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भारत में पिटबुल पालने के क्या हैं नियम, इसकी अवहेलना पर कितनी हो सकती है सजा?

भारत के अलग-अलग राज्यों में पिटबुल जैसे कुत्तों को पालने का नियम अलग है. जैसे अगर आप दिल्ली एनसीआर में रहते हैं तो आपको पिटबुल पालने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा.

भारत में कुत्तों के हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. ऐसे में लोग अब खतरनाक ब्रीड के कुत्तों को पालने से बच रहे हैं. हालांकि, कुछ लोग अभी भी इस तरह के कुत्तों को पाल रहे हैं. चलिए आपको बताते हैं कि अगर आप पिटबुल पालते हैं या आपके पास पिटबुल है तो आपको किन नियमों का पालन करना होगा.

पिटबुल को पालने का नियम

भारत के अलग-अलग राज्यों में पिटबुल जैसे कुत्तों को पालने का नियम अलग है. जैसे अगर आप दिल्ली एनसीआर में रहते हैं तो आपको पिटबुल पालने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा. अगर आपके पास पहले से पिटबुल है तब भी आपको उसका रजिस्ट्रेशन कराना होगा. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आप पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा अगर किसी का पालतू कुत्ता किसी दूसरे व्यक्ति को काट लेता है तो इसकी जिम्मेदारी कुत्ता पालने वाले व्यक्ति को लेनी होगी. इसे ऐसे समझिए कि अगर आपके पालतू कुत्ते के हमले से किसी व्यक्ति की मौत होती है, तो मालिक के खिलाफ IPC की धारा 304ए के तहत लापरवाही से मौत के मामले में कठोर कारावास की सजा हो सकती है.

कुत्तों के हमले

NCRB के आंकड़ों से पता चलता है कि साल 2019 में देश में कुत्तों के काटने के 4,146 मामले सामने आए. भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पिछले साल संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए बताया था कि 2019, 2020, 2021 में देश में कुल कितने लोगों पर कुत्तों ने हमले किए. साल 2019 में 72 लाख 77 हजार 523 कुत्तों के हमले के मामले सामने आए. वहीं साल 2020 में 46 लाख 33 हजार 493 कुत्तों के हमले के मामले सामने आए थे. जबकि, 2021 में कुल 17,01,133 कुत्तों के काटने के मामले सामने आए थे.

क्यों हमला करते हैं पिटबुल

पिटबुल एक बहादुर और वफादार नस्ल का कुत्ता है जो अपने मालिकों के प्रति बहुत आत्मनिर्भरता और समर्पण की भावना रखता है. यानी अगर इस कुत्ते को कहीं से भी ये लगता है कि इसका मालिक खतरे में है तो वो सामने वाले व्यक्ति पर हमला कर देता है. इसके अलावा मौसम में हो रहा बदलाव भी इन कुत्तों के हमले की वजह हो सकता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो जून से अगस्त के बीच कुत्तों के प्रजनन का समय होता है और इसी दौरान उनके हॉर्मोन्स में बदलाव होता है जिसके बाद वे काफी ज्यादा अग्रेसिव बर्ताव करने लगते हैं. इसी दौरान कुत्तों के हमले भी बढ़ जाते हैं.

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