समंदर से लेकर विधानसभा तक, जानें पाकिस्तान में कब और कैसे खेली जाती है होली?
यह त्योहार मुख्य रूप से हिंदू समुदाय मनाता है और इसके आयोजन में धर्म और समुदाय का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है. पाकिस्तान में होली की शुरुआत समुद्र तटों और छोटे-मोटे मंदिरों से होती है.

होली, जिसे भारत में रंगों का त्योहार कहा जाता है. खुशियों, नई शुरुआत और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. यह सिर्फ हिंदू धर्म का ही त्योहार नहीं, बल्कि इसे एक सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में भी मनाया जाता है. शायद यह बहुत कम लोग जानते हों, लेकिन पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी होली बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है. यहां यह त्योहार मुख्य रूप से हिंदू समुदाय मनाता है, और इसके आयोजन में धर्म और समुदाय का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है.
पाकिस्तान में होली की शुरुआत समुद्र तटों और छोटे-मोटे मंदिरों से होती है और यह धीरे-धीरे शहरों के राजनीतिक और सामाजिक केंद्रों तक पहुंचती है. हिंदू आबादी अल्पसंख्यक है, फिर भी वे इस त्योहार को बड़ी धूमधाम और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाते हैं. इस दौरान स्थानीय प्रशासन भी सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने में मदद करता है. तो आइए जानते हैं कि पाकिस्तान में होली कब और कैसे खेली जाती है.
समंदर किनारे सबसे बड़ा उत्सव
पाकिस्तान में होली का सबसे बड़ा और जीवंत उत्सव कराची में होता है. कराची, जो समुद्र के किनारे बसा एक बड़ा और व्यस्त शहर है, यहां के श्री स्वामीनारायण मंदिर के आसपास होली का मुख्य केंद्र है. यहां हर साल सैकड़ों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं. होली की शुरुआत होलिका दहन से होती है. लोग इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में देखते हैं. इसके बाद रंगों का खेल, भजन-कीर्तन, नृत्य और सामुदायिक भोज का आयोजन होता है. कराची की होली खास इसलिए भी है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में हिंदू आबादी है. यहां शहर के अलग-अलग हिस्सों से लोग शामिल होते हैं और पूरे शहर में उत्सव का माहौल बनता है.
विधानसभा तक पाकिस्तान में होली
सिंध प्रांत के मीठी शहर को अक्सर हिंदू-मुस्लिम एकता का मॉडल माना जाता है. यहां हिंदू बहुसंख्यक हैं और वे होली को सिर्फ धार्मिक उत्सव के रूप में नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक आयोजन के रूप में भी मनाते हैं. मुस्लिम निवासी भी सक्रिय रूप से इसमें भाग लेते हैं और मटकी फोड़ जैसी पारंपरिक गतिविधियों में हिस्सा लेते हैं. इस तरह यह त्योहार सामुदायिक सद्भाव का प्रतीक बन जाता है और सिंध प्रांत में हिंदू विधायक विधानसभा में होली कार्यक्रम आयोजित करते हैं.
पाकिस्तान में कब और कैसे खेली जाती है होली?
पाकिस्तान में होली मुख्य रूप से हिंदू समुदाय मानता है और यह फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होती है. इस साल रंगों की होली 4 मार्च को खेली जाएगी. त्योहार की शुरुआत होलिका दहन से होती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, इसके बाद लोग गुलाल और रंगों के साथ खेलते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और सामूहिक भोज का आनंद लेते हैं. कराची में यह सबसे बड़े पैमाने पर होता है, मुख्य रूप से श्री स्वामीनारायण मंदिर में, जबकि मीठी, मुल्तान, लाहौर और रावलपिंडी में भी इसे स्थानीय रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है. पाकिस्तान में होली केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मिलन का अवसर भी है, जहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय भी साथ मिलकर इस त्योहार का आनंद लेते हैं.
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