LPG Crisis: 15 दिन के लिए खुला होर्मुज स्ट्रेट, क्या इससे तुरंत दूर हो जाएगी LPG की किल्लत?
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से गैस की सप्लाई पर असर पड़ था और भारत पर भी इसका असर दिखा. अब 15 दिनों के लिए यह जलमार्ग खोलने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि इससे भारत में एलपीजी की किल्लत खत्म हो जाएगी?

Hormuz Strait: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के लिए सीजफायर का ऐलान हुआ है, जिसके बाद सबसे बड़ा असर दुनिया के अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ा है. दोनों देशों की सहमति के बाद 15 दिनों के लिए इस जलमार्ग को खोलने का फैसला लिया गया है. इसके बाद कई सवाल भी उठने लगे.
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनियाभर में गैस की सप्लाई पर असर पड़ रहा था और भारत पर भी इसका असर दिख रहा था. ऐसे में अब 15 दिनों के लिए यह जल मार्ग खोलने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि इससे भारत में एलपीजी और ईंधन की किल्लत खत्म हो जाएगी या अभी भी राहत मिलने में समय लगेगा. बता दें कि यह सीजफायर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से डेडलाइन खत्म होने से पहले घोषित कर दिया गया. अमेरिका और ईरान दोनों ने 15 दिनों तक हमले रोकने पर सहमति जताई. इसके साथ ही ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को सीमित समय के लिए खोलने का फैसला किया है, ताकि जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके.
क्यों अहम हैं होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त तेल और गैस रूट में से एक है. यहां से वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है. भारत के लिए इस जलमार्ग की अहमियत और ज्यादा है, क्योंकि देश का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी का आयात इसी रास्ते से होता है. हालत बिगड़ने के बाद जब ईरान ने इस मार्ग को बंद किया था, तब भारत में ईंधन सप्लाई पर दबाव बढ़ने लगा था. होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद भारत को झटका इसलिए लगा क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है. रिपोर्ट्स के अनुसार भारत लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत से ज्यादा एलएनजी और 90 प्रतिशत एलपीजी इसी रास्ते से आता है. ऐसे में जहाज की आवाजाही रुकने से सप्लाई चैन प्रभावित हुई और देश में संकट गहराने लगा.
क्या होर्मुज स्ट्रेट खुलने से भारत को तुरंत मिलेगी राहत?
सीजफायर के बाद भले ही होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया गया है. लेकिन देश में एलपीजी से राहत मिलने में समय लग सकता है. दरअसल एक्सपर्ट्स के अनुसार जहाज की आवाजाही सामान्य होने, अटके हुए टैंकरों के निकलने और सप्लाई चैन को पटरी पर लौटने में कुछ समय लगेगा. फिलहाल पारस की खाड़ी में भारत के कई जहाज अभी भी फंसे हुए हैं, जिन्हें बाहर निकलने में वक्त लग सकता है. हालांकि कुछ भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से आगे बढ़ रहे हैं और जल्दी ही देश में पहुंच सकते हैं, जिससे एलपीजी सप्लाई पर दबाव धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है.
दो हफ्तों में क्या हो सकता है?
सीजफायर के इस 15 दिन के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की तैयारी भी चल रही है. दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वार्ता प्रस्तावित है. जहां स्थायी समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी. ईरान की ओर से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव भी दिया गया है, जिसमें युद्ध खत्म करने, प्रतिबंध हटाने और सुरक्षित समुद्री रास्ता सुनिश्चित करने जैसी मांगें शामिल हैं.
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Source: IOCL



























