एक्सप्लोरर

कम से कम कितने दिन की होती है ज्यूडिशियल कस्टडी? जानें नियम

न्यायिक हिरासत की कोई न्यूनतम अवधि तय नहीं होती, यह कुछ दिनों से शुरू हो सकती है, जबकि अधिकतम अवधि गंभीर अपराधों में 90 दिन और सामान्य मामलों में 60 दिन होती है.

कानूनी मामलों और आपराधिक प्रक्रियाओं में न्यायिक हिरासत एक बेहद महत्वपूर्ण शब्द है. हाल ही में इस तरह की कानूनी प्रक्रियाओं और गिरफ्तारियों को लेकर राजनीतिक गलियारों और मीडिया में चर्चा तेज हो गई है. जब भी किसी आरोपी को पुलिस थाने से अदालत में पेश किया जाता है, तो मजिस्ट्रेट के आदेश पर उसे जेल भेज दिया जाता है. लोगों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि यह न्यायिक हिरासत कम से कम कितने दिनों की होती है और इसके नियम क्या हैं, जिसे समझना हर नागरिक के लिए बहुत जरूरी है.

ज्यूडिशियल कस्टडी का अर्थ 

न्यायिक हिरासत यानी ज्यूडिशियल कस्टडी का सीधा सा मतलब यह होता है कि किसी आरोपी व्यक्ति को अदालत के निर्देश पर जेल के सलाखों के पीछे भेज दिया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आरोपी का नियंत्रण पुलिस के हाथों में न होकर सीधे तौर पर मजिस्ट्रेट और जेल प्रशासन की देखरेख में रहता है. इसे कानूनी नजरिए से किसी भी तरह की सजा नहीं माना जाता, क्योंकि अदालत का अंतिम फैसला आने तक कानून की किताब में वह व्यक्ति केवल आरोपी ही कहलाता है. इस अवस्था में उसे पुलिस थाने के लॉकअप में नहीं रखा जाता, बल्कि जेल के भीतर सुरक्षित रखा जाता है.

पुलिस कस्टडी और न्यायिक हिरासत में अंतर

पुलिस कस्टडी और ज्यूडिशियल कस्टडी दोनों पूरी तरह से अलग प्रक्रियाएं हैं. पुलिस कस्टडी में आरोपी पुलिस थाने के लॉकअप में रहता है और जांच अधिकारी सीधे उससे पूछताछ कर सकते हैं. इसके विपरीत, ज्यूडिशियल कस्टडी में आरोपी को जेल भेज दिया जाता है, जहां जेल अधिकारियों का कड़ा पहरा होता है. यदि पुलिस को न्यायिक हिरासत में बंद किसी आरोपी से दोबारा पूछताछ करनी होती है, तो उन्हें थाने ले जाने के लिए अदालत यानी मजिस्ट्रेट से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है, बिना कोर्ट के आदेश के पुलिस ऐसा नहीं कर सकती.

यह भी पढ़ें: क्या आप भी रिकॉर्ड करते हैं ऑफिस की बातें, ऐसे केस में कितनी सजा?


कम से कम कितने दिन की होती है ज्यूडिशियल कस्टडी? जानें नियम

न्यायिक हिरासत की न्यूनतम अवधि के नियम

कानून के जानकारों के अनुसार, ज्यूडिशियल कस्टडी या न्यायिक हिरासत की कोई भी न्यूनतम यानी कम से कम अवधि तय नहीं की गई है. अदालत या मजिस्ट्रेट मामले की गंभीरता और जरूरत को देखते हुए किसी आरोपी को सिर्फ 1 दिन, 2 दिन, 5 दिन या अधिकतम 14 दिन के लिए भी न्यायिक हिरासत में भेज सकते हैं. यानी इसकी कोई तय न्यूनतम सीमा नहीं है और यह कुछ घंटों से भी शुरू होकर कोर्ट की अगली सुनवाई तक बढ़ सकती है. जरूरत पड़ने पर मजिस्ट्रेट इस अवधि को समय-समय पर आगे भी बढ़ाते रहते हैं.

गंभीर और सामान्य मामलों में अधिकतम अवधि

न्यायिक हिरासत की अधिकतम सीमा अपराध के प्रकार और उसकी गंभीरता पर पूरी तरह निर्भर करती है. जिन मामलों में अपराध बहुत गंभीर होते हैं, जैसे कि मृत्युदंड, आजीवन कारावास या 10 साल से अधिक की सजा का प्रावधान, वहां यह अवधि अधिकतम 90 दिनों तक हो सकती है. वहीं दूसरी ओर, अन्य सामान्य श्रेणी के अपराधों में न्यायिक हिरासत की यह अधिकतम सीमा केवल 60 दिनों तक ही सीमित होती है. पुलिस को हर हाल में इस तय समय सीमा के भीतर अपनी जांच पूरी करके अदालत में चार्जशीट दाखिल करनी होती है.


कम से कम कितने दिन की होती है ज्यूडिशियल कस्टडी? जानें नियम

डिफॉल्ट जमानत का कानूनी प्रावधान

यदि जांच एजेंसी या पुलिस तय किए गए समय यानी गंभीर मामलों में 90 दिन और सामान्य मामलों में 60 दिन के भीतर अदालत में चार्जशीट पेश करने में असमर्थ रहती है, तो कानून आरोपी के पक्ष में खड़ा हो जाता है. इस स्थिति में आरोपी को कानूनी तौर पर डिफॉल्ट जमानत पाने का पूरा अधिकार मिल जाता है. इसका मतलब यह है कि पुलिस की लापरवाही या देरी के कारण अदालत आरोपी को वैधानिक जमानत देने के लिए बाध्य हो जाती है, भले ही उस पर कितने भी गंभीर आरोप क्यों न लगे हों.

यह भी पढ़ें: केजरीवाल से कन्हैया तक, आंदोलन से निकलकर बड़े नेता बन चुके ये लोग

About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

MLA या MLC, कौन ज्यादा ताकतवर? समझें दोनों की पावर
MLA या MLC, कौन ज्यादा ताकतवर? समझें दोनों की पावर
45 पैसे में रेलवे कैसे देता है 10 लाख का इंश्योरेंस, क्यों नहीं होता नुकसान?
45 पैसे में रेलवे कैसे देता है 10 लाख का इंश्योरेंस, क्यों नहीं होता नुकसान?
माइक्रोसॉफ्ट में कितने भारतीय करते हैं काम, कितनी है इनकी औसत सैलरी?
माइक्रोसॉफ्ट में कितने भारतीय करते हैं काम, कितनी है इनकी औसत सैलरी?
किस देश में औसत उम्र सबसे कम और कहां सबसे ज्यादा? जानें भारत का हाल
किस देश में औसत उम्र सबसे कम और कहां सबसे ज्यादा? जानें भारत का हाल
Advertisement

वीडियोज

Bihar MLC Election Result: बिहार में पहले रुझान में ही पलटी बाजी | Nitish Kumar | JDU | Anant Singh
YRKKH: Kabir को मंगेतर संग थिरकते देख चौंके Armaan-Abhira, क्या झूठे थे प्यार के सारे दावे?
Bollywood News: रश्मिका-विजय की लव स्टोरी पर बवाल, अब साइबर क्राइम पहुंचा मामला! (27.10.26)
Sansani | ABP News: No Parking का शैतान...नजरों के सामने खूनी खेल !
Mallikarjun Kharge on PM Modi News: कांग्रेस बौखलाई...'बाप-दादा' पर आई! | Breaking | ABP News
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'मैं कभी नहीं चाहती थी कि राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनें', सोनिया गांधी का खुलासा
'मैं कभी नहीं चाहती थी कि राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनें', सोनिया गांधी का खुलासा
Bihar MLC Election Results LIVE: तिरहुत शिक्षक के नतीजे घोषित, किसकी जीत हुई? नीरज कुमार पर भी अपडेट
बिहार MLC रिजल्ट: तिरहुत शिक्षक के नतीजे घोषित, किसकी जीत हुई? नीरज कुमार पर भी अपडेट
तूफान 'अर्नब' का विकराल रूप: इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, किसानों के लिए एडवाइजरी
तूफान 'अर्नब' का विकराल रूप: इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, किसानों के लिए एडवाइजरी
तीसरे टी20 में भारत ने बनाया वर्ल्ड रिकॉड, टी20 इंटरनेशनल में सबसे तेज टीम अर्धशतक
तीसरे टी20 में भारत ने बनाया वर्ल्ड रिकॉड, टी20 इंटरनेशनल में सबसे तेज टीम अर्धशतक
'रामायण' से क्लैश टालने के लिए भारत में टलेगी 'गॉडजिला माइनस जीरो'? जानें- असल वजह
'रामायण' से क्लैश टालने के लिए भारत में टलेगी 'गॉडजिला माइनस जीरो'?
कहां कितने वोट कटे? खरगे ने 13 राज्यों की जारी कर दी लिस्ट, पूछा- CEC को क्यों बचा रहे?
कहां कितने वोट कटे? खरगे ने 13 राज्यों की जारी कर दी लिस्ट, पूछा- CEC को क्यों बचा रहे?
ये आपकी मेहनत है....कंपनी के CEO ने कर्मचारियों को तोहफे में दी Kia sonet
ये आपकी मेहनत है....कंपनी के CEO ने कर्मचारियों को तोहफे में दी Kia sonet
व्हाट्सएप पर NO लिखते ही खाली हो जाएगा खाता, अब ऐसे ठग रहे स्कैमर
व्हाट्सएप पर NO लिखते ही खाली हो जाएगा खाता, अब ऐसे ठग रहे स्कैमर
Embed widget