किस देश में औसत उम्र सबसे कम और कहां सबसे ज्यादा? जानें भारत का हाल
दुनिया में औसत उम्र के आंकड़े बदल रहे हैं, जिसमें यूरोप में सबसे ज्यादा बुजुर्ग आबादी है, जबकि भारत अपनी 28.4 वर्ष की औसत उम्र के बल पर दुनिया का सबसे बड़ा कामकाजी पावरहाउस बनने की ओर अग्रसर है.

वैश्विक स्तर पर जनसांख्यिकी का ढांचा दो अलग-अलग दिशाओं में तेजी से बदल रहा है. जहां एक तरफ कई विकसित देश घटती जन्मदर और तेजी से बूढ़ी होती आबादी के कारण आर्थिक व सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विकासशील और अफ्रीकी देशों में युवाओं की संख्या का ग्राफ काफी ऊंचा है. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में औसत आयु और जीवन प्रत्याशा का यह बड़ा अंतर आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था, कार्यबल की उपलब्धता और प्रवासन की नीतियों को गहराई से प्रभावित करने वाला है.
सबसे युवा आबादी वाले देश
दुनिया में सबसे कम माध्यिका आयु यानी मीडियन एज की बात करें तो अफ्रीकी देश नाइजर इस सूची में सबसे ऊपर आता है. नाइजर में आबादी की औसत उम्र मात्र 14.8 से 14.9 वर्ष के आसपास है, जिसका सीधा मतलब यह है कि इस देश की आधी से अधिक जनसंख्या 15 साल से कम आयु की है. नाइजर के अलावा युगांडा, माली और मलावी जैसे अन्य अफ्रीकी राष्ट्रों में भी औसत आयु 16 से 17 वर्ष के बीच ही बनी हुई है. हालांकि, अगर जीवन प्रत्याशा यानी लोगों के औसतन जीवित रहने की उम्र की बात की जाए, तो नाइजीरिया और चाड जैसे देशों में यह आंकड़ा महज 54 से 55 साल के आसपास सिमट कर रह जाता है.
लंबी उम्र और बुजुर्ग आबादी के देश
दुनिया में सबसे अधिक जीवन प्रत्याशा और सबसे ज्यादा औसत उम्र वाले देशों में यूरोपीय व एशियाई क्षेत्र आगे हैं. यूरोपीय देश मोनाको में लोगों की औसत जीवन प्रत्याशा सबसे अधिक करीब 86.73 से 87 वर्ष दर्ज की गई है, जबकि वहां की आबादी की माध्यिका आयु भी दुनिया में सर्वाधिक 53.1 वर्ष है. इसके अलावा हांगकांग में औसत जीवन प्रत्याशा 85.9 वर्ष, सैन मैरिनो में 86.03 वर्ष और जापान में 85.15 वर्ष के करीब पाई जाती है. जापान में आबादी की मीडियन एज लगभग 50.2 वर्ष है, जो इसे दुनिया के सबसे बुजुर्ग समाजों में से एक बनाती है.
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भारतीय में डेमोग्राफिक डिविडेंड
भारत वर्तमान समय में जनसांख्यिकीय दृष्टि से बेहद मजबूत और संतुलित स्थिति में खड़ा है. देश की औसत उम्र लगभग 28.4 वर्ष है, जिसका तात्पर्य यह है कि भारत के पास इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी और ऊर्जावान कामकाजी आबादी मौजूद है. अगले दो से तीन दशकों तक भारत इस डेमोग्राफिक डिविडेंड का सीधा फायदा उठाकर अपनी आर्थिक विकास दर को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है. हालांकि, इस विशाल कार्यबल की क्षमताओं का पूरा लाभ उठाने के लिए युवाओं को बेहतर शिक्षा, आधुनिक कौशल प्रशिक्षण और पर्याप्त रोजगार के अवसर मुहैया कराना प्रशासन के लिए प्राथमिक चुनौती है.
भविष्य के वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अफ्रीका
अफ्रीकी महाद्वीप की लगभग 50 प्रतिशत आबादी की उम्र 19 साल से कम होना इसे दुनिया का सबसे युवा क्षेत्र बनाता है. आने वाले वर्षों में जब विकसित देशों में काम करने वाले लोगों की कमी होगी, तब अफ्रीका के पास विनिर्माण और औद्योगिक गतिविधियों को संभालने के लिए विशाल युवा कार्यबल मौजूद रहेगा. यह स्थिति अफ्रीका को भविष्य का एक बड़ा कंज्यूमर मार्केट और आर्थिक पावरहाउस बना सकती है. लेकिन इस क्षमता को वास्तविक प्रगति में बदलने के लिए वहां बुनियादी ढांचे के विकास, राजनीतिक स्थिरता और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण की सख्त आवश्यकता होगी.

यूरोप में औसत उम्र की स्थिति क्या है?
यूरोप इस समय गंभीर जनसांख्यिकीय बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां औसत उम्र 42 साल से अधिक हो चुकी है. युवाओं की घटती संख्या के कारण यूरोपीय देशों में कंपनियों को श्रम की भारी कमी से जूझना पड़ रहा है, जबकि बुजुर्ग होती आबादी की देखरेख, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकारी खजाने का बोझ लगातार बढ़ रहा है. अपनी आर्थिक गतिविधियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए यूरोप को आने वाले दिनों में भारत और अफ्रीका जैसे युवा देशों से आने वाले कुशल प्रवासियों, स्वचालन और एआई पर अपनी निर्भरता को और बढ़ाना होगा.
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