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East India Company: क्या बनाती है अंग्रेजों वाली ईस्ट इंडिया कंपनी, जानें कौन है इसका मालिक?

East India Company: कभी भारत पर शासन करने वाली ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को 2005 में लक्जरी ब्रांड के रूप में दोबारा शुरू किया गया था. आइए जानें कि यह अब किस हालत में है और आखिर क्या बनाती है.

East India Company: करीब चार सौ साल पहले एक व्यापारिक कंपनी के रूप में शुरू हुआ नाम, जिसने भारत के इतिहास की दिशा बदल दी थी, अब फिर से सुर्खियों में है. कभी भारत में अपना साम्राज्य चलाने वाली ईस्ट इंडिया कंपनी का आधुनिक रूप 2025 में दिवालिया होकर बंद हो गया है. यह वही नाम है जिसने औपनिवेशिक दौर में भारत पर शासन किया और बाद में इतिहास की किताबों तक सीमित हो गया. 1874 में मूल कंपनी के खत्म होने के बाद, 2005 में इसे एक लग्जरी ब्रांड के तौर पर फिर जिंदा किया गया था. लेकिन आर्थिक संकट के कारण आधुनिक कंपनी भी टिक नहीं पाई और अब दोबारा इतिहास बन गई है. आइए जानें कि यह क्या बनाती है और इसका मालिक कौन है.

पुरानी ईस्ट इंडिया कंपनी क्या करती थी?

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को हुई थी. शुरुआत में यह एक ट्रेडिंग कंपनी थी, जो यूरोप और एशिया के बीच व्यापार करती थी. इसके मुख्य कारोबार में शामिल थे- भारत से कपास, रेशम, नील (इंडिगो), मसाले और साल्टपीटर. इसके अलावा चीन से चाय का व्यापार, अफीम की खेती और उसका चीन में अवैध व्यापार. 
कंपनी ने व्यापार पर एकाधिकार कायम किया था. धीरे-धीरे उसने भारत के बड़े हिस्सों पर अपना नियंत्रण कर लिया. अपनी निजी सेना के दम पर भारत में जमीन कब्जाई और भारतीय लोगों से टैक्स वसूला.1858 तक यह कंपनी भारत के बड़े हिस्से पर शासन कर रही थी. 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने सीधे सत्ता संभाल ली और 1874 में कंपनी को खत्म कर दिया गया.

आधुनिक दौर में फिर कैसे लौटी?

2005 के आसपास भारत में जन्मे ब्रिटिश कारोबारी संजीव मेहता ने इस ऐतिहासिक नाम के राइट्स खरीद लिए. उन्होंने 2003 से 2005 के बीच कंपनी का ब्रांड, नाम और प्रतीक चिह्न हासिल किया. इसके बाद कंपनी को एक लक्जरी रिटेल ब्रांड के रूप में दोबारा शुरू किया गया. इसका मुख्य स्टोर लंदन के मेफेयर इलाके में खोला गया था.
आधुनिक ईस्ट इंडिया कंपनी क्या बनाती या बेचती थी?

नई ईस्ट इंडिया कंपनी कोई साम्राज्य नहीं चला रही थी. यह एक हाई-एंड रिटेल ब्रांड थी जो प्रीमियम प्रोडक्ट बेचती थी. मुख्य उत्पाद थे- महंगी चाय, कॉफी, चॉकलेट, मसाले, गिफ्ट हैम्पर.
ब्रांड को एक लग्जरी और ऐतिहासिक पहचान के साथ पेश किया गया. इसे कई लोग इतिहास का उल्टा मोड़ भी कहते थे, क्योंकि जिस कंपनी ने कभी भारत पर शासन किया था, उसका नाम अब एक भारतीय मूल के कारोबारी के पास था. 

फिर क्यों बंद हो गई कंपनी?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आधुनिक कंपनी को वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ा. उस पर कर्ज बढ़ता गया, टैक्स और कर्मचारियों के भुगतान में देरी हुई. आखिरकार 2025 में कंपनी आधिकारिक रूप से लिक्विडेशन में चली गई, यानी उसकी संपत्तियां बेची जाएंगी और कर्ज चुकाया जाएगा. यह दूसरी बार है जब इस नाम की कंपनी का अस्तित्व खत्म हुआ है. अब इतिहास के सबसे चर्चित कॉरपोरेट नामों में से एक शायद हमेशा के लिए खत्म हो चुका है.

यह भी पढ़ें: India Iran Trade: ईरान से क्या-क्या खरीदता है भारत, जंग शुरू होने से किन चीजों पर बढ़ेगी महंगाई?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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