US Military Rescue: दुश्मनों के कब्जे से अपने सैनिक कैसे निकालता है अमेरिका, किन तरीकों का होता है इस्तेमाल?
US military rescue: अमेरिकी सेना का बहुत अहम सिद्धांत नो मैन लेफ्ट बिहाइंड है. यानी किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा. यह केवल नारा नहीं बल्कि सैन्य रणनीति का हिस्सा है.

US Military Rescue: फरवरी के आखिरी सप्ताह से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. हालांकि अब अमेरिका ने ईरान पर दो हफ्ते के लिए सीजफायर रोकने की घोषणा की है. अमेरिका के इस कदम को ईरान के होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और बातचीत में शामिल होने की इच्छा से जोड़ा जा रहा है. वहीं तीनों देशों के बीच चल रहे तनाव में अब तक काफी लोगों की जान जा चुकी है.
पिछले कुछ दिनों इस तनाव के बीच अमेरिका के एक लड़ाकू विमान के क्रैश होने और उसके क्रू मेंबर को ईरान के अंदर से सुरक्षित निकालने की घटना ने भी एक बार फिर अमेरिकी सेना की रेस्क्यू रणनीति को सुर्खियों में ला दिया था. हालांकि इसी के साथ एक सवाल यह भी चर्चा में आ गया कि आखिर अमेरिका अपने सैनिकों को दुश्मन के इलाके से कैसे निकलता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि दुश्मन के कब्जे से अमेरिका अपने सैनिक कैसे निकलता है और किन तरीकों का वह इस्तेमाल करता है?
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अमेरिका का नो मैन लेफ्ट बिहाइंड का सिद्धांत
अमेरिकी सेना का एक बहुत अहम सिद्धांत नो मैन लेफ्ट बिहाइंड है. यानी किसी भी सैनिक को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा. यह केवल नारा नहीं बल्कि सैन्य रणनीति का हिस्सा है. इसी सोच के तहत अगर कोई सैनिक या पायलट दुश्मन के इलाके में फंस जाता है, तो उसे सुरक्षित निकालने के लिए तुरंत ऑपरेशन शुरू किया जाता है.
क्या होता है CSAR ऑपरेशन?
दुश्मनी इलाके में फंसे सैनिकों को निकालने के लिए अमेरिका कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलता है. यह खतरनाक और बहु स्तरीय मिशन होता है, जिसमें एयरफोर्स, नेवी और स्पेशल फोर्सेज मिलकर काम करती है. जैसे ही किसी पायलट या सैनिक के फंसने की जानकारी मिलती है. कुछ मिनट में उसकी लोकेशन ट्रैक कर ली जाती है और रेस्क्यू टीम एक्टिव हो जाती है.
मिनटों में शुरू हो जाता है मिशन
अमेरिका की खासियत यह है कि उसकी रेस्क्यू टीम पहले से ही स्टैंड बाय रहती है. घटना के बाद तैयारी नहीं की जाती है, बल्कि मिशन को तुरंत एक्टिवेट कर दिया जाता है. करीब 15 मिनट के अंदर नजदीकी यूनिट को अलर्ट कर दिया जाता है और हेलीकॉप्टर फाइटर जेट्स व ड्रोन मिशन के लिए तैयार हो जाते हैं. कई मामलों में आधे घंटे के अंदर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो जाता है.
गोल्डन ऑवर का महत्व
अमेरिका के रेस्क्यू ऑपरेशन में पहला घंटा बहुत अहम माना जाता है, जिसे गोल्डन ऑवर भी कहा जाता है. अगर इस दौरान सैनिक की लोकेशन पता लगा कर उसे सुरक्षित कर लिया जाए तो उसके बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है. साथ ही दुश्मन के हाथ लगने का खतरा भी कम हो जाता है.
दुश्मन के इलाके में सैनिक कैसे बचता है?
रेस्क्यू टीम के पहुंचने से पहले अमेरिकी सैनिक को खुद को बचाना होता है. इसके लिए उसे SERE यानी Survival, Evasion, Resistance, Escape ट्रेनिंग दी जाती है. सैनिक को सिखाया जाता है कि दुश्मन के इलाके में फंसने के तुरंत बाद जगह बदलने की कोशिश रहे और रात में ही मूव करें. वहीं अमेरिकी सैनिकों के पास के पास एक सर्वाइवल किट होती है, जिसमें खाने पीने का सामान मेडिकल किट और सिग्नलिंग डिवाइस होते हैं. सैनिक इंक्रिप्टेड रेडियो के जरिए अपनी लोकेशन रेस्क्यू टीम तक पहुंचाता है, लेकिन बहुत सावधानी से ताकि दुश्मन उसकी लोकेशन ट्रैक न कर सके.
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Source: IOCL



























