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Dark Transit: क्या है डार्क ट्रांजिट? जिससे समंदर में अचानक गायब हो जाता है जहाज, ईरानी नेवी को ऐसे ही दिया जा रहा चकमा

Dark Transit: दुश्मनों से बचने के लिए जहाज डार्क ट्रांजिट का इस्तेमाल करते हैं. आइए जानते हैं क्या है यह रणनीति और कैसे होता है इसका इस्तेमाल.

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  • होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण वैश्विक शिपिंग प्रभावित हुई है।
  • ईरानी संघर्ष के कारण समुद्री यातायात में भारी कमी आई है।
  • डार्क ट्रांजिट रणनीति से जहाजों की निगरानी से बचने में मदद मिलती है।
  • जहाज ट्रांसपोंडर बंद कर शिपिंग से जुड़े जोखिमों को कम करते हैं।

Dark Transit: होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते तनाव ने वैश्विक शिपिंग मार्ग को काफी बुरी तरह से प्रभावित किया है.  ईरान से जुड़े संघर्ष की वजह से इस रास्ते से समुद्री यातायात में भारी गिरावट देखने को मिली है. अब यहां से सिर्फ कुछ सीमित संख्या में ही जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जा रही है. इन प्रतिबंधों के बावजूद कई जहाज इस रास्ते से निकलने और अपनी यात्रा को जारी रखने में सफल रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण लाइबेरियाई झंडा वाला एक टैंकर है, जो हाल ही में मुंबई बंदरगाह पर पहुंचा. रिपोर्ट्स के मुताबिक इस जहाज ने डार्क ट्रांजिट नाम की एक रणनीति का इस्तेमाल करके निगरानी से बचने में सफलता पाई है.

क्या है डार्क ट्रांजिट?

डार्क ट्रांजिट को कभी-कभी गोइंग डार्क भी कहा जाता है.  यह जहाजों के द्वारा समुद्र में अपनी गतिविधि को छिपाने के लिए अपनाई जाने वाली एक रणनीति है. इसमें जहाज के ऑटोमेटिक आईडेंटिफिकेशन सिस्टम या फिर ट्रांसपोंडर को जानबूझकर बंद कर दिया जाता है. 

आमतौर पर ऑटोमेटिक आईडेंटिफिकेशन सिस्टम लगातार जहाज की पहचान, जगह, गति और रास्ते की जानकारी देता रहता है. इससे दूसरे जहाज और निगरानी एजेंसियां उसे वास्तविक समय में ट्रैक कर पाती हैं. जब इस सिस्टम को बंद कर दिया जाता है तो जहाज सार्वजनिक शिप ट्रैकिंग मैप और उपग्रह निगरानी प्लेटफार्म से पूरी तरह से गायब हो जाता है.

कैसे होता है इस तकनीक का इस्तेमाल? 

डार्क ट्रांजिट अभियान के दौरान जहाज का चालक दल ऑटोमेटिक आईडेंटिफिकेशन सिस्टम सिग्नल को निष्क्रिय कर देता है. इससे जहाज की स्थिति का पता ट्रैकिंग प्रणाली द्वारा नहीं लगाया जा सकता. बिना इस सिग्नल के जहाज डिजिटल समुद्री मैप से पूरी तरह से गायब हो जाता है. कुछ मामलों में जहाज खुद को छुपाने के लिए बाहरी नेविगेशन लाइट और कुछ रडार उपकरणों को भी बंद कर देते हैं.

क्यों किया जाता है इस रणनीति का इस्तेमाल?

इस रणनीति का इस्तेमाल अक्सर ज्यादा जोखिम वाले समुद्री क्षेत्र में किया जाता है.  इसका इस्तेमाल उन जगहों पर खासतौर पर किया जाता है जहां जहाजों को सैन्य खतरों का सामना करना पड़ सकता है. होर्मुज स्ट्रेट जैसे क्षेत्रों में जहाजों को इस बात का डर रहता है कि वे दुश्मनों द्वारा किए जाने वाले मिसाइल या ड्रोन हमले का निशान बन सकते हैं.

इसी के साथ इस रणनीति का इस्तेमाल करके जहाज जब्ती या फिर निरीक्षण से भी बच पाते हैं. ईरान ने पहले भी ऐसे जहाजों को चेतावनी दी है या फिर उन्हें हिरासत में लिया है जिनके बारे में उसका मानना था कि वह उसके नियम या फिर प्रतिबंध का उल्लंघन कर रहे हैं. 

एक बड़ा जोखिम 

वैसे तो डार्क ट्रांजिट जहाज को पकड़ें जाने से बचने में काफी मदद कर सकता है लेकिन यह पूरी तरह से सुरक्षित नहीं है. ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को बंद करने से दूसरे जहाजों से टकराने का जोखिम काफी बढ़ जाता है. इतना ही नहीं बल्कि सैन्य ताकतों के पास अभी भी ऐसे एडवांस्ड राडार और निगरानी तकनीक मौजूद हैं जो जहाजों का पता लगा सकती हैं.

यह भी पढ़ें: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत आने में कितना वक्त लेता है एक शिप? समझ लें पूरा रूट

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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