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Form 6 में क्या बदला, पहली बार वोट डालने वालों के लिए क्यों बढ़ी कागजी कार्रवाई?

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि उसने फॉर्म-6 में बदलाव की इजाजत नहीं दी थी. आइए जानें कि आखिर फॉर्म- 6 में क्या बदलाव हुआ है, जिससे कि नए वोटर्स के लिए काम बढ़ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने नए मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के लिए बने फॉर्म-6 में किए गए बदलावों पर बेहद अहम टिप्पणी की है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने साफ कर दिया कि अदालत ने इस फॉर्म में किसी भी तरह के फेरबदल को अपनी मंजूरी नहीं दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सरकारी रिकॉर्ड मंगाकर खुद इस बात की जांच करेगा कि कानून को दरकिनार करके फॉर्म-6 में यह बदलाव आखिर किस अधिकारी या संस्था के कहने पर किया गया. इस पूरे मामले ने अब एक नया कानूनी और राजनीतिक मोड़ ले लिया है. इसी बीच यह जानना जरूरी है कि आखिर फॉर्म-6 में क्या बदला है?

पहले फॉर्म-6 में क्या जोड़ा गया था?

विवाद की सबसे बड़ी वजह चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म-6 में जोड़ा गया एक नया घोषणा-पत्र था. इस बदलाव के तहत पहली बार वोटर बनने वाले युवाओं से उनके परिवार का पिछला चुनावी इतिहास मांगा जा रहा था. आवेदकों को यह जानकारी देनी थी कि क्या उनका, उनके माता-पिता या फिर उनके दादा-दादी का नाम साल 2000 के आसपास हुई किसी पुरानी एसआईआर वोटर लिस्ट में दर्ज था या नहीं. अगर जवाब हां था, तो उनसे पुराना बूथ नंबर, क्रमिक संख्या और विधानसभा क्षेत्र का पूरा विवरण फॉर्म में भरने को कहा जा रहा था.

विपक्ष और चुनाव आयुक्तों को आपत्ति क्यों?

इस नए नियम के सामने आते ही सियासी और कानूनी गलियारों में हंगामा मच गया. विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि संसद की मंजूरी और कानून मंत्रालय के गजट नोटिफिकेशन के बिना फॉर्म में यह बदलाव जोड़ना सरासर गैर-कानूनी है. वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आईटी कंपनी टीसीएस को ऑनलाइन फॉर्म में यह बदलाव करने का निर्देश किसने दिया था. सिर्फ बाहर ही नहीं, चुनाव आयोग के भीतर से भी इसकी मुखालफत हुई. चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस कदम को पूरी तरह अनधिकृत बताते हुए अपनी सख्त लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी.

यह भी पढ़ें: पुराने केस में पाए गए दोषी तो क्या गिरफ्तार हो सकते हैं CEC, क्या है कानून?


Form 6 में क्या बदला, पहली बार वोट डालने वालों के लिए क्यों बढ़ी कागजी कार्रवाई?

चुनाव आयोग की सफाई और मौजूदा स्थिति

जब यह मामला बढ़ा और आंतरिक विरोध तेज हुआ, तो चुनाव आयोग ने इस पर कदम पीछे खींचे. आयोग ने तर्क दिया था कि यह कोई फॉर्म का बदलाव नहीं बल्कि सिर्फ एक अतिरिक्त संलग्नक या एनेक्शर था. हालांकि, चौतरफा दबाव के बाद आयोग ने उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस अतिरिक्त घोषणा-पत्र को हटा दिया, जहां एसआईआर का काम पूरा हो चुका है. 30 सितंबर 2026 तक ईसीआईनेट पोर्टल और संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों से इस हिस्से को हटा लिया गया है, जबकि जिन इलाकों में एसआईआर चल रहा है, वहां यह शर्त अभी भी लागू है.

अब फॉर्म 6 में क्या बदला है और पहली बार वोट देने वालों के लिए बदलाव?

जिन इलाकों में एसआईआर का चरण खत्म हो चुका है, वहां युवाओं के लिए अब वोटर कार्ड बनवाना काफी आसान हो जाएगा. नए वोटरों को अब अपने दादा-दादी या माता-पिता के 20-22 साल पुराने वोटर रिकॉर्ड ढूंढने की भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी. पहले जिन युवाओं के पास अपने परिवार का पुराना रिकॉर्ड नहीं था, उनका फॉर्म अटक जाता था. अब इस अतिरिक्त शर्त के हटने से 18 साल पूरे कर चुके युवा सीधे अपनी उम्र, निवास स्थान और पहचान पत्र के आधार पर बिना किसी कागजी अड़चन के आसानी से फॉर्म-6 भर सकेंगे.


Form 6 में क्या बदला, पहली बार वोट डालने वालों के लिए क्यों बढ़ी कागजी कार्रवाई?

आगे क्या-क्या जरूरी दस्तावेज लगेंगे?

भले ही पुराने रिकॉर्ड से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटा ली गई हो, लेकिन वोटर आईडी कार्ड बनवाने के तय कानूनी नियम पहले की तरह लागू रहेंगे. नए आवेदक को अपनी सही उम्र का प्रमाण (जैसे जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट), भारतीय नागरिकता का सबूत और अपने मौजूदा पते का प्रमाण पत्र देना ही होगा. इसके अलावा पासपोर्ट साइज फोटो और बेसिक जानकारी भरने की प्रक्रिया जारी रहेगी. 

यह भी पढ़ें: क्या फॉर्म 6 में अपनी मर्जी से बदलाव नहीं कर सकता चुनाव आयोग, किसके पास ये पावर?

About the author निधि पाल

निधि पाल एबीपी लाइव में कंटेंट राइटर हैं. ये यहां पर जीके सेक्शन की जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. पिछले 7 साल से पत्रकारिता की दुनिया में कार्यरत निधि पाल ने इससे पहले अमर उजाला डिजिटल, न्यूज 24, ईटीवी भारत हैदराबाद जैसे बड़े संस्थानों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है.

पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो उन्होंने आईआईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन लखनऊ से जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है.

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