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Parle Owner: बिस्किट बनाने वाली कंपनी पारले का कौन है मालिक, उसका किस धर्म से वास्ता?

Parle Owner: पारले-जी भारत में एक जाना पहचाना ब्रांड है. आइए जानते हैं कौन है पारले कंपनी के मालिक और उनका धर्म क्या है.

Parle Owner: पारले सिर्फ एक बिस्किट ब्रांड नहीं है. बल्कि यह भारत में एक जाना पहचाना नाम है, जिसने लगभग एक सदी तक बदलते स्वाद, कॉम्पिटीशन और आर्थिक बदलावों का सामना किया है. पारले-जी से लेकर मोनाको और हाइड एंड सीक तक इस ब्रांड ने भारत की एफएमसीजी की कहानी को एक आकार दिया है. आइए जानते हैं कौन है इस कंपनी का मालिक और उनका किस धर्म से वास्ता है.

पारले की ओनरशिप 

पारले प्रोडक्ट्स का मालिकाना हक चौहान परिवार के पास है. आपको बता दें कि यह कोई पब्लिकली लिस्टेड या फिर सरकारी कंपनी नहीं है. यह एक प्राइवेट इंडियन इंटरप्राइज है. कंपनी की स्थापना 1929 में मोहनलाल दयाल चौहान ने की थी और 2026 में पारले प्रोडक्ट्स उनके वंशजों द्वारा ही चलाई जा रही है.

पारले प्रोडक्ट्स की मौजूदा लीडरशिप विजय चौहान के हाथों में है. विजय चौहान अध्यक्ष और मैनेजिंग डायरेक्टर के तौर पर काम करते हैं और साथ ही शरद चौहान और राज चौहान भी कंपनी की कमान संभालते हैं. परिवार ने जानबूझकर बिजनेस को बाहरी शेयरहोल्डर्स से दूर रखा है.

क्या है मालिकों का धर्म 

चौहान परिवार हिंदू धर्म का है. वे मूल रूप से गुजरात के वलसाड जिले के पारडी के रहने वाले हैं. पारले की शुरुआत ही राष्ट्रवाद से हुई थी. मोहनलाल दयाल चौहान मूल रूप से मुंबई में एक रेशम व्यापारी थे. 1920 के दशक के स्वदेशी आंदोलन से वे काफी ज्यादा प्रेरित हुए और उन्होंने भारत में ब्रिटिश खाद्य उत्पादों को चुनौती देने की ठानी. उस समय बिस्कुट और कन्फेक्शनरी आयातित लग्जरी चीजें थीं, जो सिर्फ अमीर लोगों के लिए ही सस्ती थी. 

इसे बदलने के लिए वह मॉडल कन्फेक्शनरी तकनीक सीखने के लिए जर्मनी गए और लगभग ₹60,000 की मशीनरी के साथ भारत लौटे. 1928-29 में उन्होंने मुंबई के विले पारले इलाके में सिर्फ 12 परिवार के सदस्यों के साथ एक छोटी सी फैक्ट्री लगाई. कंपनी का नाम भी इसी जगह से पड़ा. 

कैंडी से बिस्किट तक का सफर 

आपको बता दें कि पारले का पहला प्रोडक्ट बिस्किट नहीं था. बल्कि यह एक ऑरेंज कैंडी थी. बिस्किट लगभग 1 दशक बाद 1938-39 में पारले ग्लूको के लॉन्च के साथ आए. समय के साथ पारले ग्लूको पारले-जी में बदल गया, जो 2011 में जाकर वॉल्यूम के हिसाब से दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट बन गया.

ये भी पढ़ें:  कौन है पीटर इंग्लैंड कंपनी का मालिक, किस धर्म से है इनका वास्ता?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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