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भारत में कहां सबसे ज्यादा है बुजुर्गों की आबादी, जानें कौन सा राज्य हो रहा बूढ़ा?

भारत का एक राज्य तेजी से बुजुर्गों का प्रदेश बनता जा रहा है. यहां 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी सबसे ज्यादा 16.5% तक पहुंच चुकी है. आइए इस राज्य के बारे में और इसके पीछे की वजह जानें.

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  • दक्षिण भारत में प्रजनन दर में कमी, जीवन प्रत्याशा बढ़ी.

क्या भारत सचमुच बूढ़ा हो रहा है? दुनिया के सबसे युवा देशों में शुमार हमारे देश का एक हिस्सा ऐसा भी है, जहां की आबादी में बुजुर्गों की तादाद सबसे तेजी से बढ़ रही है. हालिया आंकड़ों और रिपोर्टों ने एक चौंकाने वाला सच सामने रखा है, जिसके मुताबिक दक्षिण भारत का एक खूबसूरत राज्य देश में सबसे ज्यादा बुजुर्गों वाला राज्य बन चुका है. बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और घटती जन्म दर के बीच इस राज्य के कई गांवों में अब सिर्फ बुजुर्ग ही बचे हैं. आइए इसके बारे में जानते हैं. 

किस राज्य में बुजुर्गों की सबसे ज्यादा आबादी? 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रतिशत के मामले में देश में सबसे ज्यादा बुजुर्ग आबादी केरल राज्य में निवास कर रही है. केरल की कुल जनसंख्या का लगभग 16.5 प्रतिशत हिस्सा उन लोगों का है जिनकी उम्र 60 वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है. संख्या के हिसाब से देखें तो यह आंकड़ा करीब 56 लाख लोगों का बैठता है. केरल के इन बुजुर्गों में भी एक बड़ा हिस्सा बहुत अधिक उम्र के लोगों का है. आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के कुल बुजुर्गों में से करीब 11 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनकी उम्र 80 साल या उससे भी ज्यादा है. अनुमान है कि साल 2031 तक केरल की कुल आबादी में बुजुर्गों की यह हिस्सेदारी बढ़कर 25 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी.

घरों में लटके ताले और अकेले बुजुर्ग

इस जनसांख्यिकीय बदलाव का सीधा असर राज्य के सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहा है. केरल की कुल 3.43 करोड़ की आबादी में हर पांच में से एक घर का कम से कम एक सदस्य रोजगार या पढ़ाई के लिए बाहर है. इस वजह से राज्य के 12 लाख से ज्यादा घरों में ताले पड़े हैं और 21 लाख से अधिक घरों में सिर्फ बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं.

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देश का पहला वरिष्ठ नागरिक आयोग

हालात की गंभीरता को देखते हुए केरल सरकार ने पिछले साल मार्च के आखिर में एक ऐतिहासिक कदम उठाया था. सरकार ने राज्य में 'वरिष्ठ नागरिक आयोग' का गठन किया है. यह अपनी तरह का देश का पहला विशेष आयोग है, जो पूरी तरह से केवल बुजुर्गों के अधिकारों, उनके कल्याण और पुनर्वास के लिए काम करेगा.

तमिलनाडु और हिमाचल प्रदेश की स्थिति 

बुजुर्गों की बढ़ती आबादी के मामले में केरल अकेला नहीं है. उसके बाद तमिलनाडु का नंबर आता है, जहां लगभग 13 प्रतिशत आबादी बुजुर्ग है. वहीं पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा करीब 12 प्रतिशत है. ये सभी राज्य बुजुर्गों के मामले में राष्ट्रीय औसत से काफी आगे चल रहे हैं.

राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा बुजुर्गों का ग्राफ

एसआरएस (SRS) रिपोर्ट 2023 के आंकड़े बताते हैं कि पूरे भारत में बुजुर्गों की संख्या में इजाफा हो रहा है. देश की कुल आबादी का अब 9.7 फीसदी हिस्सा 60 साल से अधिक उम्र के लोगों का हो चुका है. साल 2011 में यह आंकड़ा सिर्फ 8.6 प्रतिशत था. वहीं, 65 वर्ष से ऊपर के नागरिकों की हिस्सेदारी भी 6.4 प्रतिशत पर आ गई है.

कामकाजी उम्र की आबादी में उछाल

रिपोर्ट के अनुसार, देश में 15 से 59 साल के कामकाजी आयु वर्ग के लोगों की आबादी में पिछले दशकों में बड़ा बदलाव आया है. साल 1971 में यह आबादी 53.4 प्रतिशत थी, जो 1981 में 56.3 और 1991 में 57.7 प्रतिशत हुई. साल 2023 के आंकड़ों में यह बढ़कर 66.1 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है.

बच्चों की संख्या में लगातार गिरावट

एक तरफ बुजुर्ग बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ बच्चों की आबादी का हिस्सा लगातार कम हो रहा है. साल 1971 से 1981 के बीच 0 से 14 साल के आयु वर्ग की जनसंख्या 41.2 प्रतिशत से घटकर 38.1 प्रतिशत रह गई थी. यही हिस्सेदारी साल 1991 के 36.3 प्रतिशत से भारी गिरावट के साथ 2023 में महज 24.2 प्रतिशत रह गई है. दक्षिण भारतीय राज्यों में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ने के दो मुख्य कारण हैं- प्रजनन दर में भारी कमी और जीवन प्रत्याशा में बढ़ोतरी. बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण लोग अब लंबा जीवन जी रहे हैं, जबकि नए बच्चों के पैदा होने की रफ्तार काफी धीमी पड़ चुकी है.

प्रजनन दर का खतरनाक स्तर

2025 की रिपोर्ट की मानें तो भारत में कुल प्रजनन दर (TFR) अब घटकर केवल 1.9 के स्तर पर आ गई है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह 2.1 पर है. यह दर साल 2022 में 2.0 और साल 1971 में 5.2 के उच्च स्तर पर थी. किसी भी देश की जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए 2.1 का स्तर जरूरी माना जाता है, लेकिन भारत अब इस जरूरी मानक से भी नीचे आ चुका है, जिसका मतलब है कि देश में कम बच्चे जन्म ले रहे हैं.

उत्तर और दक्षिण के राज्यों में बड़ा अंतर

प्रजनन दर के मामले में देश के राज्यों में बड़ा अंतर है. बिहार (2.8), उत्तर प्रदेश (2.6), मध्य प्रदेश (2.5), राजस्थान (2.3) और छत्तीसगढ़ (2.2) में फर्टिलिटी रेट सबसे ज्यादा है. इसके विपरीत दिल्ली (1.2), पश्चिम बंगाल (1.3), तमिलनाडु (1.3), महाराष्ट्र (1.4), आंध्र प्रदेश (1.4) और केरल (1.4) में यह दर सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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