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क्यों खास है ताज? जानिए किस विदेशी नेता सबसे पहले किया था ताजमहल का दीदार

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ताज यात्रा के बीच जानिए इस ऐतिहासिक स्मारक का गौरवशाली इतिहास और कौन वह पहला विदेशी नेता था जिसने ताजमहल की खूबसूरती का दीदार किया था.

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  • ताजमहल की दीवारों पर जड़े हैं कीमती रत्न.

मोहब्बत की बेमिसाल निशानी ताजमहल की खूबसूरती का जादू हमेशा से दुनिया के सिर चढ़कर बोलता रहा है. हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अपनी पत्नी के साथ इस अद्भुत स्मारक को निहारने पहुंचे, जिसने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर ताज के आकर्षण को सुर्खियों में ला दिया है. सफेद संगमरमर की इस खूबसूरत इमारत को देखने के लिए हर साल दुनिया भर से लाखों लोग खिंचे चले आते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इतिहास में वह पहला विदेशी राष्ट्राध्यक्ष कौन था, जिसने सबसे पहले भारत आकर इस ऐतिहासिक और नायाब कलाकृति का दीदार किया था? आइए आपको बताते हैं. 

रुबियो दंपत्ति का ताज दीदार

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इन दिनों 4 दिन के भारत दौरे पर हैं. अपनी इस व्यस्त आधिकारिक यात्रा के दौरान वह सोमवार, 25 मई को विशेष रूप से आगरा पहुंचे. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मार्को रुबियो ने अपनी पत्नी जेनेट रुबियो के साथ ताजमहल का दीदार किया. अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया पर इस जोड़े की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर भी साझा की. ताज की सुंदरता से मंत्रमुग्ध होकर अमेरिकी विदेश मंत्री ने इसे दुनिया भर में प्रेम की सबसे खूबसूरत और अनोखी निशानियों में से एक बताया.

ताज की वास्तुकला का जादू

मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पसंदीदा बेगम मुमताज महल की याद में इस भव्य स्मारक का निर्माण करवाया था. ताजमहल को भारतीय, फारसी और इस्लामी वास्तुकला के बेहतरीन और अनोखे तालमेल से तैयार किया गया है. इसे बनाने में राजस्थान के मकराना के उच्च गुणवत्ता वाले सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया था. इस मुख्य इमारत के चारों कोनों पर बनी मीनारों को हल्का सा बाहर की तरफ झुकाया गया है, ताकि कभी तेज भूकंप आने की स्थिति में ये मुख्य गुंबद पर न गिरकर बाहर की ओर गिरें.

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बदलते रंगों का आकर्षण

ताजमहल की सबसे बड़ी और जादुई खासियत यह है कि यह दिन के अलग-अलग समय पर अपना रंग बदलता हुआ दिखाई देता है. सुबह के शुरुआती पहर में सूर्य की किरणों के साथ यह हल्का गुलाबी नजर आता है. दोपहर और शाम के वक्त यह पूरी तरह से दूधिया सफेद रंग में तब्दील हो जाता है, जबकि चांदनी रात में इसकी चमक सुनहरी हो जाती है. यह अद्भुत नजारा सैलानियों को बेहद आकर्षित करता है और इसी वजह से इसे दुनिया के 7 अजूबों में शामिल किया गया है.

बेशकीमती पत्थरों की कारीगरी

ताजमहल को सिर्फ पत्थरों से खड़ा नहीं किया गया, बल्कि इसकी दीवारों पर की गई पच्चीकारी या पेत्रा-ड्यूरा की कारीगरी इसे दुनिया में सबसे अलग बनाती है. इसके निर्माण के दौरान दीवारों और डिजाइनों को सजाने के लिए दुनिया भर से लाए गए हीरे, पन्ना, नीलम और अकीक जैसे कई बेहद कीमती रत्नों और पत्थरों को संगमरमर के अंदर जड़ा गया था. यही वजह है कि सदियां बीत जाने के बाद भी इसकी चमक और बारीक नक्काशी आज भी बिल्कुल वैसी की वैसी ही बनी हुई है. 

पहला विदेशी राष्ट्राध्यक्ष जिसने ताजमहल देखा

अमेरिकी विदेश मंत्री से पहले सदियों से दुनिया के बड़े-बड़े नेता यहां आते रहे हैं. ऐतिहासिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड्स के मुताबिक, सबसे पहले अफगानिस्तान के राजा अमीर अब्दुर्रहमान खान ने साल 1895 में ताजमहल का दीदार किया था. वह आधिकारिक तौर पर भारत की यात्रा पर आने वाले और इस ऐतिहासिक स्मारक की सुंदरता को करीब से देखने वाले दुनिया के पहले विदेशी राष्ट्राध्यक्ष थे. उनके इस दौरे के बाद से ही दुनिया भर के तमाम बड़े वैश्विक नेताओं और राष्ट्रपतियों के ताज देखने का सिलसिला शुरू हुआ.

वैश्विक नेताओं का पसंदीदा गंतव्य

अफगानिस्तान के राजा अमीर अब्दुर्रहमान खान के उस पहले ऐतिहासिक दौरे के बाद से लेकर आज तक दुनिया का शायद ही कोई ऐसा बड़ा नेता होगा जो भारत आया हो और ताज न गया हो. अमेरिकी राष्ट्रपतियों से लेकर यूरोपीय देशों के राष्ट्राध्यक्षों तक, हर कोई भारत आने पर आगरा के इस ऐतिहासिक स्मारक को देखने की इच्छा जरूर जताता है. मार्को रुबियो की यह ताजा यात्रा भी इसी बात का प्रमाण है कि वक्त बदलने के बाद भी इस ऐतिहासिक वैश्विक धरोहर का महत्व और आकर्षण दुनिया भर में आज भी उतना ही मजबूत है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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