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डिफेंस विंग क्या है, कैसे बनता है देश की सुरक्षा की ढाल? जानें इसके बारे में सबकुछ

What Is Defence Wing: डिफेंस विंग और अताशे भारत की सुरक्षा की छिपी ताकत हैं. ये अधिकारी देश को मजबूत और सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. आइए जानें कि ये कैसे काम करते हैं.

देश की सुरक्षा सिर्फ सेनाओं की ताकत से ही नहीं, बल्कि उसके कूटनीतिक नेटवर्क से भी तय होती है. भारत ने दुनियाभर में अपने डिफेंस विंग बढ़ाकर इसे और मजबूत किया है. सेना ने साल 2032 तक डिफेंस विंग को 90 देशों में खोलने का लक्ष्य रखा है, जो कि वर्तमान में 52 देशों में है. डिफेंस विंग की रणनीति और काम की वजह से भारत वैश्विक स्तर पर सुरक्षित और मजबूत बना रहता है. आइए जानें कि यह क्या है और किस तरह से देश की सुरक्षा करता है. 

डिफेंस विंग क्या है और इसका मकसद

डिफेंस विंग मूल रूप से भारत के विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच की कड़ी है. यह देश की सुरक्षा की ढाल का एक अहम हिस्सा माना जाता है. भारत ने पिछले कुछ सालों में अपने डिफेंस विंग की संख्या बढ़ाई है. साल 2024 तक भारत के 45 देशों में डिफेंस विंग थे, जो अब बढ़कर 52 हो गए हैं. डिफेंस विंग का काम सिर्फ प्रतिनिधित्व करना ही नहीं, बल्कि विदेशों में सुरक्षा सहयोग और सैन्य कूटनीति को मजबूत करना भी होता है. 

क्या है डिफेंस विंग

डिफेंस विंग/अताशे या सैन्य अताशे वे अधिकारी होते हैं जो दूतावासों से जुड़े रहते हैं. आमतौर पर ये उच्च रैंक के सैन्य अधिकारी होते हैं, जैसे ब्रिगेडियर, कर्नल या उससे ऊपर होते है. इनकी जिम्मेदारी होती है कि वे अपने देश के सैन्य हितों का प्रतिनिधित्व करें और मित्र देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाएं. अताशे को विदेश में राजनयिक विशेषाधिकार और इम्युनिटी प्राप्त होती है.

डिफेंस डिप्लोमेसी का हिस्सा

डिफेंस अताशे की नियुक्ति डिफेंस डिप्लोमेसी का अहम हिस्सा है. डिफेंस डिप्लोमेसी का मकसद राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत रखना, सैन्य-से-सैन्य बातचीत और गतिविधियों को बढ़ावा देना है. इसके अलावा, डिफेंस डिप्लोमेसी में भारतीय रक्षा उद्योग को विदेश में बढ़ावा देना और हथियारों के निर्यात को आसान बनाना भी शामिल है. डिफेंस विंग के जरिए भारत अपने सैन्य प्रशिक्षण, अभ्यास और उपकरण समझौतों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देता है.

कैसे बनते हैं देश का रक्षा कवच

डिफेंस अताशे विदेशों में अपने देश की सैन्य नीतियां और प्राथमिकताएं साझा करते हैं. वे साझा सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और रक्षा उपकरणों के समझौतों में सहयोग करते हैं. साथ ही, वे ऐसी रणनीतिक जानकारी जुटाते हैं जो भारत की विदेश नीति और रक्षा निर्णयों में मदद करती है. इनके अनुभव और कूटनीतिक कौशल भारत की सुरक्षा ढाल को मजबूत बनाते हैं. 

यह जरूरी क्यों है 

भारत की भू-रणनीति बदल रही है और इसके साथ ही सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ रही हैं. ऐसे में डिफेंस विंग और अताशे की भूमिका और अहम हो जाती है. इनके जरिए भारत अपने मित्र देशों के साथ मजबूत सैन्य संबंध बना सकता है, कूटनीतिक बातचीत में सशक्त हो सकता है और देश की सुरक्षा को लंबे समय तक मजबूत रख सकता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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