अगर स्पेस वॉर हुई तो क्या होगा, कौन-सा देश जीतेगा?
अगर अंतरिक्ष में छिड़ी जंग तो पूरी दुनिया में ठप हो जाएगा इंटरनेट और नेविगेशन सिस्टम, सुपरपावर्स के एंटी-सैटेलाइट हथियारों से मचेगी भारी तबाही, जानिए कौन जीतेगा महायुद्ध.

अमेरिकी वायुसेना ने पहली बार आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि उसने अंतरिक्ष में स्पेस कंट्रोल वेपन तैनात कर दिए हैं. अमेरिकी एयरफोर्स सेक्रेटरी ट्रॉय मीएंक के इस बयान के बाद अमेरिकी स्पेस फोर्स के चीफ जनरल बी. चांस साल्ट्समैन ने भी कहा कि सेना अंतरिक्ष में किसी भी टकराव को रोकने और जरूरत पड़ने पर निर्णायक तरिके से जीतने के लिए हर तरह की काउंटरस्पेस क्षमता में निवेश करती रहेगी.
इस खुलासे के बाद चीन और रूस की तरफ से भी अपनी क्षमताओं को लेकर हलचल तेज हो गई. इस सब के बाद दुनिया भर में इस बात पर चर्चा होने लगी कि अगर सच में कभी अंतरिक्ष में युद्ध छिड़ता है, तो कौनसा देश जीतेगा?
अमेरिका के पास क्या है ताकत?
अमेरिका का स्पेस फोर्स दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा फंडेड स्पेस प्रोग्राम माना जाता है, अमेरिका के पास मौजूद स्टारलिंक जैसे प्राइवेट कमर्शियल सैटेलाइट नेटवर्क भी उसकी सबसे बड़ी ताकत माने जाते हैं, क्योंकि युद्ध जैसी स्थिति में यह सैन्य कम्युनिकेशन को बैकअप देने का काम करते हैं. अमेरिका अभी भी अपनी ज्यादातर काउंटरस्पेस क्षमताओं को खुफिया ही रखता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके पास इंटरसेप्टर मिसाइलों से लेकर सैटेलाइट जैमिंग तक कई विकल्प मौजूद हैं.
चीन की तेजी से बढ़ती स्पेस पावर
चीन को अमेरिका के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है. 2025 के मध्य तक चीन के पास 1,060 से ज्यादा ऑपरेशनल सैटेलाइट थे, जिमसें से सैकड़ों जासूसी और निगरानी के काम में लगे हैं. एक्सपर्ट्स के मुताबिक चीन एक ऐसी काउंटरस्पेस रणनीति तैयार कर रहा है, जिसमें सैटेलाइट जैमर, साइबर हमले, लेजर तकनीक और डेटा लिंक पर हमले जैसे सॉफ्ट-किल तरीकों के साथ-साथ सीधे टकराने वाले हार्ड-किल हथियार भी शामिल हैं. चीन का SJ-21 जैसा को-ऑर्बिटल सैटेलाइट सिस्टम भी लगातार चर्चा में रहा है, जो दुश्मन के सैटेलाइट के करीब जाकर उसे बेअसर कर सकता है.
रूस की क्षमता में आई है गिरावट
रूस अंतरिक्ष को युद्ध का एक अहम मोर्चा मानता आया है, लेकिन फंडिंग की कमी और अंतरराष्ट्रीय अलगाव की वजह से उसकी क्षमताओं में गिरावट देखी गई है. 2025 में रूस ने सिर्फ 17 लॉन्च किए, जबकि 1995 से 2015 के बीच वह औसतन हर साल 26 से ज्यादा लॉन्च करता था. इसके बावजूद रूस को इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और सैन्य स्पेस सिस्टम का दशकों पुराना अनुभव है, और यूक्रेन युद्ध के दौरान उसने कई पश्चिमी सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम को साइबर हमलों से प्रभावित भी किया है.
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तो आखिर कौन जीतेगा?
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी एक देश को स्पेस वॉर का निर्णायक विजेता बताना अभी मुश्किल है, क्योंकि तीनों देशों के पास अलग-अलग तरह की ताकत मौजूद है. अमेरिका के पास सबसे ज्यादा फंडिंग और सबसे बड़ा कमर्शियल सैटेलाइट नेटवर्क है, चीन के पास सबसे तेजी से बढ़ता सैटेलाइट बेड़ा है, जबकि रूस के पास इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर का पुराना अनुभव है. एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि असली जीत सिर्फ हथियारों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि युद्ध के दौरान किसका सैटेलाइट नेटवर्क सबसे ज्यादा टिकाऊ साबित होता है.
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