कार्बाइड गन क्या है, इससे कैसे होता है धमाका?
कार्बाइड गन पीवीसी पाइप और कैल्शियम कार्बाइड से बना एक खतरनाक जुगाड़ है, जिससे बनने वाली एसिटिलीन गैस के विस्फोट से आंखों की रोशनी जाने और शरीर जलने का भारी खतरा रहता है.

दीपावली के त्योहार के दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए एक बेहद जानलेवा उपकरण यानी कार्बाइड गन की बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है. बीते सालों में त्योहार के समय इस खतरनाक जुगाड़ के चलते सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए और कई लोगों की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए चली गई थी. इसी भारी खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर राज्य में यह पाबंदी लगाई गई है. आइए जानें कि यह क्या है और इससे कैसे धमाका होता है.
क्या है कार्बाइड गन और कैसे बनी?
कार्बाइड गन असल में कोई फैक्टरी में बनी प्रामाणिक बंदूक नहीं है, बल्कि यह पीवीसी (PVC) पाइपों की मदद से तैयार किया गया एक स्थानीय जुगाड़ है. बाहर से देखने पर यह किसी मासूम खिलौने जैसी नजर आती है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली बेहद खतरनाक होती है. अतीत में इसका इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों द्वारा फसलों को बचाने और खेतों से बंदरों या अन्य जंगली जानवरों को दूर भगाने के लिए किया जाता था. इसी वजह से इसे शुरुआती दिनों में पीवीसी मंकी रिपेलर गन के नाम से भी जाना जाता था.
पटाखों की जगह कैसे फैली यह गन?
त्योहारों के दौरान तेज आवाज वाले पटाखों की मांग बहुत ज्यादा रहती है. जब लोगों ने देखा कि कार्बाइड गन बेहद कम खर्च में पारंपरिक पटाखों से भी तेज आवाज पैदा करती है, तो इसकी मांग बाजारों में तेजी से बढ़ गई. पिछले सालों में यह महज 150 से 200 रुपये की सस्ती कीमत पर स्थानीय बाजारों में खुलेआम बिकने लगी. ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के युवाओं और बच्चों ने इसे आतिशबाजी के आसान विकल्प के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिससे यह आम हादसों की बड़ी वजह बन गई.
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कार्बाइड गन में धमाका कैसे होता है?
इस उपकरण के भीतर होने वाला धमाका पूरी तरह से एक खतरनाक रासायनिक प्रक्रिया पर आधारित होता है. गन के पिछले हिस्से में कैल्शियम कार्बाइड का टुकड़ा रखा जाता है और उसमें थोड़ा पानी मिलाया जाता है. पानी और कैल्शियम कार्बाइड के संपर्क में आते ही तेजी से एसिटिलीन नाम की एक बेहद ज्वलनशील गैस बनती है. इसके बाद जब माचिस की तीली या स्पार्क से इसे आग दिखाई जाती है, तो दबाव के साथ एक तेज विस्फोट होता है. यह विस्फोट भारी मात्रा में तीव्र गर्मी और जहरीली गैसें बाहर निकालता है.
कार्बाइड गन के फटने से क्या हैं जोखिम?
कार्बाइड गन के इस्तेमाल में सबसे बड़ा जोखिम इसके निर्माण की गुणवत्ता को लेकर होता है. इसे बनाने में बेहद हल्के और सस्ते प्लास्टिक या पीवीसी पाइप इस्तेमाल किए जाते हैं, जो आंतरिक विस्फोट के दबाव को झेलने में सक्षम नहीं होते. कई बार रासायनिक क्रिया के दौरान पाइप बीच में से ही उड़ जाता है या उसके टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं. पाइप फटने से आसपास खड़े लोगों के चेहरे, हाथ और त्वचा पर गंभीर चोटें आती हैं और कई लोग जलने की वजह से अस्पताल पहुंच जाते हैं.
आंखों की रोशनी पर सीधा हमला
इस गन का सबसे घातक असर इंसान की आंखों पर पड़ता है. कई बार मसाला डालने के बाद जब तुरंत धमाका नहीं होता, तो उत्सुकता में लोग गन के बैरल (नाल) के सामने मुंह करके अंदर झांकने लगते हैं. ठीक उसी पल यदि विस्फोट हो जाए, तो जहरीली गैसें और पाइप के कण सीधे आंखों से टकराते हैं. इससे आंख का कॉर्निया और रेटिना पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है. इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी की 2023 की रिसर्च के अनुसार 23 मरीजों के अध्ययन में पाया गया कि इस गन के धमाके से आंखों की स्टेम कोशिकाएं तक नष्ट हो जाती हैं.
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