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Offering Namaz In Shifts: किन देशों में शिफ्ट में पढ़ी जाती है नमाज, जानें दुनिया के बड़े देशों में क्या हैं नियम?

Offering Namaz In Shifts: यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कड़े लहजे में कह दिया है कि सड़कों पर नमाज न पढ़कर, लोग उसे शिफ्ट में पूरी करें. आइए इसी क्रम में जान लें कि किन देशों में ऐसा नियम है.

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  • यूएई में सड़क पर नमाज पढ़ने पर भारी जुर्माना.

Offering Namaz In Shifts: बकरीद के त्योहार से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान ने देश में नई बहस छेड़ दी है. लखनऊ के एक कार्यक्रम में सीएम योगी ने दोटूक कहा कि अगर नमाज पढ़नी है तो मस्जिदों के अंदर शिफ्ट में पढ़िए, लेकिन सड़कों को ब्लॉक मत कीजिए. उनके इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर दुनिया के बड़े और इस्लामिक मुल्कों में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर क्या नियम हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि कई बड़े मुस्लिम देशों में खुले या सड़क पर नमाज अदा करना न सिर्फ प्रतिबंधित है, बल्कि ऐसा करने पर भारी-भरकम जुर्माना भी भुगतना पड़ता है.

योगी आदित्यनाथ की शिफ्ट में नमाज पढ़ने की सलाह

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सड़क पर नमाज पढ़े जाने के मुद्दे पर बेहद तीखा और स्पष्ट रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान सड़कों को रोकना किसी भी हाल में सही नहीं है. मुख्यमंत्री ने मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए कहा कि अगर मस्जिदों में जगह कम पड़ रही है, तो लोग एक के बाद एक अलग-अलग शिफ्ट में अपनी नमाज पूरी कर सकते हैं. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि लोग प्यार से बात मानेंगे तो ठीक है, वरना प्रशासन को दूसरा तरीका अपनाना अच्छे से आता है. 

इस्लामिक देशों में बेहद कड़े कानून

सड़क पर नमाज रोकने की यह कवायद सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. दिलचस्प बात यह है कि जिस अरब क्षेत्र से इस्लाम का उदय हुआ, वहां के ज्यादातर मुस्लिम बहुल देशों में सड़कों या खुले सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करना पूरी तरह से गैरकानूनी माना गया है. इन तमाम देशों में इस तरह के सख्त कानून इसलिए बनाए गए हैं, ताकि सड़कों पर होने वाली किसी भी धार्मिक गतिविधि की वजह से आम जनता को परेशानी न हो. प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सड़कों पर गाड़ियों का ट्रैफिक सुचारू रूप से चलता रहे और कोई जाम न लगे. 

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इंडोनेशिया का सख्त नियम

दुनिया में सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया की स्थिति इस मामले में बेहद स्पष्ट है. इस देश में लगभग 8 लाख से ज्यादा मस्जिदें मौजूद हैं. इसके बावजूद वहां किसी भी नागरिक को सड़क पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है. सभी लोग सिर्फ मस्जिदों के अंदर जाकर ही इबादत करते हैं. इंडोनेशिया की सरकार ने आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए नमाज के दौरान मस्जिदों में बजने वाले लाउडस्पीकरों की आवाज को भी एक तय सीमा के भीतर धीमा रखने के सख्त निर्देश जारी किए हैं, ताकि आस-पास रहने वाले दूसरे लोगों को किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो. 

यूएई में लगता है मोटा जुर्माना

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भी सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है. वहां के नियम इतने कड़े हैं कि अगर कोई व्यक्ति सड़क किनारे अपनी गाड़ी रोककर नमाज पढ़ते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर प्रशासन की तरफ से सीधे तौर पर भारी जुर्माना ठोक दिया जाता है. यूएई प्रशासन के नियमों के मुताबिक, सड़क यातायात को बाधित कर नमाज पढ़ने वाले किसी भी व्यक्ति पर 500 दिरहम का मोटा आर्थिक जुर्माना लगाया जाता है. यह सख्त नियम इसलिए लागू किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी धार्मिक आस्था के नाम पर सुरक्षा और यातायात नियमों से खिलवाड़ न कर सके.

किन देशों में शिफ्ट वाली व्यवस्था

पाकिस्तान, बांग्लादेश और यूएई (दुबई और अबू धाबी) जैसे देशों में एक खास व्यावहारिक व्यवस्था भी देखने को मिलती है. जब किसी बड़ी मुख्य मस्जिद या ईदगाह में नमाजियों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाती है, तो वहां एक ही जगह पर तय अंतराल के बाद कई शिफ्ट में अलग-अलग जमात कराकर नमाज पूरी कराई जाती है.

कामकाजी जगहों पर भी शिफ्ट वाली व्यवस्था

सऊदी अरब, यूएई और मलेशिया जैसे देशों के अलावा कई गैर-मुस्लिम देशों में भी कार्यस्थलों, बड़े शॉपिंग मॉल या इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर लोग जगह और समय की कमी को देखते हुए छोटे-छोटे समूहों में बंटकर या अलग-अलग शिफ्ट के अनुसार अपनी जरूरी नमाज अदा करते हैं. पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देशों में अब यह पूरी तरह तय कर दिया गया है कि सड़कों को किसी भी स्थिति में बंद नहीं किया जाएगा. यही वजह है कि त्योहारों के बड़े मौकों पर भीड़ को संभालने के लिए मस्जिदों के भीतर ही समय तय करके शिफ्ट में नमाज पढ़ने की मुकम्मल व्यवस्था की जाती है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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