह 2 से 7 साल के अंतराल में कभी भी विकसित हो सकता है. इसकी तीव्रता भी हर बार अलग होती है, कभी यह हल्का तो कभी बहुत मजबूत होता है, जिसे सुपर अल नीनो भी कहा जाता है.
भारत और दुनिया पर अल नीनो का असर
अल नीनो का असर भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर देखने को मिलता है. दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया में सूखा और कई क्षेत्रों में तापमान में बढ़ोतरी पर इसका असर होता है. वहीं भारत में इसका सीधा असर मानसून पर पड़ता है. आमतौर पर अल नीनो के दौरान बारिश कम होती है, जिससे सूखे की स्थिति बन सकती है और खेती पर असर पड़ता है.
वैज्ञानिक कैसे करते हैं अल नीनो की निगरानी?
आज के समय में वैज्ञानिक समुद्र में लगाए गए बुआय, सैटेलाइट और कंप्यूटर मॉडल की मदद से अल नीनो की स्थिति पर नजर रखते हैं. समुद्र के तापमान, हवा की दिशा और दबाव में बदलाव के आधार पर अल नीनो के बनने और बढ़ने का अनुमान लगाया जाता है.
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Source: IOCL




























