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जापान के सरकारी स्कूलों में कितनी होती है मंथली फीस, भारत से कम या ज्यादा?

जापान जैसे महंगे देश में शिक्षा का हाल भारत से तो काफी अच्छा है. आइए जानें कि यहां सालाना स्कूल की फीस कितनी होती है, क्या यह भारत से ज्यादा होती है या कम होती है.

क्या जापान जैसे महंगे देश में बच्चों की पढ़ाई भी उतनी ही महंगी है? या फिर वहां की सरकार शिक्षा को सच में प्राथमिकता देती है? अक्सर लोग मानते हैं कि विदेशों में स्कूल फीस आसमान छूती है, लेकिन जापान का मॉडल इस सोच को बदल देता है. खासकर 2025 के बाद सरकारी हाई स्कूलों को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है. ऐसे में सवाल यह है कि क्या जापान में पढ़ाई भारत से सस्ती है या महंगी? आइए समझते हैं. 

जापान में स्कूल शिक्षा का ढांचा

जापान में स्कूली शिक्षा को तीन हिस्सों में बांटा गया है- प्राथमिक स्कूल (6 साल), जूनियर हाई स्कूल (3 साल) और सीनियर हाई स्कूल (3 साल के बाद). यहां 15 साल की उम्र तक की शिक्षा अनिवार्य है. यानी प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल तक बच्चों को पढ़ाना कानूनी रूप से जरूरी है. यहां की सरकार का फोकस इस बात पर रहता है कि हर बच्चा बुनियादी शिक्षा जरूर हासिल करे. इसलिए 15 साल तक की पढ़ाई पूरी तरह ट्यूशन फीस से मुक्त होती है. 

प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल ट्यूशन पूरी तरह फ्री

जापान में प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल में ट्यूशन फीस नहीं ली जाती है. यह शिक्षा अनिवार्य और निशुल्क है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि माता-पिता को कोई खर्च नहीं उठाना पड़ता है. वहां किताबें, लंच, खेलकूद, स्कूल ट्रिप और अन्य गतिविधियों पर खर्च आता है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि अतिरिक्त खर्चों को मिलाकर सालाना करीब 35,000 येन तक खर्च हो सकता है और इसमें से पैसा स्कूल के डेवलपमेंट के लिए होता है. हालांकि कई परिवारों के लिए स्थानीय प्रशासन और सरकार की ओर से आर्थिक सहायता भी उपलब्ध होती है. वहां पर बच्चों को किताबों के साथ-साथ लैपटॉप/टैबलेट आदि भी दिया जाता है, जिससे कि टेक्नोलॉजी पर भी बराबर ध्यान दिया जा सके.

जापान के स्कूलों में परीक्षाएं

जापान के स्कूलों में छोटे बच्चों के लिए एग्जाम का कोई प्रेशर नहीं होता है. वहां छोटे बच्चों को परीक्षाएं नहीं देनी होती हैं, लेकिन हर हफ्ते स्कूलों में वीकली टेस्ट लिया जाता है. इसके अलावा वहां सरकारी स्कूलों में बच्चों की कोई डेली यूनिफॉर्म नहीं होती है, बल्कि फिजिकल एजुकेशन के लिए यूनिफॉर्म दी जाती है, जो कि स्टूडेंट्स को स्कूल में ही चेंज करनी होती है. इसके अलावा वहां लंच करने के लिए भी बच्चों को अलग सफेद रंग की ड्रेस पहननी होती है. 

2025 के बाद हाई स्कूल में बड़ा बदलाव

जापान में सीनियर हाई स्कूल यानी 15 से 18 वर्ष की पढ़ाई अनिवार्य नहीं है, लेकिन अधिकतर छात्र इसे पूरा करते हैं. पहले सरकारी हाई स्कूलों में हर महीने लगभग 5,000 से 10,000 येन तक ट्यूशन फीस लगती थी. लेकिन 2025 से सरकारी हाई स्कूल की ट्यूशन फीस लगभग पूरी तरह मुफ्त कर दी गई है. इसका मतलब है कि अब ट्यूशन के नाम पर माता-पिता को कोई नियमित फीस नहीं देनी पड़ती है. 

भारत की तुलना में कौन सस्ता?

अगर भारत की बात करें, तो यहां सरकारी स्कूलों में ट्यूशन फीस आमतौर पर नहीं ली जाती या बहुत मामूली होती है, लेकिन कई राज्यों में किताबें, यूनिफॉर्म और मिड-डे मील जैसी सुविधाएं भी मुफ्त मिलती हैं. 

जापान में ट्यूशन तो फ्री है, लेकिन बाकी खर्च भारत की तुलना में ज्यादा हो सकते हैं, क्योंकि वहां जीवन-यापन की लागत अधिक है, फिर भी अगर सिर्फ ट्यूशन फीस की बात करें तो जापान और भारत दोनों में सरकारी स्कूल शिक्षा लगभग मुफ्त है. फर्क मुख्य रूप से अतिरिक्त खर्च और जीवन स्तर के हिसाब से पड़ता है. 

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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