IAF Aircraft Crash: IAF का जो प्लेन हुआ जोरहाट में क्रैश उसकी कितनी थी कीमत, किस काम आता था यह एयरक्राफ्ट?
IAF Aircraft Crash: हाल ही में भारतीय वायु सेना का एक विमान क्रैश हो गया है. आइए जानते हैं क्या है इस विमान की कीमत.

- भारतीय वायुसेना का AN-32 विमान जोरहाट एयरपोर्ट पर क्रैश हुआ।
- उतरने के बाद आग लगने से विमान दो हिस्सों में बिखर गया।
- यह सोवियत-निर्मित विमान रसद और सैन्य परिवहन में महत्वपूर्ण है।
- सैनिकों, सैन्य उपकरण दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाने में सक्षम है।
IAF Aircraft Crash: असम के जोरहाट एयरपोर्ट पर भारतीय वायु सेना का एक विमान क्रैश हो गया. इस घटना में शामिल विमान एंटोनोव AN-32 था. यह सोवियत मूल का मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान है और दशकों से भारतीय वायु सेना के लिए लॉजिस्टिक्स के मामले में सबसे जरूरी साधनों में से एक रहा है. शुरुआती रिपोर्ट से यह पता चलता है कि घटना एयर बेस पर विमान के उतरने के कुछ ही समय बाद हुई. विमान के दो हिस्सों में टूटने से पहले उससे आग की लपटें और घना धुआं निकलता देखा गया. इसी बीच आइए जानते हैं क्या है इस विमान की कीमत.
AN-32 विमान की कीमत
इस विमान की यूनिट कीमत लगभग 15 मिलियन डॉलर है. यह भारतीय मुद्रा में लगभग ₹125 करोड़ के बराबर है. हालांकि यह विमान मूल रूप से सोवियत संघ में बनाया गया था लेकिन मुश्किल हालात में भी प्रभावी ढंग से काम करने की अपनी क्षमता की वजह से यह भारतीय वायु सेना के ट्रांसपोर्ट ऑपरेशंस में बड़ी भूमिका निभाता है.
क्यों है यह विमान जरूरी?
अपनी बहुमुखी प्रतिभा और भरोसमंद होने की वजह से इस विमान को अक्सर भारतीय वायु सेना का वर्कहॉर्स कहा जाता है. इसका इस्तेमाल सैनिकों को लाने ले जाने, सैन्य उपकरण ले जाने, दूर दराज के इलाकों में सामान पहुंचाने और देश भर में मानवीय व आपदा राहत कार्यों में मदद करने के लिए किया जाता है.
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सैनिकों और पैराट्रूपर्स को ले जाना
इस विमान के मुख्य कामों में से एक सैनिकों को ले जाना है. यह एक बार में 42 पैराट्रूपर्स या फिर लगभग 50 पूरी तरह से लैस सैनिकों को ले जा सकता है. इस क्षमता की वजह से भारतीय वायु सेना जरूरत पड़ने पर रणनीतिक स्थान पर तेजी से जवानों को तैनात कर सकती है.
इस विमान को भारी सैन्य कार्गो ले जाने के लिए भी डिजाइन किया गया है. यह 6.7 से 7.5 टन तक के उपकरण ले जा सकता है. इसमें हथियार, गोला-बारूद, वाहन, इंजीनियरिंग का सामान और जरूरी राशन शामिल हैं.
ज्यादा ऊंचाई और दूर दराज के इलाकों में ऑपरेशन
इस विमान का एक बड़ा फायदा यह है कि यह पहाड़ी और ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में मौजूद मुश्किल और फील्ड से भी ऑपरेट कर सकता है. इस विमान का इस्तेमाल अक्सर सियाचिन, लेह, लद्दाख और पूर्वोत्तर भारत के कई इलाकों में किया जाता है. यहां मुश्किल रास्तों और खराब मौसम की वजह से दूसरे कई ट्रांसपोर्ट विमान का इस्तेमाल करना मुश्किल होता है.
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