क्या है क्विंसी समझौता? जिसके बूते हूती की लंका लगा सकता है अमेरिका
साल 1945 का क्विंसी समझौता अमेरिका और सऊदी अरब के बीच सैन्य सुरक्षा समझौता है. लाल सागर में हूती के बढ़ते हमलों के बाद अब इसी संधि के तहत अमेरिका यमन में बड़े सैन्य एक्शन की तैयारी में है.

सऊदी अरब में हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच एक बार फिर 80 साल पुराने एक ऐतिहासिक समझौते की चर्चा तेज हो गई है, जिसे क्विंसी समझौता कहा जाता है. यह वही समझौता है, जिसके आधार पर अमेरिका और सऊदी अरब के बीच दशकों से तेल और सुरक्षा का रिश्ता कायम रहा है.
हाल ही में हूतियों ने सऊदी अरब की पाइपलाइन और तेल प्रतिष्ठानों पर बड़े हमले किए, जिसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से सीधी सैन्य सुरक्षा की मांग की. लेकिन अमेरिका ने सीधी सुरक्षा देने के बजाय सिर्फ खुफिया जानकारी और टारगेटिंग में मदद देने की पेशकश की, जिसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या क्विंसी समझौता अब पहले जितना मजबूत नहीं रहा.
क्या है क्विंसी समझौता?
क्विंसी समझौता 14 फरवरी 1945 को अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैकलिन डी रूजवेल्ट और सऊदी अरब के राजा अब्दुल अजीज इब्न सऊद के बीच हुआ था. यह मुलाकात मिस्त्र के ग्रेट बिटर लेक में मौजूद यूएसएस क्विंसी नाम के अमेरिकी युद्धपोत पर हुई थी, इसी वजह से इस समझौते का नाम क्विंसी समझौता पड़ गया. यह समझौता मूल रूप से सुरक्षा के बदले तेल पर आधारित था.
इसके तहत सऊदी अरब ने वादा किया था कि वह अमेरिका को बिना किसी रुकावट के कच्चे तेल की सप्लाई जारी रखेगा और अमेरिकी तेल कंपनियों को अपनी जमीन पर काम करने की पूरी आजादी देगा. इसके बदले में अमेरिका ने सऊदी अरब को वादा किया था कि वह हर मुश्किल वक्त में देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाएगा. शुरूआत में यह समझौता 60 साल के लिए था, लेकिन 2005 में राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने इसे अगले 60 साल के लिए और बढ़ा दिया.
पहले भी दिख चुकी है इस समझौते की कमजोरी
क्विंसी समझौते में पहली बड़ी दरार 2019 में तब दिखी थी, जब ड्रोन हमलों ने सऊदी अरामको की आधी उत्पादन क्षमता को ठप कर दिया था, लेकिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसका सीधा जवाबी सैन्य एक्शन नहीं लिया. इसे देखते हुए सऊदी अरब ने अपने दम पर भी सुरक्षा के नए विकल्प तलाशने शुरू कर दिए. सितंबर 2025 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ एक स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट किया, जिसे अगस्त 2026 में तुर्की को भी शामिल करते हुए एक त्रिपक्षीय समझौते में बदल दिया गया.
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हूती हमलों के बाद क्या हुआ?
हाल ही में हूतियों ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हमला किया, जिसके बाद सऊदी अरब ने अमेरिका से सीधी सैन्य सुरक्षा मांगी. लेकिन वॉशिंगटन ने सीधे सुरक्षा देने के बजाय सिर्फ इंटेलिजेंस देने और हमलों को टारगेट करने में मदद का प्रस्ताव रखा. जब सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा समझौते को लेकर मदद मांगी, तो पाकिस्तान ने भी सिर्फ कुछ सैनिक, लड़ाकू विमान और एक एयर डिफेंस बैटरी भेजी, जो सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए काफी नहीं थीं.
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